भरतपुर राज्य को मराठाओं के अधीन दिखाने पर अखिल भारतीय जाट महासभा ने कलेक्ट्रेट में किया जोरदार प्रदर्शन, दिया ज्ञापन

आगरा। एन सी ई आर टी की कक्षा- 8 की पुस्तक Our Pasts – ।।।, वर्ष 2025 के सिलेबस में 1759 में अजेय रियायत भरतपुर को मराठाओं के अधीन दिखाया गया है। जबकि सच्चाई यह है कि भरतपुर राज्य कभी भी किसी के अधीन नहीं रहा। भरतपुर अजेय रियायत रही है।
सच्चाई से इतर मराठाओं के अधीन दिखाये जाने के खिलाफ अखिल भारतीय जाट महासभा ने आज कलेक्ट्रेट में जोरदार प्रदर्शन कर नारे बाजी करते हुए एन सी ई आर टी की कक्षा 8-की पुस्तक अवर पास्ट वॉल्यूम- ।।। में अविलम्ब गलती सुधारने की माँग की और ज्ञापन देकर छात्रों को इतिहास की सच्चाई पढाने का अनुरोध किया है।
यह जानकारी देते हुए अखिल भारतीय जाट महासभा के जिला महामन्त्री वीरेन्द्र सिंह छौंकर ने बताया है कि पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार आज अखिल भारतीय जाट महासभा के सैकङों पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता प्रातः 11-बजे जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर के नेतृत्व में एकत्रित हुए और झण्डे बैनर के साथ महाराजा सूरजमल अमर रहे, महाराजा जवाहर सिंह अमर रहे, वीर गोकुला, रामकी चाहर, राजाराम, राञा महेन्द्र प्रताप, चौ चरण सिंह अमर रहे आदि महा पुरूषों के नाम की जोरदार नारेबाजी करते हुए जलूस के रूप में जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुँचे। और सिलेबस में संसोधन की माँग की।
ज्ञापन में अखिल भारतीय जाट महासभा ने इतिहास कार यदुनाथ सरकार की
पुस्तक( फाॅल औफ द मुगल एम्पायर
वाल्यूम -।।)।(P-219),
2- हरीराम गुप्ता की पुस्तक( द मराठाज एण्ड द पानीपत वार, पेज 153-154, 3- रघुवीर सिंह की पुस्तक (द बैट्टल आफ पानीपत पेज 212-213), 4-ऐलेग्जैण्डर कलिंघम की पुस्तक (आर्कलौजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया रिपोर्ट्स, वाल्यूम।।,पेज 185-186), 5- यूरोपीय विवरण-फ्रांसीसी यात्री जीन लाॅ और ब्रिटिश अधिकारी ज्यौर्ज थाॅमस ने 1810 में और विलियम फ्रैंकलिन ने 1805 में भरतपुर को “इंडिपेंडेंट जाट किंगडम कहा है के उदाहरण भी प्रस्तुत किए हैं
जाट महासभा ने माँग की है कि
1- एन सी ई आर टी पाठ्यपुस्तक के 1759 के मानचित्र से भरतपुर को मराठा अधीन दर्शाने वाली सीमा रेखा तत्काल हटायी जाय।
2-भरतपुर को स्वतंत्र जाट राज्य के रूप में सही ऐतिहासिक संदर्भ के साथ प्रस्तुत किया जाय।
3- एक ऐतिहासिक शिक्षा समिति गठित की जाय, जो भविष्य में इस प्रकार की त्रुटियों की जांच और सुधार करे।
सम्बोधित करते हुए जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर व महानगर अध्यक्ष गजेंद्र सिंह नरवार ने कहा कि इतिहास केवल शैक्षणिक विषय नहीं बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और स्वाभिमान का आधार है ।
वरिष्ठ नेता चौ रामेश्वर सिंह और मोहन सिंह चाहर ने कहा कि भरतपुर की स्वतन्त्रता और महाराजा सूरजमल के योगदान को गलत तरीके से प्रस्तुत करना न केवल छात्रों को भ्रमित करता है बल्कि एक गौरव शाली इतिहास को मिटाने का प्रयास है।
युवा जाट महासभा के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी व महानगर अध्यक्ष लखन चौधरी ने कहा कि यदि पाठ्यपुस्तक से गलती नहीं सुधारी गई तो युवा जाट महासभा उग्र आन्दोलन करेगी।
महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष श्रीमती निर्मल चाहर, महानगर अध्यक्ष श्रीमती वंदना सिंह व प्रदेश मन्त्री निशा चौधरी ने निदेशक एन सी ई आर टी के कृत्य पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जाटों के अपमान को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
कार्यक्रम का संचालन महामन्त्री वीरेन्द्र सिंह छोंकर ने किया।
कार्यक्रम में भाग लेने वालों में प्रमुख रूप से प्रदेश उपाध्यक्ष राधेश्याम मुखिया, जिला उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह राणा,चौ नवल सिंह, नेपाल सिंह राणा व चौ गुलवीर सिंह, किसान मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह ,अजीत चाहर प्रधान, चौधरी बाबूलाल प्रधान, सुनील चौधरी, लोकेंद्र सिंह चौधरी, कैप्टन सत्यवीर सिंह, कैप्टन तेजवीर सिंह ठाकुरेला, सूबेदार महावीर सिंह सोलंकी, जगदीप चाहर, बलबीर सिंह मुखिया डॉक्टर जगपाल सिंह, रजत चाहर ,श्रीमती अनुपमा सिंह, भारत सिंह कुंतल, अचल सिंह, रामेश्वर नौहवार, वतेजेंद्र नौहवार, समर सिंह मलिक, श्याम फौजदार, वरुण कुमार, अमन नौहवार, राम लखन सिंह, आदि थे ।