
उद्योगीकरण से यूपी विकसित बनेगा। निवेश के अनुरूप माहौल बनाने के लिए बहुआयामी प्रयास करने होते है। अनेक मोर्चों पर बेहतर व्यवस्था करनी होती है। इसके बाद ही किसी राज्य के प्रति निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती है। उत्तर प्रदेश निवेश को इसी आधार पर प्रोत्साहन मिल रहा है। उत्तर प्रदेश निवेश के एक बेहतरीन गन्तव्य के रूप में स्थापित हुआ है। विगत आठ वर्षों के दौरान करीब पचास लाख करोड़ ररुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से बीस लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों की ग्राउण्ड ब्रेकिंग की गई है। इनमें अधिकांश में उत्पादन शुरू भी हो गया है। इस क्रम में ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैश्विक निवेशकों एवं उद्यमियों के महासंगम उत्तर प्रदेश फार्मा कॉन्क्लेव का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर औषधि चिकित्सा उपकरण एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में पांच हजार करोड़ रुपए से अधिक के ग्यारह समझौता ज्ञापन सम्पन्न किए गए। प्रदेश के पहले फार्मा पार्क के लिए ललितपुर में भूमि अधिग्रहीत की गई है। देश के सबसे बड़े जेवर इण्टरनेशनल एयरपोर्ट के निकट लगभग साढ़े तीन सौ एकड़ क्षेत्रफल में मेडिकल डिवाइस पार्क का निर्माण हो रहा है। प्रदेश में स्थापित मेडिकल डिवाइस पार्क में अब तक सौ से अधिक फार्मा कम्पनियां जुड़ चुकी हैं। सरकार लखनऊ में एक वर्ल्ड क्लास फार्मा इन्स्टीट्यूट के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है। गौतमबुद्धनगर, बरेली तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी फार्मा पार्क को विकसित करने का कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। राज्य सरकार के पास लैण्ड बैंक है। बेहतरीन सुरक्षा तथा इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुविधा है। इंदिरा प्रतिष्ठान में आयोजित रेशम एक्सपो में भी विकास का नया आयाम प्रदर्शित हुआ। करीब तीन दशक पूर्व तक यहां रेशम उत्पादन मात्र सत्ताइस मीट्रिक टन था। वह आज बढ़कर करीब पांच सौ मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। यह प्रगति आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की दिशा में एक मजबूत कदम है और गरीब व पिछड़े वर्ग के लोगों को आय व रोजगार के नए अवसर प्रदान कर रही है। रेशम उद्योग आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की दिशा में सशक्त आधार बनकर उभरा है।



