उत्तर प्रदेशहाथरस

रजिस्टर में दर्ज… लेकिन दफ्तरों में गुम! शिक्षा विभाग से गायब हो गए सरकारी दस्तावेज़?”

कागज़ तो भेजे गए, पर अब नहीं किसी के पास... क्या ये लापरवाही है या सुनियोजित गायबगी?

हाथरस। शिक्षा विभाग की फाइलों में एक रहस्यमयी गुमशुदगी ने न सिर्फ पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि जिम्मेदारी के नाम पर चुप्पी ओढ़े बैठे अफसरों की संवेदनहीनता भी उजागर कर दी है। मामला तब सामने आया जब शिक्षा विभाग का डिस्पैच रजिस्टर खंगाला गया। तारीख थी 16 अगस्त 2021 — दर्जनों सरकारी पत्र खंड शिक्षा अधिकारी (मुरसान) से लेकर बेसिक शिक्षा अधिकारी (हाथरस) कार्यालय तक भेजे गए। रजिस्टर में क्रमांक 302 से 317 तक इन पत्रों की एंट्री भी स्पष्ट रूप से दर्ज है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज उन पत्रों की ना कहीं कोई प्रति है, ना ही कोई सरकारी पुष्टि। दोनों ही कार्यालय इन कागजों के अस्तित्व से इनकार कर रहे हैं।तो क्या विभागीय दस्तावेज़ गायब कर दिए गए? जब पहले मामलों में भी मौजूदा बेसिक शिक्षा अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने दो टूक कहा —ये पुराने मामले हैं, मेरे कार्यभार के दौरान के नहीं हैं।

क्या यह जवाब पर्याप्त है?

क्या कोई अधिकारी सिर्फ नए मामलों तक ही सीमित होता है? क्या पूर्व के लंबित मामलों की जांच करवाना भी अब ‘सीमा से बाहर’ है?
कागज़ों की गुमशुदगी या जवाबदेही की हत्या? यह सिर्फ कागज़ों का मामला नहीं, एक निजाम की गवाही है जिसमें फाइलें ‘गुम’ हो जाती हैं, अधिकारी ‘बेखबर’ होते हैं, और जवाबदेही ‘पुराने मामले’ कहकर दबा दी जाती है। जो दस्तावेज़ रजिस्टर में स्पष्ट रूप से मौजूद हैं, उनका रिकॉर्ड अब सरकारी दफ्तरों में क्यों नहीं है?
कहीं ऐसा तो नहीं कि यह जानबूझ कर किया गया मामला है? या फिर विभागीय लापरवाही की चरम मिसाल?

पुराना मामला है” — यही नया बहाना बन गया है?

क्या हर गड़बड़ी को पुराना बताकर भुला दिया जाएगा? क्या जिम्मेदारी की मियाद भी तारीख देखकर तय होती है? अगर वर्तमान अधिकारी के कार्यकाल में भी जांच नहीं हो सकती, तो फिर कब होगी?

अब उठ रहे ये ज़रूरी सवाल:

जिन पत्रों की डिस्पैच एंट्री मौजूद है, वे गायब कैसे हो सकते हैं? क्या इसकी कोई विभागीय जांच करवाई गई?
क्या यह लापरवाही भर है, या किसी फाइल को जानबूझकर दफन करने की कोशिश?
और अगर यह “पुराना मामला” है — तो फिर इससे निपटने की कोई पुरानी या नई जिम्मेदारी क्यों नहीं तय की गई?

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