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“कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रयोगों के संयोजन से देश की समस्याओं का समाधान होगा”

आगरा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रयोगों के संयोजन से देश के सामने आने वाली कई समस्याओं का हल निकलेगा। यह बात डॉ. भीम राव अंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी ने 10 जनवरी, 2026 को दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में आयोजित “रसायन विज्ञान अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उभरती भूमिका” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही। उन्होंने जटिल अनुसंधान चुनौतियों का समाधान करने और शिक्षा जगत और उद्योग में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता को पारंपरिक रासायनिक विज्ञान के साथ एकीकृत करने के महत्व पर बल दिया। संस्थान के रसायन विज्ञान विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी में आई.आई.एस.ई.आर. भोपाल के रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग के डॉ. साई फणी कुमार वंगाला और आई.आई.टी. इंदौर के रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग की डॉ. रूपांजली प्रसाद ने तकनीकी व्याख्यान दिए। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर सी. पटवर्धन ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को रासायनिक विज्ञान के साथ एकीकृत करने पर बल दिया, जो नवोन्मेषी, मूल्य-आधारित और अनुप्रयोग-उन्मुख अनुसंधान को बढ़ावा देने के संस्थान के दृष्टिकोण के अनुरूप भी है। उन्होंने छात्रों को मूलभूत रासायनिक ज्ञान के साथ-साथ गणनात्मक और विश्लेषणात्मक कौशल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के आरंभ में, रसायन विभाग के प्रोफेसर रोहित श्रीवास्तव ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया और आधुनिक रसायन विज्ञान अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते महत्व पर एक परिचयात्मक प्रस्तुति दी। इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में रजिस्ट्रार प्रोफेसर संजीव स्वामी, कोषाध्यक्ष सुश्री स्नेह बिजलानी, प्रोफेसर विभा आर. सत्संगी, प्रोफेसर साहब दास, प्रोफेसर के. महाराज कुमारी, डॉ पुष्पा साहनी, डॉ सुधीर वर्मा, डॉ रंजीत कुमार, डॉ अपर्णा सत्संगी, डॉ मंजू श्रीवास्तव, डॉ सचिन सक्सेना, डॉ योगिता जैन और डॉ गुंजन गोस्वामी शामिल थे। संगोष्ठी का समन्वय प्रोफेसर अनीता लखानी ने किया। डॉ नाज़िया सिद्दीकी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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