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जवां की फेवरेट गायनोकोलॉजिस्ट बनीं डॉ. सिदरा

अलीगढ़। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जवाँ जनपद की प्रमुख चिकित्सा इकाइयों में शुमार हो गया है, अब यह एक फर्स्ट रेफरल यूनिट के तौर पर जनपद में मरीजों को सेवाएं दे रहा है। सीएचसी जवां के इस सफर में गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. सिदरा अंसारी ने अहम भूमिका निभाई है। आज वह क्षेत्र की महिलाओं की फेवरेट स्त्री रोग विशेषज्ञ बन गई हैं।

डॉ. सिदरा बताती हैं कि 1 जुलाई 2022 में पहली तैनाती जनपद अलीगढ़ के एफआरयू गभाना में हुई इसके पश्चात वह जनपद की गभाना सीएचसी पर तैनात थीं। स्वयं की समस्याओं को लेकर कार्य में कुछ कठिनाइयां आ रही थी इसको देखते हुए मैंने निर्णय लिया कि मैं रिजाइन कर दूंगी इसी क्रम में नवंबर 2023 में मैंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय जाकर अपना रिजाइनिंग लेटर दे दिया लेकिन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीरज त्यागी ने मेरे अच्छे काम को देखते हुए, उन्होंने मुझे समझाया कोई भी समस्या इतनी बड़ी नहीं होती है जिसका समाधान ना हो। आप जो कार्य कर रहे हो उससे बहुत सारे लोगों को लाभ मिलेगा। हमारे आस–पास बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनको इन स्वास्थ्य सेवाओं की बहुत ही आवश्यकता है।

डॉ. सिदरा ने बताया कि जब सीएचसी जवां पर तैनात हुई तो मैंने वहां लोगों का अपने प्रति प्यार और सम्मान देखा, फिर उनकी समस्याओं को जाना और समझा। मुझे अपनी समस्याएं उनके सामने बहुत छोटी लगने लगीं। वहां से मैं दृढ़ संकल्प लेकर अपने काम को शुरू किया। मेरे इस सफर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जवां के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अंकित सिंह सहित पूरी टीम, आशा कार्यकर्ताओं और समुदाय के लोगों ने सहयोग किया, साथ ही मेरा उत्साह वर्धन भी किया।

डॉ. सिदरा ने बताया कि आज मैं 24/7 घंटे सेवा दे रही हूं, अगर रात में भी कोई प्रसव आता है तो मैं तत्काल प्रभाव से अपनी सेवाएं देती हूं। संस्थागत प्रसव और सी सेक्शन में उपयोग होने वाली समस्त सामग्री और दवाएं यहां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती हैं। यहां पर लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है, अन्य ब्लॉकों के लाभार्थी सहित अन्य जनपद के भी लाभार्थी प्रसव करने के लिए जवां आते हैं। जनवरी 2024 से अब तक 409 सुरक्षित प्रसव कराया जा चुके हैं ।

जवाँ सीएचसी को वर्ष 2022 में कायाकल्प अवार्ड मिला। इसके पश्चात वर्ष 2023 में एनक्वास (नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स) प्रमाणित हुआ और वर्ष 2024 में यह फर्स्ट रेफरल यूनिट बना। अब यह जनपद की प्रमुख चिकित्सा इकाई के रूप में कार्य कर रही है।

डॉ. सिदरा ने बताया कि शुरूआत में सीएमओ सर ने मुझे सप्ताह में तीन दिन के लिए सीएचसी जवां पर सेवाएं देने के लिए निर्देशित किया। सीएचसी जवां पर मुझे मरीजों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला, तो मुझे परमानेंट यहीं तैनात कर दिया गया। डॉ. बताती हैं कि सीएचसी जवां पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जवां के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अंकित सिंह के सहयोग से तकरीबन दो साल पहले से एलएससीएस (लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन) शुरू कर दिया था। इसके बाद से यहां पर लगातार मरीजों का भरोसा तेजी से बढ़ा। पहले जिला अस्पताल, दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय और मेडिकल कॉलेज में काफी मरीज सीएचसी जवां से रेफर होते थे, क्योंकि यहां पर एलएससीएस की सुविधा नहीं थी। लेकिन अब उनकी संख्या काफी कम हुई है। ओपीडी में भी मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। रोजाना 50-60 मरीजों की ओपीडी होती है, और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस को यह संख्या 150 से अधिक हो जाती है।

एफआरयू में सुरक्षित प्रसव से बढ़ रहा भरोसा
मंजूरगढ़ी निवासी 21 वर्षीय तस्लीम बताती हैं कि पाँच माह पूर्व वह अपना पहला प्रसव कराने के लिए आशा कार्यकर्ता राजकुमारी के साथ आयुष्मान आरोग्य मंदिर मंजूरगढ़ी पहुंची। वहां पर सीएचओ निदा रिजवी ने भर्ती कराकर प्रसव कराने का प्रयास किया, जब दर्द बढ़ नहीं रहा था तो सीएचओ ने एफआरयू सीएचसी जवाँ रेफर कर दिया। जवाँ पर पहुंचकर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सिदरा अंसारी ने उन्हें उपचार दिया और भर्ती करने के थोड़ी देर बाद एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। तस्लीम ने बताया कि अब उनकी बेटी पाँच माह की हो गई है और वह व उनकी बेटी पूरी तरह से स्वस्थ हैं। तस्लीम बताती हैं कि यदि सीएचसी जवाँ पर सुविधाएं नहीं होती तो हमें अलीगढ़ जाना पड़ता। इससे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती।

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