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टीबी उन्मूलन अभियान में सेतु का कार्य कर रहा ‘निक्षय दिवस’, अब तक हुई 7.5 लाख लोगों की टीबी स्क्रीनिंग

आगरा। बरौली अहीर ब्लॉक के ग्राम चमरौली निवासी 21 वर्षीय नसरीन (बदला हुआ नाम) बताती हैं कि घर के पास हर माह की 15 तारीख को आयोजित होने वाले निक्षय दिवस के कारण आज वह और उनका बच्चा स्वस्थ है। उन्होंने बताया कि नवंबर 2025 में छाती में दर्द, बुखार, खांसी व कमजोरी की शिकायत होने पर उन्होंने निजी डॉक्टर से उपचार कराया। आराम न होने पर उन्होंने क्षेत्रीय आशा कार्यकर्ता गगनदेवी से संपर्क किया। नसरीन बताती हैं कि गगनदेवी मुझे निक्षय दिवस के अवसर पर चमरौली (कहरई) आयुष्मान आरोग्य मंदिर में लगाए गए कैंप में ले गई। यहां पर नसरीन की टीबी की जांच की गई। जांच की रिपोर्ट में टीबी की पुष्टि हुई। नसरीन कमजोर थीं, ऐसे में उन्हें बरौली अहीर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेफर कर दिया गया, जहां पर उनकी महिला चिकित्सक द्वारा खून सहित अन्य जांच कराई गईं। जांच रिपोर्ट आने पर पता चला कि नसरीन गर्भवती हैं। इसके बाद सीएचसी पर तैनात चिकित्सकों की टीम ने नसरीन का उपचार किया।

नसरीन ने बताया कि आशा कार्यकर्ता द्वारा उनका साप्ताहिक फॉलोअप करके कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) और चिकित्सकों को भेजा गया। सीएचओ द्वारा माह में चार बार गर्भावस्था की जांच के साथ-साथ स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। इस दौरान विशेष रूप से खानपान का ध्यान रखने की सलाह दी गई। साथ ही नियमित टीबी की दवा का सेवन करने की सलाह दी गई। नसरीन बताती है कि गर्भावस्था के आठ माह पर चिकित्सकों ने बताया कि हाल ही में हुए अल्ट्रासाउंड में उनका बच्चा भी स्वस्थ है। इसके साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत उनके खाते में प्रतिमाह एक हजार रुपये का भत्ता भी मिला है। साथ ही हर माह पोषण सामग्री भी दी गई। वह लगातार चिकित्सक के बताए अनुसार दवाएं खाती रही। उनकी टीबी का उपचार मई 2025 में पूर्ण हो चुका है। जून में हुई टीबी की फॉलोअप जांच में वह टीबी मुक्त पाई गई हैं। नसरीन ने कहा कि निक्षय दिवस व राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम उनके लिए वरदान साबित हुआ है, अन्यथा की स्थिति में उन्हें पता भी नहीं चलता और उन्हें टीबी रोग के गंभीर परिणाम का सामना करना पड़ता। उन्होंने कहा कि उनके टीबी के उपचार के दौरान उनके परिवार के अन्य सदस्यों की भी टीबी की स्क्रीनिंग की गई और टीबी से बचाव की दवा (टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी) भी खिलाई गई। नसरीन ने बताया कि 6 अगस्त 2025 को उन्होंने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, जिसका वजन 3.5 किलो था। उन्होंने बताया कि वह और उनका बच्चा दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं। अब वह और उनका परिवार टीबी से मुक्त हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि निक्षय दिवस के माध्यम से दिसंबर 2022 से दिसंबर 2025 तक 7.5 लाख लोगों की टीबी स्क्रीनिंग की जा चुकी है। वर्ष 2025 में जनवरी से दिसंबर तक 30079 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई और उनका उपचार चलाया जा रहा है, इस दौरान वर्ष 2025 में जनवरी से दिसंबर तक 27159 टीबी मरीजों ने सफल उपचार कराकर खुद को टीबी मुक्त कर लिया है। उन्होंने बताया कि टीबी के उपचार के लिए सरकार की ओर से जांच और उपचार का प्रावधान है। टीबी की सभी दवाएं मरीज को प्राप्त कराई जाती हैं। टीबी मरीज का उपचार दो श्रेणियां के अंतर्गत किया जाता है। पहले ड्रग सेंसिटिव टीबी, इसका उपचार 6 माह तक चलता है। दूसरा ड्रग रेजिस्टेंस टीबी, इसका उपचार 9 से 11 माह तक चलता है। इसी के तहत एक्सडीआर का इलाज 18 से 20 माह तक चलता है। मरीज को टीबी की दवा सुबह नाश्ते के बाद ही लेनी है। उन्होंने ने बताया कि मरीज को इलाज के दौरान दवाओं के साथ-साथ पोषण और भावनात्मक सहयोग भी जरूरी है। इसलिए टीबी की दवा के साथ-साथ पोषण का भी ध्यान रखना चाहिए और परिवार व समाज के लोगों को टीबी मरीजों का भावनात्मक सहयोग करना चाहिए।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि जनपद आगरा पूरे प्रदेश में टीबी मरीजों को खोजने के मामले में अव्वल रहा है। इसमें निक्षय दिवस पर आयोजित होने वाले कैंप महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि जनपद में 215 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 53 डेजिग्नेटेड माइक्रोस्कोपी सेंटर (डीएमसी) 26 टीबी यूनिट, 44 प्राइमरी हेल्थ इंस्टीट्यूट (पीएचआई) और 30 अर्बन पीएचसी पर हर माह की 15 तारीख को निक्षय दिवस मनाया जाता है। यहां पर सीएचओ के माध्यम हर महीने की 15 तारीख को निक्षय दिवस आयोजित किए जाते हैं। निक्षय दिवस में टीबी रोग के प्रति लोगों को जागरुक किया जाता है। इसके साथ ही टीबी जैसे लक्षणों वाले रोगियों की टीबी स्क्रीनिंग की जाती है। जिन लोगों में टीबी की पुष्टि होती है, उनका उपचार शुरू किया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों की भी टीबी स्क्रीनिंग की जाती है, जिससे कि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। डीटीओ ने बताया कि जनपद में सीएचओ दिव्या द्वारा अब तक चार हजार से अधिक टीबी रोगियों को निक्षय दिवस के माध्यम से नोटिफाई किया है, जो जनपद के सभी सीएचओ में सर्वश्रेष्ठ आंकड़ा है।

डीटीओ ने बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है। यह ट्युबरकुलोसिस बैक्टीरिया से होती है। टीबी दो तरह की होती है। 1. पल्मोनरी टीबी ( फेफड़ों की टीबी ) 2. एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी बाल और नाखून को छोड़कर शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है। इसमें केवल फेफड़ों की टीबी संक्रामक होती है। उन्होंने बताया कि टीबी का उपचार पूरी तरह संभव है। निक्षय दिवस भ्रांतियों और रूढ़िवादी विचारधाराओं को हराकर जागरुकता की अलख जला रहा हैं ।

डीटीओ ने बतााय कि यदि किसी को दो सप्ताह से अधिक से खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, मुंह से खून आना, सीने में दर्द होना, सांस लेने में तकलीफ होना, वजन कम होना, भूख न लगना, थकान होना, गर्दन में गिल्टी/गांठे, बांझपन और कोई अन्य लक्षण हों तो तो वह नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या फिर निक्षय दिवस में आकर अपनी टीबी की जांच अवश्य कराएं। टीबी का उपचार संभव है।

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