
आज विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस है। आज 14 अगस्त का दिन यह याद करने का है कि किस प्रकार आज के दिन ही 1947 में देश का विभाजन स्वीकार कर पाकिस्तान जैसे शत्रु देश को स्थायी रूप से अपने पड़ोसी देश के रूप में स्वीकार किया गया। आज के दिन ही देश के लाखों लोगों ने अपनी जान गवाई और भारत राष्ट्र के पंजाब, जम्मू -कश्मीर,पं बंगाल एवं पूर्वोत्तर राज्यों में आतंकवाद एवं अलगाववाद की समस्या की नींव रखी गई जिसका दंश देश आज भी झेल रहा है। प्रस्तुत हैं इस विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर चन्द पंक्तियां।
ऐसा है यह 14 अगस्त, कैसा है यह 14 अगस्त?
था यही दिवस जब भारत मां रोई थी और चिल्लाई थी।
कुछ क्रूर कुकर्मी लोगों ने मां पर आरी चलवाई थी।
मां का तन लहूलुहान हुआ, टुकड़े टुकड़े कर अंग बंटा।
मस्तक ( कश्मीर) पर अब भी प्रहार जारी, एक हाथ कटा एक पैर कटा।
था यही दिवस जब प्रभावान पंजाब अंधेरे में आया।
शतखंडा वासी धनी व्यक्ति नंगा भिखमंगा दिखलाया।
बर्बरता का लख अट्टहास, नर हुआ पिशाचिकता परस्त।
ऐसा ही है 14 अगस्त, मत भूलो।