
सरकार के दावे ज़मीन पर आते ही खोखले साबित हो जाते हैं। योजना का लाभ जिन ग़रीबों को मिलना चाहिए, वे आज भी दर-दर भटक रहे हैं। जबकि सम्पन्न और रसूखदार लोग इसका फ़ायदा उठाकर गरीबों का हक़ मार रहे हैं।
अब यह सवाल उठना लाज़मी है कि आखिर कब तक भ्रष्टाचार का यह खेल चलता रहेगा? कब तक गरीब और मजलूम अपने हक़ से वंचित रहेंगे? और कब तक “जिसकी लाठी, उसकी भैंस” की कहावत देश की योजनाओं पर लागू होती रहेगी?
अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच हो जाए तो एक बड़ा घोटाला उजागर होगा। लेकिन जब तक अफ़सर और दबंगों की सांठगांठ बनी रहेगी, तब तक प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों की छत बनने के बजाय अमीरों की जेब भरती रहेगी।
मूल उद्देश्य गरीब, मजदूर और बेघर लोगों को छत मुहैया कराना था। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। हालिया मामला राजस्थान के चुरू जिले की तारानगर तहसील की ग्राम पंचायत बनियाला का है, और बिहार के रिस्थान जिले का है जहाँ इस योजना में भ्रष्टाचार चरम पर है। जो लोग दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और जिनके सिर पर पक्की छत नहीं है, वे आज भी लाभ से वंचित हैं।
इसके उलट, करोड़ों की संपत्ति और भारी-भरकम जायदाद के मालिक लोग इस योजना के नाम पर सरकारी पैसे पर हाथ साफ कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पार्टी ‘खुला खेल फरुखाबादी चल रहा है। शिकायतें बार-बार प्रशासन तक पहुंची, लेकिन अफ़सर कान में तेल
बालकर बैठे हैं। दबंगों की दबंगई खुलकर सामने है। आरटीआई कार्यकर्ता रणजीत डूडी ने कई बार इस घोटाले को उजागर करने की कोशिश की, मगर नतीजा सिफर गहा।
दरअसल, भ्रष्टाचार और लूट के तमाम मामले सामने आ रहे हैं जिसका नीचे साफ उदाहरण दिया गया है कि पीएम आवास योजना आईडी नंबर आर जे 46873566 पर मकान विमला और आईडी नंबर आरजे 147074289 पर मकान विमला और जेसाराम को मिला, जबकि परिवार सक्षम और संपन्न है। आईडी नंबर आरजे 1 14887176 पर मकान राजबाला के नाम आवंटित हुआ, पर यहाँ मकान बना ही नहीं, फिर भी भुगतान हो गया। यह महज कुछ मिस्वले हैं। असलियत इससे कहीं ज्यादा भयावह है। कई जगहों पर बिना मकान बने ही पेमेंट उठाकर गायब कर दिया गया। और यह सब प्रशासनिक मिलीभगत के बिना
मुमकिन ही नाहीं। एक अन्य मामला बिहार के जिले सीवान की महाराजगंज नगर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और अवैध वसूली के मामले सामने आए हैं। ताजा मामला अधिवक्ता प्रफुल्ल रंजन व
रामापाली निवासी धुरंदर यादव ने मुख्यमंत्री व डीएम को पत्र लिखकर नगर पंचायत में पदस्थापित सिविल इंजीनियर प्रभात तिवारी और कुछ निर्वाचित प्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि प्रभात तिवारी ने पीएमएवाई को अपनी निजी कमाई का जरिया बना लिया है।
अपात्र लोगों का चयन कर उनको लाभ पहुंचाया जा रहा है और लाभुकों से संगठित रूप से अवैध वसूली की जा रही है। धुरंदर यादव ने बताया कि
ग्राम पंचायत भवन बनियाला पारानगर (रु)
आधार देने के लिए अस्से पांच हजार रिश्वत ले लिए गए लेकिन आज तक भी मकान नहीं दिया जा रहा है। पहले से बने एक ही मकान को दिखाकर चार अलग-अलग व्यक्तियों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभदिलाने का भी आरोप है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि 1 अप्रैल 2021 से 21 अगस्त 2025 तक जिन-जिन लोगों को इस योजना का लाभ दिया गया है। उनकी पात्रता की जांच सरकारी गाइड लाइन के अनुररार कराई जाए तो पूरे
फर्जीवाड़े का सच सामने आ जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री व डीएम से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही प्रभात तिवारी की संपत्ति की जांच निगरानी विभाग अधया आर्थिक अपराध इकाई से कराने का भी अनुरोध किया गया है।
बहरहाल, सरकार के दावे जमीन पर आते ही खोखले साबित हो जाते हैं। योजना का लाभ जिन गरीबों को मिलना चाहिए, वे आज भी दर-दर भटक रहे हैं। जबकि सम्पन्न और रसूखदार लोग इसका फायदा उठाका गरीबों का हाक मार रहे हैं। अब यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर कब तक भ्रष्टाचार का यह खेल चलता रहेगा? कब तक गरीब और मजलूम अपने हाक से वंचित राहेंगे? और कब तक ‘जिसकी लाठी, उसकी जैस’ की कहावत देश की योजन्रुओं पर लागू होती योगी? अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच हो जाए तो एक बड़ा घोटाला उजागर होगा। लेकिन जब तक अफसर और दबंगों की सांठगांठ बनी रहेगी, तब तक प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों की छत बनने के बजाय अमीरों की जेब भरती
होगी।