देश दुनियां

द्वारिका पीठ की सनातन महिमा

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

गुजरात में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग और द्वारिका पीठ सनातन आस्था के प्रमुख स्थल है। यहां पहुंच कर आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती है। इसके साथ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का गौरव भी होता है। द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती के प्रति भी सम्मान का भाव रहता है। क्योंकि उनका संदेश सनातन गरिमा के अनुरूप होता है। वह अपनी आध्यात्मिक मर्यादा के साथ ही समाज और राष्ट्र के हित के दायित्व का भी पालन करते है। प्रयागराज कुंभ में भी उन्होंने इसी के अनुरूप विचार व्यक्त किए थे।उन्होंने सनातन बोर्ड गठित करने का समर्थन किया था। इसके साथ ही
महाकुंभ की व्यवस्थाओं की प्रशंसा भी की थी। इसके साथ ही उन्होंने महाकुंभ के माध्यम से समरसता का संदेश भी दिया था। उन्होंने कहा था कि महाकुंभ में हमारे सनातन की एकता परिलक्षित है। हम सनातनी होने से सभी एक हैं। ज्ञात है कि आठवीं शताब्दी के अंत और नौवीं शताब्दी के प्रारंभ में आद्यशंकराचार्य ने चार मठों की स्थापना की थी। इनमें शारदा पीठ भी है। देवी सरस्वती ही शारदा हैं। शारदा पीठ पौराणिक द्वारकाधीश मंदिर के निकट है। आदि शंकराचार्य ने भारत की परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को संरक्षित करने के लिए 491 ईस्वी में इस पीठ की स्थापना की थी। यह पीठ कालिका मठ सामवेद का प्रभारी है। इसे पश्चिममान्य मठ और पश्चिमी मठ भी कहा जाता है।

Share this post to -

Related Articles

Back to top button