कार्यशाला मंथन, प्राचीन भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सूत्र
डॉ दिलीप अग्निहोत्री

लखनऊ। वर्तमान समय में ए आई अर्थात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विश्व स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्ष पर विचार विमर्श चल रहा है। इसका सकारात्मक उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में लाभप्रद माना गया। जबकि नकारात्मक प्रयोग को लेकर चिंता भी जताई गई है। संतोष का विषय यह है कि इस पर निरंतर विचार विमर्श चल रहा है। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने इससे संबंधित मंथन कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लखनऊ में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय एवं छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के संयुक्त तत्वावधान इसका आयोजन किया गया। राज्यपाल ने एआई आधारित स्टार्टअप प्रदर्शनी के विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया। उनके प्रोडक्ट की जानकारी भी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों की समस्याओं को विश्वविद्यालयों में भेजकर उनके समाधान के लिए प्रयास करना चाहिए। नई नीतियों को तेजी से बनाने के साथ ही उसे लागू करना चाहिए।
कलाम सेंटर के संस्थापक सृजनपाल सिंह ने शोधपरक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जड़ें भारत से जुड़ी हुई है। आचार्य पाणिनी ने ग्रामर और गणित में जेनेरेटिव
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसका सिद्धांत दिया।आचार्य पिंगला ने बाइनरी को प्रतिपादित किया। आर्यभट्ट ने भी गणित के सिद्धांत प्रतिपादित किये। यही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का आधार बना। आचार्य ब्रह्मगुप्त ने शून्य बनाया। गणित की बहुत से सिद्धांत का प्रतिपादन किया गया। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि प्रदेश को स्किल्ड बनाने के लिए छह क्षेत्रों को लक्षित किया गया है। एआई प्रज्ञा,वेब पोर्टल के माध्यम से प्रदेश सरकार इसको पढ़ा रही है।
सरकार तकनीकी के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कार्य कर रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार एआई विश्वविद्यालय की स्थापना करने जा रही है। यह प्रदेश में एआई के शोध और नवाचारों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। एआई और मशीन लर्निंग के जरिये भारत के सांस्कृतिक विरासत को भी बचाने में भी बड़ी कामयाबी मिल सकती है।



