उत्तराखंड

गायत्री मंत्र जन-जन की चेतना है, यही राष्ट्र परिवर्तन की शक्ति है: अमित शाह

हरिद्वार। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि पूज्य आचार्यश्री पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने सम्पूर्ण मानवता को व्यक्ति निर्माण का मार्ग दिखाया, जो सर्वजन कल्याण के लिए है। उन्होंने कहा कि आज राष्ट्र के जागरण का समय आ गया है।
केन्द्रीय गृहमंत्री श्री शाह अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज, हरिद्वार द्वारा आयोजित शताब्दी समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पावन भूमि पर विशेषकर सप्तर्षि भूमि शांतिकुंज में आकर हजारों वर्षों की तपस्या की ऊर्जा का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि भारतवर्ष पूज्य पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के उपकारों से कभी ऋणमुक्त नहीं हो सकता। आचार्यश्री ने गायत्री महामंत्र को जन-जन तक सर्वसुलभ बनाया, वैश्विक मानवतावाद की अवधारणा को सुदृढ़ किया और वैज्ञानिक अध्यात्मवाद को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। श्री शाह ने कहा कि “हम बदलेंगे, युग बदलेगा” का सूत्र ही राष्ट्र परिवर्तन की कुंजी है। गायत्री महामंत्र केवल संस्कृत का मंत्र नहीं, बल्कि जप करने वाले साधक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला जीवन मंत्र है। उन्होंने कहा कि जो भारत और उसकी संस्कृति को समझता है, वह जानता है कि विश्व की समस्त समस्याओं का समाधान भारतीय संस्कृति में निहित है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पूज्य गुरुदेव पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा रोपित अखिल विश्व गायत्री परिवार रूपी बीज आज एक विशाल वटवृक्ष का स्वरूप धारण कर चुका है, जो विश्वभर के असंख्य लोगों को ज्ञान, संस्कार और सद्भाव की छाया प्रदान कर रहा है।शताब्दी समारोह के दलनायक डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यह आयोजन सभी के लिए हम सभी के सौभाग्य का दिन है, जो पूज्य माताजी के अवतरण के शताब्दी वर्ष से जुड़ा हुआ एक ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक अवसर है। डॉ. पण्ड्या जी ने कहा कि यह भूमि योगियों और साधकों की रही है, जहाँ से स्वाभिमान, साधना और तप की परंपरा ने राष्ट्र को दिशा दी है। उन्होंने पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के संदेशों का स्मरण करते हुए कहा कि जीवन में आने वाली बाधाओं से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें परिवर्तन और प्रगति का माध्यम बनाना ही साधक का कर्तव्य है। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत करुणा, दया और ज्ञान की भूमि है तथा भारत के जागरण में ही सम्पूर्ण विश्व का जागरण निहित है।

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