आगराउत्तर प्रदेश

पुलिस अब नहीं फेंकती अज्ञात मृतक की लाश, श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी आगरा करवाती है अज्ञात मृतकों का दाह संस्कार,

आगरा। औषधालय प्रबंधक का दायित्व सफलतापूर्वक निभाने के बाद मुझे श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी में उपमंत्री का उत्तरदायित्व संभालने का अवसर मिला। इस नयी भूमिका में रहते हुए एक दिन संस्था के कार्य से मुझे श्मशान घाट, ताजगंज जाने का अवसर मिला।
वहाँ जो दृश्य देखा, उसने मन को गहरे तक झकझोर दिया। पुलिस के कुछ कांस्टेबल एक अज्ञात मृतक की लाश को श्मशान के एक कोने में स्थित नाले में फेंक रहे थे। मैं कुछ देर रुका और उनसे इस अमानवीय कृत्य का कारण पूछा।
पुलिस कर्मियों ने जो उत्तर दिया, वह पीड़ा से भरा था। उन्होंने बताया कि जब भी कोई अज्ञात मृतक की लाश मिलती है, तो उस दिन कांस्टेबल अपने भाग्य को कोसता है। शासन या प्रशासन से उन्हें कोई सहायता नहीं मिलती; दाह संस्कार की लकड़ी की व्यवस्था करना, लाश को उचित रीति से अग्नि देना, सब कुछ उनके लिए एक भारी जिम्मेदारी और कठिन कार्य बन जाता है।
मन की व्यथा से समाधान तक
यह सुनकर मन बेचैन हुआ। लौटकर मैंने अपनी यह व्यथा तत्कालीन बजाजा कमेटी के कोषाध्यक्ष श्री शंकर लाल महेश्वरी जी के समक्ष रखी। उन्होंने भी इस समस्या की गंभीरता को समझा, पर संस्था के सीमित संसाधनों की ओर संकेत करते हुए असमर्थता व्यक्त की।
तब मैंने सुझाव दिया – क्यों न हम ₹200 के कूपन छपवाएँ? समाज से यह धन एकत्र कर, अज्ञात मृतकों के दाह संस्कार के लिए लकड़ी उपलब्ध कराएँ। एक कूपन की राशि से एक मृतक के लिए पर्याप्त लकड़ी की व्यवस्था संभव थी। हमने सोचा, यदि बजाजा कमेटी अधिकारपूर्वक पुलिस को यह लकड़ी उपलब्ध कराए, तो पुलिस भी हर बार इस कठिनाई से न जूझे, और अज्ञात मृतकों को भी सम्मानपूर्वक अग्नि दी जा सके।
सेवा की शुरुआत
हमारे इस विचार को मान्यता मिली और कूपन छपवाए गए। परंतु संस्था के पदाधिकारियों ने यह निर्णय लिया कि पहले हम कूपन से धन एकत्रित न करें। बजाजा कमेटी अपने ही संसाधनों से लकड़ी प्रदत्त करे, और यदि कभी कमी महसूस हो, तभी समाज से सहयोग लिया जाए।
प्रभु कृपा से यहीं से इस सेवा का सिलसिला प्रारंभ हुआ। फिर आगरा नगर के सभी पुलिस थानों को यह जानकारी दी गई कि अज्ञात मृतकों के दाह संस्कार के लिए लकड़ी बजाजा कमेटी नि:शुल्क उपलब्ध कराएगी।
आज भी जल रहा है वह दीपक
वर्षों पहले जो प्रयास छोटे से बीज के रूप में आरंभ हुआ, वह आज भी जीवित है। आज भी जब किसी अज्ञात मृतक की लाश मिलती है, तो पुलिस उसे यूँ ही नाले में नहीं फेंकती; बजाजा कमेटी की ओर से उसके अंतिम संस्कार की पूर्ण व्यवस्था होती है।

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