उत्तर प्रदेशलखनऊ

डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती पर व्याख्यान का आयोजन

लखनऊ। विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर “सामाजिक न्याय का संघर्ष एवं बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर” विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी के संरक्षण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. प्रमोद कुमार गुप्ता (निदेशक, राम मनोहर लोहिया पीठ) के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम की संयोजक प्रो. प्रतिभा रावत एवं सह-संयोजक डॉ. आदित्य मोहंती रहे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. रीता चौधरी (हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) उपस्थित रहीं, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. अमिता कनौजिया (अधिष्ठाता, छात्र कल्याण, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने सहभागिता की। मुख्य वक्ता प्रो. रीता चौधरी ने अपने व्याख्यान में बाबा साहेब के विचारों, उनके संघर्षों तथा सामाजिक न्याय की स्थापना में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार अंबेडकर ने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त कर समाज में समानता, स्वतंत्रता एवं न्याय के लिए संघर्ष किया। महाड आंदोलन (पानी के अधिकार) एवं मंदिर प्रवेश आंदोलन का उल्लेख करते हुए सामाजिक समानता के महत्व को रेखांकित किया गया। उन्होंने गांधी एवं अंबेडकर के विचारों की तुलना करते हुए तार्किक चेतना, प्रगतिशील लेखन तथा अधिकारों के लिए संघर्ष की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही पंडिता रमाबाई के कार्यों का उल्लेख करते हुए महिला सशक्तिकरण के महत्व को भी रेखांकित किया गया। हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को अधिकार दिलाने में अंबेडकर के योगदान को विशेष रूप से उल्लेखित किया गया। विशिष्ट अतिथि डॉ. अमिता कनौजिया ने अपने व्याख्यान में कहा कि बाबा साहेब ने शिक्षा, महिलाओं के अधिकार तथा सामाजिक समानता को स्थापित करने में अंबेडकर की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समकालीन समाज में महिलाओं को प्राप्त अधिकारों में बाबा साहेब का महत्वपूर्ण योगदान है। अंततः यह निष्कर्ष निकाला गया कि अंबेडकर का संघर्ष केवल दलितों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने संपूर्ण भारतीय समाज के लिए समानता, स्वतंत्रता और न्याय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर विभाग के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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