कारोबार देश-दुनिया

प्रधानमंत्री भारतीय सरकार नई दिल्ली को भेजा पत्र

माननीय प्रधानमंत्री जी
भारतीय सरकार
नई दिल्ली
को भेजा पत्र

विषय: जीएसटी पंजीकृत सेमी माईक्रो जीएसटी पंजीकृत डीलर को प्रोत्साहन पैकेज हेतु सुझाव
परम आदरणीय

विश्व महामारी कोरोना के प्रभाव को देखते हुए आप द्वारा पूरे भारत को सुरक्षित करने के लिए आप द्वारा लिए गये ‘लाॅक डाउन’ के निर्णय का हम स्वागत करते हैं और बधाई देते हैं कि आप जनता की भलाई के लिए कड़े निर्णय लेने में संकोच नहीं करते, जैसी कि आपकी अभी तक की छवि है। इसके साथ ही लाॅक डाउन के दौरान देश के संगठित एवं गैर- संगठित क्षेत्र के मजदूर एवं गरीब जनता को भलाई के लिए आपकी सरकार द्वारा दिये गये 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज देने के लिए हम वास्तव मंे सराहना और प्रशंसा करते हैं, क्योंकि आपने इस प्रकार के राहत पैकेज से अपना ‘राजधर्म’ निभाया है।
लेकिन हम आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं ऐसे ‘छोटे करदाताओं’ को जो छोटे व्यापारी की श्रेणी में आते हैं और जीवन-यापन कर रहे हैं परन्तु सरकार को नियमित टैक्स देकर सरकार की नीतिओं में अपना नियमित योगदान देते आ रहे हैं।
हमारा ‘छोटे करदाता’ से अभिप्रायः ऐसे करदाताओं से हैं जो कि बहुत छोटे स्तर के व्यापारी हैं,जिनको सरकार ने जी.एस.टी. के पंजीयन जी.एस.टी. में पंजीयन की थ्रसहोल्ड लिमिट 20/40 लाख रुपये से छूट दे रखी है फिर भी वह जी.एस.टी. के अन्तर्गत पंजीयन लेकर और आयकर रिटर्न दाखिल कर देश के विकास हेतु ‘कर’ का भुगतान अपना योगदान दे रहे हैं। इस वर्ग की भी स्थिति गरीब श्रेणी में ही आती है, चूंकि यह व्यापारीवर्ग है अतः कोई राहत पैकेज अथवा अन्य सरकारी सहायता प्राप्त करने के लिए कभी उत्साहित नहीं रहता।
लेकिन यह भी सत्य है कि 22 मार्च के ‘जनता कफ्यू’ के बाद 25 मार्च से 3 मई या आगे तक लागू देश में लाॅक डाउन में इस वर्ग पूरा सहयोग देकर अपना राष्ट्रधर्म निभा रहा है लेकिन यह भी कटु सत्य है कि लाॅक डाउन के दौरान इस वर्ग का व्यापार-धन्धा पूरी तरह से ठप्प हो जाना है। या फिर उम्मीद बनती जा रही है।
व्यापारी के सामने एक चिंता यह भी खड़ी हो गयी कि तीन माह में अपने कर्मचारियों को वेतन, उत्पाद के कच्चे माल के लिए नगदी, बैंक की किस्तों का भुगतान कैसे करेगा? यहां तक देश के निर्यातकों के सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है कि विदेशों से आने वाले आर्डर कैंसिल हो गये हैं, वहां से भुगतान प्राप्त नहीं हो रहे हैं क्योंकि बहुत से देशों में महामारी के चलते भारी तबाही का मंजर सामने है। कैसे संवरेगा यह संकट? कैसे निबटेगा हमारे देश का व्यापारी इस सब संकट से?
सरकार बधाई की पात्र है कि अभी सरकार ने ऐसे पंजीकृत व्यापारियों के लिए CECL योजना लागू कर अधिकतम 10 प्रतिशत की टर्म लोन स्वीकृत करने की योजना लागू की है परन्तु यह योजना उन उद्योगों पर प्रभावी होगी जिनके पास बैंक से पूर्व में टर्मलोन उपलब्ध है।
