आगराउत्तर प्रदेशशिक्षा

दयालबाग शिक्षण संस्थान में 79वाँ स्वतंत्रता दिवस बड़े ही हर्ष, गौरव और अनुशासन के साथ मनाया

डीके श्रीवास्तव

आगरा। दयालबाग शिक्षण संस्थान (DEI) में 79वाँ स्वतंत्रता दिवस बड़े ही हर्ष, गौरव और अनुशासन के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज फहराने से हुई, जिसके पश्चात् विद्यार्थियों ने संस्थान की विभिन्न संकायों का प्रतिनिधित्व करते हुए एक अत्यंत अनुशासित और आकर्षक मार्च पास्ट प्रस्तुत किया। उनकी गूंजती हुई पदचाप ने वातावरण को राष्ट्रप्रेम और गर्व से भर दिया। इसके उपरांत विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी के हृदयों में देशप्रेम और मातृभूमि के प्रति आदर की गहन भावनाएँ जागृत की। इसके साथ ही ताइक्वांडो दल की ऊर्जावान प्रस्तुति ने युवाओं के भीतर निहित शक्ति, अनुशासन और समर्पण की झलक प्रस्तुत की।

माननीय मुख्य अतिथि श्री गुरु स्वरूप सूद जी, अध्यक्ष, राधास्वामी सत्संग सभा एवं दयालबाग शिक्षण संस्थान, ने अपने प्रेरक उ‌द्बोधन में सभी को 79वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई दी। उन्होंने महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरु, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, नेताजी सुभाषचंद्र बोस तथा अन्य अनेक महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने अपने सर्वोच्च बलिदान देकर हमें 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता का अमूल्य उपहार दिया। उन्होंने इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी के समीप आगमन के महत्व को रेखांकित किया तथा श्रीकृष्ण द्वारा गीता में दिए गए शाश्वत उपदेशों को स्वतंत्रता के अमर संदेश के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि 1947 में प्राप्त राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ-साथ परम पुरुष पूर्ण धनी हुजूर स्वामी जी महाराज, संस्थापक, राधास्वामी सत्संग दयालबाग, के उपदेश हमें एक उच्चतर ‘पूर्ण स्वतंत्रता’ अर्थात आत्मिक मुक्ति की ओर इंगित करते हैं। मुख्य अतिथि ने सभी से आग्रह किया कि इस कठिन परिश्रम से अर्जित स्वतंत्रता को सहेजें और भाईचारे, स‌द्भावना तथा नैतिक बल के साथ जीवन जीते हुए DEI की समग्र शिक्षा प्रणाली के आदर्शों को अपनाएँ।

संस्थान के माननीय निदेशक प्रो. सी. पटवर्धन ने अपने उ‌द्बोधन में सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह पर्व केवल उत्सव का ही नहीं बल्कि आत्ममंथन का भी अवसर है। उन्होंने स्मरण कराया कि स्वतंत्रता सेनानियों ने हमें राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्रदान की, परंतु आज की पीढ़ी का कर्तव्य है कि वह मन की स्वतंत्रता और आत्मा की उन्नति प्राप्त करे। प्रो. पाटवर्धन ने उपभोक्तावाद, भौतिकतावादी मोह और डिजिटल दुनिया के प्रभाव जैसे समकालीन चुनौतियों का उल्लेख किया, जो युवाओं को अनजाने में बाँध लेती हैं। उन्होंने कहा कि सच्ची स्वतंत्रता का अर्थ है विवेक, समालोचनात्मक चिंतन, आत्म-जागरुकता और मूल्यों का पोषण करना, न कि सफलता को केवल भौतिक वस्तुओं से मापना। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सचेत विकल्प चुनें, रचनात्मकता को अपनाएँ और उच्चतर उ‌द्देश्यों के साथ अपने जीवन को जोड़ें। उन्होंने दोहराया कि DEI की विशिष्ट मूल्य-आधारित तथा कौशल-आधारित शिक्षा प्रणाली विद्यार्थियों को भविष्य के लिए उपयुक्त और समग्र विकास की दिशा प्रदान करती है।

गर्व और एकता भर अवसर पर कार्यक्रम का समापन गगनभेदी नारों ‘जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद’ के साथ हुआ, जिसने प्रत्येक हृदय को से दिया। इस वृक्षारोपण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और कविताओं ने भी वातावरण को देशभक्ति से ओतप्रोत कर दिया। इस समारोह में दयालबाग शिक्षण संस्थान की प्रबंधन समिति के सदस्य, आमंत्रित अतिथि, रजिस्ट्रार, कोषाध्यक्ष, शिक्षकगण, विद्यार्थी, मीडिया प्रतिनिधि एवं बालक-बालिकाएँ उपस्थित रहे। दयालबाग शिक्षण संस्थान में हुआ यह स्वतंत्रता दिवस समारोह न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को श्र‌द्धांजलि अर्पित करता है, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को राष्ट्रीय विकास और आध्यात्मिक उन्नति दोनों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करता है।

Share this post to -

Related Articles

Back to top button