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संक्रामक बीमारियों से बचने के लिए हाथों की स्वच्छता जरूरी : डॉ. उपेन्द्र

विश्व हाथ स्वच्छता दिवस पर प्रा. विद्यालय सिकंदरा में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

आगरा। विश्व हाथ स्वच्छता दिवस पर मंगलवार को प्राथमिक विद्यालय सिकंदरा में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर छात्र-छात्राओं को हाथों की स्वच्छता के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया। स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया व केनव्यू के सहयोग से ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम के तहत आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में 66 स्कूली बच्चों और शिक्षकों ने भाग लिया। इस मौके पर आयोजित क्विज प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चों को पुरस्कृत भी किया गया।

इस मौके पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. उपेंद्र यादव ने कहा कि डायरिया समेत कई संक्रामक बीमारियों से बचाव का सबसे सरल और कारगर तरीका हाथों को साबुन-पानी से कम से कम 20 सेकंड तक सही तरीके से धोना है। दिनभर में हम हाथों से कई तरह के जरूरी काम करते हैं और उस दौरान कई लोगों, सतहों और वस्तुओं के सीधे संपर्क में आते हैं। इससे गंदगी, रोगाणु, कीटाणु और बैक्टीरिया की गिरफ्त में आने की पूरी सम्भावना रहती है। इसलिए साबुन-पानी से हाथों को सही तरीके से धोना बहुत जरूरी होता है। बच्चों की देखभाल से पहले, मरीजों की सेवा से पहले और बाद में, खाना बनाने या खाने से पहले, शौचालय का उपयोग करने के बाद, खांसने, छींकने या नाक साफ़ करने के बाद, कचरा उठाने या किसी गन्दी सतह को छूने के बाद, जानवरों या पालतू जानवरों को छूने के बाद हाथों को साबुन-पानी से कम से कम 20 सेकंड तक सही तरीके से अवश्य धोएं।

इस मौके पर डॉ. अंकुर और डॉ. जया वर्मा ने हाथों को सही तरीके से धोने के लिए अपनाये जाने वाले छह चरणों को आसान तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि हाथों को धोना ही पर्याप्त नहीं होता बल्कि सही तरीके से हाथों को धोना जरूरी होता है। इसके लिए सामुदायिक स्तर पर आज S U M A N K (सुमन-के) के बारे में लोगों खासकर बच्चों को सरल तरीके से समझाने की जरूरत है ताकि वह इन छह चरणों को अपनाकर हाथों की सही स्वच्छता के लिए सक्षम बन सकें। यह छह चरण हैं – S (एस) -साबुन-पानी से झाग बनाने के बाद पहले सीधी हथेलियों को बारी-बारी से घिसें, U(यू) – उल्टी तरफ हाथों को बारी-बारी से घिसें, M (एम)- मुट्ठी बंदकर हाथों को अच्छी तरह घिसें, A (ए)- अंगूठों को अच्छी तरह से रगड़ें, N (एन) – नाखूनों को अच्छी तरह से साफ़ करें, K (के)- कलाइयों को भी ठीक से रगड़ें। इस तरह इन छह चरणों को अपनाकर डायरिया समेत कई संक्रामक बीमारियों को मात दिया जा सकता है। इसकी आदत बचपन से ही विकसित की जाए तो आगे चलकर भी यह सदा के लिए बनी रहती है।

इस मौके पर प्रधानाचार्य प्रतिभा पाल व अन्य शिक्षकों के साथ स्टाफ नर्स रेनू गोयल, शिक्षा विभाग से राकेश चौधरी, आशा कार्यकर्ता अनीता, पीएसआई इंडिया से पंकज कुमार, आरती और सोनल आदि उपस्थित रहे।

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