
लखनऊ। श्रीकृष्ण भक्ति ने अमेरिका और यूरोप असंख्य लोगों के जीवन को बदल दिया है। नृत्य को प्रसन्नता की श्रेष्ठतम अभिव्यक्ति माना जाता है। विकसित देशों में लोग श्रीकृष्ण भक्ति रस में नृत्य करते है। इसका सकारात्मक प्रभाव भी परिलक्षित है। इसे सभी भक्तों ने मास मदिरा का सेवन त्याग दिया है। ये लोग भारत भ्रमण के लिए भी आते है। इनके आचरण और व्यवहार से कृष्ण भक्ति झलकती है। इस्कॉन लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी अपरिमेय उपाध्यक्ष स्वामी दीनदयाल और राज्य सूचना आयुक्त ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। स्वामी अपरिमेय और स्वामी दीनदयाल ने उनको
श्रीमद्भागवतम् का अंग्रेजी संस्करण भेंट किया। अंग्रेजी का यह अनुवाद भक्तिवेदांत स्वामी श्री प्रभुपाद के किया था। उन्होंने इसका मूल रूप में अनुवाद किया। भाष्य लिखे। उनको प्रकाशित करके विशेष रूप से अमेरिका और यूरोप के लोगों को उपलब्ध कराए गए। चैतन्य चरितामृत का भी अनुवाद और भाष्य लिखा। श्रीकृष्ण भक्ति से संबंधित उन्होंने अस्सी से अधिक पुस्तकें लिखीं। उनके लेखन का विशेष उद्देश्य था। वह मानते थे कि
गीता कृष्ण भक्ति पर बुनियादी शिक्षा प्रदान करती है। इस प्रकार श्रीमद्भागवतम् स्नातक अध्ययन की तरह है। जबकि चैतन्य चरितामृत सबसे उन्नत भक्तों के लिए स्नातकोत्तर शिक्षा की भांति है।
श्रील प्रभुपाद 1965 में अमेरिका गए और उनहत्तर वर्ष की आयु में अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ की स्थापना की। उन्होंने चौदह बार विश्व भ्रमण किया। सैकड़ों कृष्ण मंदिरों की स्थापना की। हजारों शिष्यों को कृष्णभावनामृत में दीक्षित किया। उनकी पुस्तकें वैदिक शास्त्रों के शाश्वत ज्ञान को सर्वसुलभ बनाने वाली है। इनके अध्ययन से आत्म साक्षात्कार की प्रेरणा मिलती है।