
बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले या सिर मुंडाते ही ओले पड़े। ये कहावतें इस समय राहुल गांधी के चुनाव आयोग के खिलाफ चलाए जा रहे घृणित, कुत्सित एवं संवैधानिक मर्यादाओं को तार तार करने वाले अभियान पर सटीक बैठती हैं। यह अलग बात है कि राहुल गांधी आज भी अपनी बेशर्मी एवं झूठे दोषारोपण के द्वारा अपने पक्ष में माहौल बनाने के अराजक अभियान पर कायम हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपनी प्रेस वार्ता के दौरान ही यह कहा था कि आरोप लगाने वालों के पास हस्ताक्षरित शपथपत्र देने या देश से माफी मांगने के अलावा कोई विकल्प नहीं है और चुनाव आयोग मतदाताओं के सम्मान को चोट पहुंचाने वाले ऐसे गलत आक्षेपों के बाद भी चुप नहीं बैठ सकता। उस समय विपक्ष के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर धमकी की भाषा बोलने एवं बीजेपी की ही पटकथा पढ़ने का आरोप लगाया था। हद है कि विपक्षी नेताओं विशेषकर राहुल गांधी एवं तेजस्वी यादव को तो मुख्य चुनाव आयोग एवं देश के प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को भी बिना किसी पुख्ता प्रमाण के रोज चोर कहने एवं गाली देने में भी कोई दोष नजर नहीं आता।यदि इसके जवाब में मुख्य चुनाव आयुक्त ने कानूनी प्रकिया का पालन करने या देश से माफी मांगने की बात की तो यह धमकी कहां से हो गई। चुनाव आयोग की प्रेस वार्ता के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला है। पहले उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र चुनाव में धाँधली को लेकर दाखिल याचिका खारिज कर दी और याचिका दाखिल करने वाले को आड़े हाथों लिया। उच्चतम न्यायालय ने याचिका दाखिल करने वाले से सख्त लहजे में पूछा कि आपके पास इस बात के क्या सबूत हैं कि सायं पांच बजे के बाद पड़े 76 लाख वोट धाँधली करके एक पार्टी के पक्ष में डलवाए गए। आज चुनाव नतीजे आए आठ माह हो गए, अब तक आप कहां थे? झातव्य है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय भी पहले ऐसी ही याचिका खारिज कर चुका है। इसके अतिरिक्त सी एस डी एस के सह निदेशक संजय कुमार ने भी अभी तीन दिन पहले यह कहते हुए माफी मांगी कि उनके द्वारा महाराष्ट्र के विधान सभा चुनाव में विभिन्न सीटों पर लोकसभा चुनाव की तुलना में मतदाताओं की संख्या में बढ़ोत्तरी के आंकड़े गलत थे और गलत तुलनात्मक अध्ययन का नतीजा थे। यही नहीं उन्होंने उन आंकड़ों को डिलीट भी कर दिया। चूंकि यही आंकड़े राहुल गांधी एवं कांग्रेस की महाराष्ट्र में धाँधली की मुहिम का आधार थे, अतः कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा ने भी इन आंकड़ों को हटाने में ही भलाई समझी। अनेक मीडिया में प्रभावी तत्वों ने भी महाराष्ट्र चुनाव में धाँधली से सम्बन्धित अपने वीडियो घटनाक्रम देखते हुए और चुनाव आयोग के सख्त रुख के चलते हटा दिए। बंगलौर सेन्ट्रल सीट पर मुख्य चुनाव आयुक्त अपना नजरिया प्रेस वार्ता में ही स्पष्ट कर चुके हैं। इस सबके बावजूद अभी दो दिन पहले राहुल गांधी ने बिहार में वोट अधिकार यात्रा के दौरान सत्ता बदलने पर तीनों चुनाव आयुक्तों को देख लेने की धमकी दी। यह सोच किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए बहुत घातक है। मेरा मानना है कि आज चुनाव आयोग ने यह घोषणा करके सही ही किया कि झूठे नेरेटिव फैलाने वालों पर एफ आई आर होगी और उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। देश भी यह चाहता है कि देश में अराजकता फैलाने का प्रयास करने वालों एवं संवैधानिक संस्थानों को गाली देने वालों के साथ कड़ाई से निपटा जाए।