वैसे तो आप द्वारा जी.एस.टी. के अन्तर्गत ‘एसएमई वर्ग’ के व्यापारियों को रिटर्न आदि में राहत प्रदान किया है, साथ ही लेट रिटर्न में लगने वाले लेटफीस में भी राहत प्रदान की है।
फिर भी मैं आपके समक्ष सुझाव प्रस्तुत कर रहा हूं कि सरकार को जी.एस.टी. के पंजीयन को आधार मानते हुए इस वर्ग के व्यापारी के लिए राहत पैकेज के रुप में आर्थिक सहयोग प्रदान करना चाहिए।
राहत पैकेज का आधार हेतु मैं सुझाव प्रस्तुत कर रहा हंू-
1. ऐसे जी.एस.टी. पंजीकृत व्यापारी, जो सेमी अथवा मिनी माइक्रो श्रेणी के हों और जी.एस.टी. में में पंजीकृत हो और उनक पिछले 3 वर्ष का (वर्ष 2017-18, 2018-19 एवं 2019-20) के टर्नओवर को आधार बनाते हुए अधिकतम 25 प्रतिशत तक का लोन पंजीकृत डीलर्स के जीएसटी के अन्तर्गत अंकित बैंक खाते में जमा करवा दिया जाना चाहिए। क्योंकि बैंक खाता व अन्य सूचनाएं जी.एस.टी. के अन्तर्गत उपलब्ध है।
2. ऐसे जी.एस.टी. पंजीकृत व्यापारियों को सरकार को बिना ब्याज का लोन प्रदान किया जाए, जिसका वसूली का समय 36 / 60 माह, उनकी सहमति के आधार पर हो।
3. ऐसे लोन की गांरटी के प्रश्न है तो यह लोन पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा क्योंकि ऐसे व्यापारी जी.एस. टी. के अन्तर्गत पंजीकृत हैं और जिनका आधार नंबर के साथ पैन नंबर व बैंक खाता संख्या जी. एस.टी. में उपलब्ध होते हुए पंजीकृत है।
4. ऐसे वर्ग को छूट दी जाए कि वह मासिक जी.एस.टी. रिटर्न एवं टैक्स के साथ लोन की किस्त का भी भुगतान करें, यह लोनआई.टी.सी. में समायोजित नहीं किये जाने की व्यवस्था दी जाए।
5. यदि किसी व्यापारी की आई.टी.सी. लम्बित चल रहा तो उनसे लोन मासिक किस्त के रुप में समायोजित कर लिया जाए।
6. इस बिन्दु का भी ध्यान रखना होगा कि जिस पंजीकृत डीलर्स के सिबिल किसी भी परिस्थिति में प्रभावित हो चुकी है, उनको भी लाभ का पात्र बनाना चाहिए। इसके लिए एक सीमा बना दी जाए कि जिसकी सिबिल स्कोर 5 प्रतिशत या उससे अधिक हो, उसको पात्रता की श्रेणी में शामिल कर लिया जाना चाहिए।
7. इस प्रकार की व्यवस्था और राहत दिये जाने से छोटे व्यापारीवर्ग में सरकार के लिए प्रति विश्वास जागेगा,
क्योंकि –
अ-ऐसे व्यापारी सामने आंएगे जो कि अभी तक जी.एस.टी. की थ्रेस होल्ड लिमिट 20/40 लाख मानकर स्वयं को जी.एस.टी. में पंजीयन लेने के छूट के अधिकारी मानते आ रहे हैं।
ब-ऐसे राहत सुविधा से छोटे व्यापारियों को जी.एस.टी. में पंजीयन कराने के लिए प्रोत्साहन भी मिलेगा।
स-अतः ऐसे व्यापारी भविष्य में स्वयं के भविष्य को सुरक्षित मानकर जी.एस.टी. में पंजीयन लेने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

विश्वास है आप हमारे प्रस्ताव पर अवश्य ही विचार करेंगे।
साभार !

(पराग सिंहल)
राष्ट्रीय महासचिव
(एडवोकेट दिनेश शर्मा)
सचिव जनसंपर्क)
एसोसिएशन आफ टैक्स पेयर्स एंड प्रोफेशनल्स (नेशनल लेवल संगठन)
सचिवालय – आगरा

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