लेख
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“स्त्री पैदा नहीं होती, बनायी जाती है” – सिमोन द बोउवार के कथन की वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिकता और महत्व
“स्त्री पैदा नहीं होती, बनायी जाती है” — यह कथन बीसवीं सदी की प्रसिद्ध फ्रांसीसी दार्शनिक, लेखिका और स्त्रीवादी विचारक…
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“सनातन (हिन्दू) धर्म में जाति की सत्ता: धार्मिक एकता बनाम सामाजिक विभाजन”
सनातन धर्म, जिसे ‘शाश्वत सत्य’ का वाहक माना जाता है, मूलतः आत्मा की एकता, करुणा, सहिष्णुता और वैश्विक बंधुत्व की…
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“गुण बनाम जाति: गोस्वामी तुलसीदास और संत रैदास के विचारों में सामाजिक न्याय का द्वंद्व”
भारतीय समाज में जाति व्यवस्था ने सदियों से सामाजिक संरचना को दिशा दी है। यह व्यवस्था जन्म पर आधारित है,…
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“स्वच्छ व स्वस्थ मनयोग और सामाजिक समरसता: विकसित भारत की असली बुनियाद” (नशा, दहेज, छुआछूत, धर्मान्धता, लिंगभेद व वर्गभेद जैसी सामाजिक कुप्रथाओं के विनाश का महायोग)
1. प्रस्तावना: विकसित भारत की अवधारणा और उसकी जमीनी नींव भारत, विविधताओं से भरा एक समृद्ध सांस्कृतिक राष्ट्र है, जो…
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“आधुनिकता की आड़ में अनैतिकता: सिनेपलेस (कैबिन सिनेमा), कैबिन रेस्टोरेंट, हुक्काबार और गली-मोहल्लों में पनपते जिस्मफरोशी के अड्डे समाज व संस्कृति के विनाशक”
आज का भारतीय समाज तीव्रता से आधुनिकता की ओर अग्रसर हो रहा है, लेकिन इस प्रगति की आड़ में एक…
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“परंपरा बनाम परिवर्तन: भारतीय विवाह संस्था और सामाजिक न्याय का द्वंद्व”
भारतीय समाज में विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों, संस्कृतियों और सामाजिक इकाइयों का समागम माना…
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जतीपुरा हरजी कुंड गुंजन शर्मा के जन्मोत्सव पर पौधारोपण किया
गोवर्धन। जतीपुरा हरजी कुंड पर गुंजन शर्मा के जन्मोत्सव के अवसर पर छाया दार वृक्ष लगाया गया। शुक्रवार को पर्यावरण…
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“विकसित भारत की दिशा में वैवाहिक जीवन: दिलों का मिलन, न कि सामाजिक बाध्यता” (प्रेम, समर्पण और समझ पर केंद्रित)
भारतवर्ष में वैवाहिक संस्था सदियों से समाज की मूल आधारशिला रही है। विवाह न केवल दो व्यक्तियों का मेल है,…
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“वैवाहिक संस्था पर संकट: युवाओं में विवाहोत्तर अनैतिक संबंधों की बढ़ती प्रवृत्ति और दांपत्य जीवन का विघटन”
मानव सभ्यता के इतिहास में विवाह एक ऐसी संस्था रही है जो सामाजिक संरचना, नैतिकता और उत्तरदायित्व की धुरी पर…
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“संत कबीर: सीख, काम और भक्ति के अनूठे संगम का संतुलन व वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कबीर के दोहों की प्रासंगिकता”
भारतीय संत परंपरा में संत कबीर का स्थान अत्यंत विशिष्ट और अद्वितीय है। उन्होंने एक ऐसे युग में जन्म लिया…
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बिरसा मुंडा: भारत के महान आदिवासी लोकनायक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
बिरसा मुंडा भारत के उन महान स्वतंत्रता सेनानियों और जननायकों में से एक थे, जिन्होंने मात्र 25 वर्ष की आयु…
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