देश में आक्रांताओं के नाम वाली सड़कों, संस्थानों, भवनों, सार्वजनिक स्थानों के नाम बदले जाए : डॉ दिनेश शर्मा

नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद एवं यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा देश में आक्रांताओं के नाम वाली सड़कों ,संस्थानों , भवनों , सार्वजनिक स्थानों के नाम बदलने की माँग की है। उनका कहना है कि आज़ादी के इतने वर्ष बाद भी इन नामों को बनाये रखना उन अत्याचारियों को महिमामंडित करने के समान है और इससे हमारे सांस्कृतिक मूल्यों के मिटने का ख़तरा भी पैदा होता है।
शून्य काल में राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक महत्व के विषय को उठाते हुए सांसद ने कहा कि देश में आज भी सड़कों और संस्थानों आदि के नाम उन विदेशी आक्रांताओं के नाम पर हैं जिन्होंने देश पर हमला किया था तथा देशवासियों पर अत्याचार किए थे। सही मायने में इन स्थानों के नाम उन लोगों के नाम पर होने चाहिए जिन्होंने देश के गौरव की रक्षा की और बलिदान दिया। आक्रांताओं के नाम को बनाये रखने से देश की भावी पीढ़ी में ग़लत संदेश भी जाएगा।
डॉ शर्मा ने कहा कि इन नामों को बनाये रखना उन संतों वैज्ञानिकों स्वतंत्रता सेनानियों आदि का अपमान है जिन्होंने अपने परिश्रम संकल्प समर्पण से भारत के नीव मजबूत की है। ये केवल नाम बदलने की बात नहीं है बल्कि राष्ट्रीय पहचान और न्याय का सवाल है। नाम बदलने से ये संदेश भी जाएगा कि भारत लुटेरों एवं अत्याचारियों का नहीं बल्कि अपने असल नायकों की विरासत का सम्मान करता है।
सांसद ने कहा कि हाल में महाराष्ट्र में औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजी नगर किया गया है जो संभाजी महाराज के बलिदान का स्मरण करता है। संभाजी महाराज ने औरंगज़ेब की क्रूरता का डटकर सामना करते हुए धर्म और राष्ट्र रक्षा के लिए प्राण न्योछावर किए थे। इसी प्रकार उस्मानाबाद का नाम धाराशिव किया गया है। ये नाम का परिवर्तन देश के लोगों की भावना को दर्शाता है। दिल्ली में औरंगज़ेब रोड का नाम बदलकर पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे कलाम के नाम पर रखा गया है।
सांसद ने गृह मंत्रालय से आग्रह किया है कि देशभर में ऐसे नामों की समीक्षा की जाए और एक संगठित प्रक्रिया के तहत उन्हें बदला जाए। इन स्थानों के नाम उन भारतीय नायकों के नाम पर रखे जाए जिन्होंने राष्ट्र सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। ऐसा करने से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा भी मिलेगी।