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एसएन मेडिकल कॉलेज ने पहली बार बीटिंग हार्ट बायपास सर्जरी कर रचा नया इतिहास, 66 वर्षीय गंभीर मरीज का सफल ऑपरेशन

आगरा। आगरा के प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) ने अपने 172 वर्षों के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। यहां पहली बार बीटिंग हार्ट (OPCABG) बायपास सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। इस जटिल सर्जरी को सीटीवीएस विभाग के विशेषज्ञ डॉ. सुशील सिंघल और उनकी टीम ने अंजाम दिया।

बोदला निवासी 66 वर्षीय रतन लाल शर्मा पिछले 6 महीनों से गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे थे। उनकी हालत बेहद नाजुक थी। उनके दिल की दो मुख्य धमनियां 100% ब्लॉक हो गईं थीं। हार्ट की कार्यक्षमता (EF) घटकर मात्र 35% रह गई थी। यह उच्च जोखिम वाला केस था। ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में भी डॉक्टरों की टीम ने हिम्मत दिखाते हुए सफल ऑपरेशन किया।

3 घंटे की सर्जरी, बिना रोके धड़कता रहा दिल

13 अप्रैल 2026 की रात करीब 3 घंटे चली इस सर्जरी में बीटिंग हार्ट तकनीक अपनाई गई।
इस तकनीक में दिल को रोके बिना ही बायपास सर्जरी की जाती है, जो अत्यंत जटिल और विशेषज्ञता वाली प्रक्रिया मानी जाती है। यह एसएनएमसी के इतिहास में इस प्रकार की पहली सफल सर्जरी है।

रिकॉर्ड रिकवरी, 72 घंटे में डिस्चार्ज

इस केस की सबसे बड़ी सफलता रही मरीज की तेज़ रिकवरी। मरीज को ऑपरेशन के दूसरे दिन ही डिस्चार्ज (POD-2)कर दिया गया। सामान्यतः ऐसी सर्जरी में 5–7 दिन लगते हैं। जबकि रतनलाल की मात्र 72 घंटे में स्वस्थ होकर घर वापसी हो गई। डॉ. सुशील सिंघल के अनुसार, यह देश के स्तर पर भी एक दुर्लभ और संभवतः पहला मामला है।

गरीब मरीज को मिला मुफ्त इलाज

रतन लाल के पास न तो आयुष्मान कार्ड था और न ही आर्थिक संसाधन। फिर भी “असाध्य रोग योजना” के तहत ₹3–4 लाख की सर्जरी पूरी तरह मुफ्त में की गई। यह सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता का उदाहरण है।

प्राचार्य बोले-अब आगरा बनेगा मेडिकल हब

प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि यह उपलब्धि मेडिकल उत्कृष्टता और टीम वर्क का परिणाम है। हमारा लक्ष्य है कि अब आगरा के मरीजों को बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े।

सफलता के पीछे पूरी टीम का योगदान

सीटीवीएस सर्जन टीम में डॉ. सुशील सिंघल, डॉ. शिव, डॉ. सुलभ गर्ग, डॉ. आरती, एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर टीम में डॉ. अपूर्वा मित्तल, डॉ. योगिता, डॉ. अतिहर्ष मोहन अग्रवाल, डॉ. अमिता, डॉ. रोहन, डॉ. अखिल, डॉ. विकास यादव शामिल थे। सहयोगी स्टाफ में सिस्टर प्रमिला, श्वेता, सुमन, प्रिया, सहायक सचिन, मोनू रहे।

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