463वाँ युगऋषि वाङ्मय की स्थापना, “सद्ज्ञान सन्मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करता है: उमानन्द शर्मा

लखनऊ। गायत्री ज्ञान मंदिर इंदिरा नगर, लखनऊ के विचार क्रान्ति ज्ञान यज्ञ अभियान के अन्तर्गत “उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, 1 विपिन खण्ड, गोमती नगर, लखनऊ, उ०प्र०” के पुस्तकालय में गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं० श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित सम्पूर्ण 79 खण्डों का 463वाँ ऋषि वाङ्मय की स्थापना का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। यह सम्पूर्ण साहित्य श्रीमती अर्चना गुप्ता ने अपने प्रिय पुत्री सुश्री प्रेक्षा गुप्ता के उज्ज्वल भविष्य हेतु उपरोक्त संस्थान के केन्द्रीय पुस्तकालय में युगऋषि वाङ्मय साहित्य भेंट किया तथा संकाय सदस्यों एवं छात्र-छात्राओं को अखण्ड ज्योति (हिन्दी) पत्रिका भी भेंट किया।
इस अवसर पर वाङ्मय स्थापना अभियान के मुख्य संयोजक उमानंद शर्मा ने कहा कि “सद्ज्ञान सन्मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करता है।” संस्थान की उपाध्यक्ष श्रीमती विभा सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किये। संस्थान के निदेशक डॉ० शोभित कुमार नाहर ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया।
वाङ्मय साहित्य स्थापना के इस अवसर पर गायत्री ज्ञान मंदिर के प्रतिनिधि श्री उमानंद शर्मा, श्री वी०के० श्रीवास्तव, श्री देवेन्द्र सिंह, श्रीमती उषा सिंह, डॉ० नीलम गुप्ता, श्रीमती अर्चना गुप्ता, श्रीमती निर्मला गुप्ता, श्रीमती पद्मा गुप्ता, श्रीमती सुनीता श्रीवास्तव एवं सुश्री प्रेक्षा गुप्ता और संस्थान की उपाध्यक्ष श्रीमती विभा सिंह, निदेशक डॉ० शोभित कुमार नाहर, श्री प्रकाश श्रीवास्तव, श्रीमती ममता सिंह, इंदिरा देवी एवं पंचमी सिंह यादव सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।



