
लखनऊ। भारतीय चिंतन में शिक्षा को जीवकोपार्जन का माध्यम मात्र नहीं माना गया। यह साधन हो सकता है। लेकिन आदर्श जीवन मूल्यों का जागरण करने वाली शिक्षा ही सार्थक होती है। यही विद्यार्थियों को श्रेष्ठ नागरिक बनाती है। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल विद्यार्थियों के साथ ही शिक्षकों और अभिभावकों को इसके प्रति प्रेरित करती हैं। बरेली में शिक्षण संस्थानों के कार्यक्रम में उन्होंने इसी प्रकार के विचार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि
राष्ट्र को नई दिशा देने की शुरुआत शिक्षा से होती शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें संस्कार युक्त शिक्षा का समावेश भी आवश्यक है। वर्तमान समय में भौतिक समृद्धि के बावजूद पारिवारिक मूल्यों में गिरावट देखने को मिल रही है। जिसे शिक्षा के माध्यम से ही सुधारा जा सकता है। आज समावेशी शिक्षा आवश्यक है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचनी चाहिए। तभी वास्तविक परिवर्तन होंगे। भारत का निर्माण होगा।विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं है, बल्कि समाज में जाकर महिलाओं एवं किसानों की समस्याओं के समाधान में सक्रिय भागीदारी निभाना भी है। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को कम से कम पाँच गाँव गोद लेकर वहाँ की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य करना चाहिए।
शिक्षा के माध्यम से बच्चों को सही दिशा देना, उनमें कौशल विकसित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का कार्य करना चाहिए। राज्यपाल ने अपने गुजरात के कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहाँ उन्होंने ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्क्रीनिंग अभियान चलाया, जिसके अंतर्गत लगभग डेढ़ करोड़ महिलाओं की जांच कराई गई। उनका उपचार कर उन्हें स्वस्थ किया गया। राज्यपाल ने शिक्षा के माध्यम से भारत पुनःविश्वगुरु बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।



