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स्वास्थ्य केंद्रों पर मनाया गया एकीकृत निक्षय दिवस

6843 लोगों की स्क्रीनिंग करने पर 387 संदिग्ध मिले, 379 के बलगम का सैम्पल लिया गया

आगरा। जनपद में सोमवार को सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एकीकृत निक्षय दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए जागरूक किया गया। कार्यक्रम में टीबी के संभावित लक्षण वाले 6843 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें से 387 व्यक्ति संदिग्ध पाए गए। जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए 379 संदिग्धों के बलगम के सैंपल लिए गए। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत सभी संदिग्ध व्यक्तियों का डिजिटल एक्स-रे भी कराया गया। यह जानकारी जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने दी।

जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि 215 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 53 डेजिग्नेटेड माइक्रोस्कोपी सेंटर ( डीएमसी) 26 टीबी यूनिट, 44 प्राइमरी हेल्थ इंस्टीट्यूट (पीएचआई) और 30 अर्बन पीएचसी पर निक्षय दिवस मनाया गया। इसमें ओपीडी में आने वाले मरीजों को टीबी के प्रति जागरुक किया गया। उन्हें बताया गया कि दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी आने, दो सप्ताह से लगातार बुखार आने, वजन घटने से जैसे लक्षण होने पर टीबी की जांच अवश्य करानी चाहिए। टीबी का उपचार संभव है, सरकार द्वारा इसकी जांच व उपचार मुफ्त होता है। इसके साथ ही टीबी मरीजों को स्वस्थ होने तक उनके बैंक खाते में निक्षय पोषण योजना के तहत 1000 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं।

केंद्र पर जांच कराने आई 25 वर्षीय संभावित टीबी मरीज मुस्कान (बदला हुआ नाम) ने बताया, “मेरी बहन को पेट की टीबी है, इसलिए परिवार के सभी सदस्यों की भी टीबी जांच कराना जरूरी है। इसी वजह से हमें बुलाया गया था। आज मैंने भी अपनी टीबी की जांच के लिए सैंपल दिया है।”
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सभी जनपदवासियों से अपील है कि टीबी के लक्षण जैसे दो हफ्ते से ज्यादा खांसी, बुखार, सीने में दर्द, मुंह से खून आना, थकान, सांस लेने में तकलीफ, रात में पसीना आना, भूख न लगना, वजन कम होना, गर्दन में गिल्टी, गांठ, बांझपन या एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के कोई लक्षण दिखें तो तुरंत सरकारी अस्पताल में निःशुल्क जांच, उपचार और छाती का एक्स-रे कराएं। सभी सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है, बस समय पर जांच और नियमित दवा लेना जरूरी है। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा का पूरा कोर्स करें, बीच में दवा बंद न करें। याद रखें, आपकी जागरूकता ही टीबी को हरा सकती है। लक्षण छुपाएं नहीं, जांच कराएं और भारत को टीबी मुक्त बनाने में सहयोग करें।
डॉ. अरुण श्रीवास्तव,
मुख्य चिकित्सा अधिकारी आगरा

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