
विकसित यूपी 2047 की यात्रा प्रगति पर है। यूपी सर्वाधिक एक्सप्रेस वाला प्रदेश पहले ही बन चुका था। गंगा एक्सप्रेस वे के लोकार्पण से इसमें एक नया अध्याय कायम हुआ। राष्ट्रीय पटल पर एक नया सक्षम और समर्थ उत्तर प्रदेश उभर कर आया है। इसके साथ ही सड़कों के निर्माण और इनके किनारे पर औद्योगिक गलियारा बनाने का भी अभूतपूर्व कार्य निरंतर जारी रहे। आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प को पूरा किया जा रहा है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से औद्योगिक विकास को नया आयाम मिला है। औद्योगिक विकास के लिए सभी जरूरी संसाधन प्रदेश में उपलब्ध हैं। विगत कुछ वर्षों में यहां तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक की सड़कें बनी है। अगले कुछ साल में पांच लाख करोड़ रुपये का काम उत्तर प्रदेश में करेगी। कुल मिलाकर जब आठ लाख करोड़ का काम होगा तब उत्तर प्रदेश के सड़कों का इंफ्रास्ट्रक्चर अमेरिका के बराबर होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया। सात वर्ष पूर्व प्रयागराज कुंभ में योगी कैबिनेट की बैठक हुई थी। इसमें
गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके करीब दो वर्ष बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया था। योगी आदित्यनाथ ने इसको निर्धारित अवधि में पूर्ण करने का संकल्प लिया था। यह संकल्प साकार हुआ। करीब छ सौ किमी लंबा यह एक्सप्रेस वे मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जूड़ापुर दांदू गांव में समाप्त होगा। गंगा एक्सप्रेसवे यूपी के बारह जिलों और पांच सौ से अधिक गांवों से होकर निकलेगा। यह मेरठ, हापुड़,बुलंदशहर, अमरोहा,संभल, बदायूं,शाहजहांपुर, हरदोई,उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़,और प्रयागराज को जोड़ेगा। इससे व्यापारिक व औद्योगिक विकास के साथ ही पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। गंगा एक्सप्रेसवे से कानपुर और वाराणसी की यात्रा भी सुगम होगी। इतना ही नहीं गंगा एक्सप्रेसवे से कनेक्ट एन-एच 330 से वाराणसी होते हुए कोलकाता तक की यात्रा भी पूरी हो सकेगी। इससे आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे और मेरठ से हरिद्वार तक प्रस्तावित विस्तार सहित कई लिंक कॉरिडोर भी जुड़ेंगे। पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक उच्च गति वाली सड़क कनेक्टिविटी का विस्तार होगा। यह देश का सबसे लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बन गया है। यह एक्सप्रेसवे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। डिजाइन,निर्माण, वित्त,संचालन और हस्तांतरण मॉडल पर आधारित यह परियोजना भारत की सबसे लंबी एक्सप्रेसवे परियोजना है। सरकार ने लोक कल्याण की सर्वाधिक योजनाए बनाने के साथ उनका शतप्रतिशत क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया। विकसित भारत संकल्प यात्रा का यही उद्देश्य है। गंगा एक्सप्रेसवे को एक प्रमुख आर्थिक गलियारे के रूप में परिकल्पित किया गया है। जिसके मार्ग में पड़ने वाले सभी जिलों में लगभग एकीकृत विनिर्माण और लॉजिस्टिक गलियारे विकसित किए जाएंगे।



