आगराउत्तर प्रदेश

जनकवि नज़ीर अकबराबादी की विरसत को पुर्नस्थापना का अभियान

आगरा। जनकवि’ मियां नजीर अकबराबादी की विरासत और यादों को सहेजने के लिये एक विशाल हस्ताक्षर अभियान को अमृता विद्या एजुकेशन फॉर इम्मोर्टालिटी संस्था द्वारा प्रारंभ किया गया है। संस्था के सेक्रेटरी अनिल शर्मा ने बताया कि यह प्रयास एक नयी शुरुआत जरूर है किंतु शहर वासियों से उम्मीद है कि इसे पूर्व में किये जाते रहे प्रयासों से जोड कर उनके अगले चरण के रूप में ही देखा जायेगा।

श्री शर्मा का कहना है कि मियां नजीर अकबराबादी, जिन्हें उनकी धर्मनिरपेक्ष और लोक-केंद्रित कविताओं के लिए जाना जाता है, साझा संस्कृति (गंगा-जमुनी तहजीब) के प्रतीक रहे हैं। संस्था का मानना है कि वर्तमान पीढ़ी को उनके साहित्यिक योगदान की जानकारी दिया जाना अनिवार्य है।

–अभियान का उद्देश्य

इस अभियान के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार का ध्यान नजीर अकबराबादी की उपेक्षित विरासतों की ओर आकर्षित करना है। हस्ताक्षर अभियान के जरिए सरकार से मांग की जाएगी कि:उनकी स्मृति में विशेष स्मारकों या पुस्तकालयों का जीर्णोद्धार किया जाए।

प्रयास होगा कि नजीर की रचनाओं को शैक्षणिक पाठ्यक्रमो में उचित स्थान मिले।ताजगंज की मल्लिकों गली में स्थित उनकी मज़ार और संबंधित स्थलों का संरक्षण सुनिश्चित हो।

नजीर केवल एक कवि नहीं, बल्कि भारतीय समाज की एकता की आवाज थे।यही कारण है कि बडी संख्या में स्थानीय नागरिक और साहित्य प्रेमी इस मुहिम से जुड़कर आवाज बुलंद करने को तत्पर हैं।

–ताजमहल के प्रति अटूट प्रेम

मियां नजीर अकबराबादी का ताजमहल के प्रति प्रेम अतुलनीय था। इसी लगाव के कारण उन्होंने कभी आगरा नहीं छोड़ा और अपनी पूरी जिंदगी इसी शहर की गलियों और संस्कृति को समर्पित कर दी।

–लोकप्रिय ‘जन कवि’ और सामाजिक सरोकार:

नजीर वास्तव में जनता के कवि थे। उनकी लेखनी में भारतीय त्योहारों, मेलों, जीवन के दर्शन और आम आदमी के सुख-दुख का जीवंत चित्रण मिलता है।वे गली-कूचे के विक्रेताओं की मदद के लिए उन्हें तुकबंदी वाले शेर (couplets) लिखकर देते थे ताकि वे अपना सामान आसानी से बेच सकें।

–सांस्कृतिक प्रभाव

उनकी शायरी ताजगंज क्षेत्र की महिलाओं और आम जनमानस के बीच अत्यंत लोकप्रिय थी, जहाँ उनके कलामों,नज्मो और गजलों पर चर्चा की जाती थी।नजीर अकबराबादी की भगवान कृष्ण के प्रति वैसी ही अनन्य श्रद्धा थी जैसी प्रसिद्ध मुस्लिम कवि रसखान की थी। उनकी कविताओं में कृष्ण प्रेम और दर्शन की गहरी झलक मिलती है, जो उन्हें भारतीय धर्मनिरपेक्ष संस्कृति का एक बड़ा स्तंभ बनाती है।

सरकार से मुख्य मांगें:-

-संस्था इस हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से सरकार से मांग करती है कि नजीर अकबराबादी की स्मृति में विशेष स्मारकों का निर्माण हो और उनकी रचनाओं को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां उनकी महान विरासत से परिचित हो सकें।

-मेट्रो स्टेशन का नामकरण: आगरा मेट्रो के किसी प्रमुख स्टेशन का नाम ‘नजीर अकबराबादी मेट्रो स्टेशन’ रखा जाए या उनके नाम को जोड़ा जाए।मेट्रो का ध्येय वाक्य ‘नई विरासत की ओर’ है। इसी के अनुरूप, मेट्रो स्टेशनों की दीवारों पर नजीर के प्रसिद्ध भजन और उनको “अवामी शायर” के रूप में स्थापित करने वाली नज्म :-

“आशिक कहो, असीर कहो, आगरे का है,

मुल्ला कहो, दबीर कहो, आगरे का है,

मुफ़लिस कहो, फ़कीर कहो, आगरे का है,

शायर कहो, नज़ीर कहो, आगरे का है

को प्रदर्शित किया जाए। जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटक आगरा की वास्तविक सांस्कृतिक विरासत और गंगा-जमुनी तहजीब को समझ सकेंगे।

सड़क का नामकरण– पुरानी मंडी से मलको गली तक जाने वाले मार्ग का नाम ‘नजीर अकबराबादी मार्ग’ घोषित किया जाए।

संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि जल्द ही इस हस्ताक्षर अभियान के साथ आगरा के जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया जाएगा और उन्हें इस मुहिम से जोड़कर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा कि नजीर की विरासत को ‘नई विरासत’ का हिस्सा बनाया जाए।

हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत मियां नजीर मल्लिको गली स्थित मजार से शुरू हुई, इसमें मियां फैज शाह, श्री आरिफ तैमूरी,असलम सलीमी आदि सहभागी रहे।

फिल्म बनाने का प्रयास

आगरा के सुधिजनो का प्रयास – जनकवि नज़ीर पर एक डाक्यूमेंट्री ड्रामा फिल्म बनाने का प्रयास होगा. इस संदर्भ में एक प्रोमो फिल्म मिथुन प्रमाणिक द्वारा बनाई गयी है. इस का अवलोकन कर चर्चा भी की गयी. इस चर्चा में सुधीर नारायण , डॉ मधु भारद्वाज, फैज़ शाह, डॉ विजय शर्मा, आरिफ तैमूरी, शांतनु, अजय तोमर , असलम सलीमी, अनिल शर्मा आदि उपस्थित रहे .

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