देश-दुनिया राजनीति

क्या होंगे लव जिहाद के फायदे

क्या होंगे लव जिहाद के फायदे
जैसे अवैध पशु कटान पर डंडा डला तो लाभ यह हुआ जो कसाई कल तक छुरा लेकर दौड़ता था वह दारोगा जी को राम राम करने लगा प्रति जानवर हिस्सा बन्ध गया। हा इसमे कोई दो राय नही कसाईयो में पुलिस का इकबाल बढ़ा। पश्चिम उत्तर प्रदेश जैसी जगह जहां मुस्लिम आबादी 60 फीसद है वहा योगी के आने से पुलिस का इकबाल बढ़ा , ऊपर तक आईएस और आईपीएस या पॉल्यूशन बोर्ड के अफसर तक आने वाला माल सिमटकर नीचे तक रह गया। पुरानी सरकारों में ऊपर तक आता था । लव जिहाद का लाभ सबसे ज्यादा दलित और अनुसूचित जाति की लड़कियों को मिलेगा। बहुत कम लोग जानते होंगे। यह कानून देखने मे बड़ा छोटा लगता है लेकिन कल्पना कीजिये मात्र एक मुजफ्फर नगर की घटना ने भाजपा को 73 दी इसलिए लव जिहाद को सियासी तौर पर हल्के में न लीजिये जनाब। अरब देशों में सबसे ज्यादा भारतीय पॉर्न की डिमांड है इसलिए इसके पीछे एक बड़ा माइंडसेट और उन्मुक्त कारोबार है और बाकायदा इसके लिए फंडिंग होती है। हाथो में कलावा बांधने का और चिकनी दाढ़ी के साथ मशल्स का जो ट्रेंड चला है वह इसी का प्रथम अध्याय है। कानून सतर्क है बहुत ज्यादा लेकिन देखना यह होगा कि इसमें खाकी का पेट नही फूलने लग जाये वजन बढ़ने लगे जाय । मुझे नही लगता कि इस कानून के प्रभाव में आने से 100 प्रतिशत केस बन्द हो जाएंगे लेकिन अंकुश जरूर लगेगा क्योंकि लड़की पटाने का जो हुनर टाइम और पैसा , डोले शोले , गुलामी, हजूरियत , कला व विरासत में मिली संस्कृति मुस्लिम के पास है, हमेशा से परिवार और कैरियर के अवसाद में चिंता से घिरे रहने वाले हिन्दू के पास नही है। यहां एक एक पल और कल का चिंतन है उधर चिंतन के नाम पर कुछ है ही नही। कुछ लोग तर्क देते है कि इधर से लव जिहाद क्यों नही होता। मेरा मानना है कि जब लव ही नही हो रहा तो जिहाद कैसे होगा। क्योंकि जिहाद तो लव के लिए ही होता है । इंटरकास्ट मैरिज का अनुपात आज भी कम क्यों है क्योंकि लड़के बाप पर निर्भर है आत्मनिर्भर नही है। इसमे जातिगत घृणा का पुट डालने वाला वास्तविकता को नज़र अंदाज़ करता है कि मजबूरियां व्यक्ति को कदम पीछे खींचने पर विवश करती है । लेकिन पूर्वाग्रह से ग्रसित निचला या पिछड़ा इसको साश्वत सत्य बताता है । खैर लव जिहाद की वहां अनुमति है यहां निषेध है। वहां जश्न का माहौल रहता है तो यहां करुण क्रंदन और भय का माहौल के साथ साथ परिवार और समाज से निकाले जाने का भय । वहां आसमानी किताब के पदचिन्ह है तो यहां पारिवारिक धर्म को बचाये जाने की चुनोती है । इसलिए काउंटर लव जिहाद की मजबूरी है इसमें दूसरे पक्ष को बीरता का अनुभव श्रृंगार अलंकार के साथ नही करना चाहिए।
आगे शेष पत्रकार गौरव अग्रवाल आगरा

Live TV

GMaxMart.com

Our Visitor

1209305
Hits Today : 348