कारोबार देश-दुनिया संपादकीय

घोषित आर्थिक पैकेज: व्यापार सेक्टर की परिभाषा तो बदली

लेकिन क्या प्रभावित जीएसटी पंजीकृत सेमी माईक्रो डीलर को प्रोत्साहन पैकेज का लाभ मिलेगा?
प्रधानमंत्री को एसोसिएशन द्वारा भेजा पत्र

12 मई की रात्रि 8 बजे आप द्वारा राष्ट्र के नाम संबोधित करते हुए जब एमएसएमई क्षेत्र व अन्य क्षेत्रों में 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की तो देश के सूक्ष्म, मध्यम एवं लघु क्षेत्र के साथ छोटा व्यापारीवर्ग, जिसका देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है, के चेहरे पर उभरी चमक को महसूस किया जा सकता था, जब प्रातः सूचना आयी कि केन्द्रीय वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण सांय 4 बजे आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करेंगी तो लगभग सभी व्यापारीवर्ग टीवी के सामने आकर बैठ पैकेज की घोषणाओं को सुनने के आतुर हो उठे। लेकिन दुःखद ही रहा कि हर बार की तरह सूक्ष्म, मध्यम एवं लघु क्षेत्र के कुछ व्यापारियों वर्ग के झोले में कुछ गिरा लेकिन यह अवश्य कह सकते हैं कि संकटकाल से झूझ रहे जरुरतमंद व्यापारी का झोला हर बार की तरह खाली ही रह गया।
पैकेज का लाभ किसके लिए !!
सरकार द्वारा घोषित यह विशेष आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज का उद्देश्य यही था कि लाॅकडाउन के समय बाजार में पैदा हुई आर्थिक तरलता की कमी को पूरा करना और इस दौरान सरकार को होने वाले राजस्व घाटा को पूरा करना, परन्तु प्रश्न यह पैदा हो गया कि आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज से किसको कितना लाभ होगा, वास्तव में कौन से व्यापारी लाभार्थी हो पाएंगे? सबसे महत्वपूर्ण विचारणीय प्रश्न कि आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज से सरकार को कितना राजस्व बढे़गा अथवा घटेगा?
व्यापार में इन्वेस्टमेंट को आधार बनाकर पैकेज का कितना सार्थक होगा लाभ?
नये पैकेज में क्राइटेरिया को इन्वेस्टमेंट का आधार बनाया गया है, जो कि पूरी तरह से अव्यावहारिक दिखायी पड़ रही है। भारत में व्यापार करने की तरीका और व्यवस्था विश्व से अलग है, अतः देश के व्यापार की सफलता का आधार वार्षिक टर्नओवर का बनाना राजस्व की दृष्टि से अधिक लाभप्रद होगा।
राजस्व हित में कितना लाभप्रद?
देश के कैसा ही संकट हो, सरकार उस संकट को प्राप्त राजस्व से उबारने का प्रयास करती है, अतः सरकार ऐसे संकटकाल में देश के व्यापारीवर्ग, जो सरकार को राजस्व उपलब्ध कराते हैं, को प्रोत्साहित करती है उसके मुख्य रुप से तीन उद्देश्य होता है कि देश में आर्थिक मंदी प्रभाव न हो, बेरोजगारी न बढ़े और सरकार को सभी प्रकार के योजनाओं और राहत कार्य पूरा करने के लिए नियमित रुप से अधिक से अधिक राजस्व प्राप्त हो।
यह सत्य है कि सरकार को मार्च से जून तक अपेक्षित ही नहीं बल्कि न्यूनतम राजस्व सरकारी खजाने में जमा होगा, अतः इस राजस्व की भरपायी के लिए पैकेज उपलब्ध कराया गया, परन्तु पैकेज में किये गये प्रावधान से वास्तव में कितना प्राप्त हो सकेगा, अध्ययन करना ही होगा।
देश की समृ(ि के लिए टैक्स बेस मजबूत होना चाहिए, कोरोना संकट को अवसर के रुप में ले सकते हैं!!
इस तथ्य का भी अध्ययन करना होगा कि आजादी के 70 सालों के बाद भी हमारे देश में राजस्व प्राप्ति के स्रोत मजबूत नहीं हो पाया हैं, क्योंकि वर्तमान में हमारे देश में प्रत्यक्ष करदाता की लगभग 8 करोड़ और अप्रत्यक्ष कर में लगभग 1.30 करोड़ पंजीकृत जीएसटी डीलर्स ;130 करोड़ की जनसंख्या परद्ध अनुमानित हैं, कोरोना के संकट से निपटने के लिए यह आवश्यक है कि देश में दोनांे करदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृ(ि की जानी चाहिए। सरकार को कोरोना का संकट को अवसर के रुप में लिया जा सकता है, जिसके लिए स्वदेशीकरण का प्रयास किया गया परन्तु पैकेज का लाभ से आधार पर जनसाधारण को अधिकतम संख्या में करदाता बनने को प्रोत्साहित होना चाहिए जिससे अपेक्षित राजस्व प्राप्त होने का लाभ मिल सके, अतः हमने सुझाव दिया था कि ऐसे में समय में जीएसटी ;अप्रत्यक्ष कर प्रणालीद्ध के माध्यम से बिना ब्याज और बिना गारंटी )ण उपलब्ध करवा दिया जाता तो भविष्य में सरकार को राजस्व प्राप्त होने में काफी लाभ हो सके, साथ ही जीएसटी के साथ व्यापारी जुड़ेगा भी।
छोटे व्यापारी को परिभाषित करना चाहिए
अभी तक सरकार ने सूक्ष्म, मध्यम एवं लघु क्षेत्र के साथ छोटे व्यापारियों को परिभाषित कर दिया है लेकिन अति छोटे व्यापारियों को अपनी परिभाषा में शामिल नहीं किया गया है, जिसके कारण सरकारी योजनाओं और पैकेज का लाभ से वह वंचित रह जाते हैं, और इस वर्ग असंतोष फैलता है, जिसके कारण यह वर्ग को स्वयं को करदाता के रुप में स्थापित नहीं कर पाता है।
दी गई छूट किसके लिए और किसको मिलेगा लाभः
यह सर्वविदित है कि कोरोना महामारी के चलते लागू लाॅकडाउन के कारण देश के सूक्ष्म, मध्यम एवं लघु क्षेत्र के साथ छोटे व्यापारियों की कमर टूट गई है, जिसके लिए एसोसिएशन 14 अपै्रल 2020 को पत्र लिखकर आपके समक्ष मांग रखी थी कि जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों को बिना ब्याज )ण दिया जाना चाहिए, जिनकी गांरटी सरकार लें। लेकिन दुःखद ही है और प्रश्न है कि क्या घोषित पैकेज का लाभ वास्तविक जरुरतमंद व्यापारी वर्ग को प्राप्त हो सकेगा?
घोषित पैकेज के बिन्दु पर अध्ययन
आईटीआर को दाखिल करने की बढ़ी अंतिम तिथि, शायद इसका उद्देश्य यह हो सकता है कि 30 नंवबर तक पैसा कमा लो और फिर टैक्स भरना है।
विवाद से विश्वास की अंतिम तिथि बढ़ा दी तो प्रश्न उठता है कि ऐसे कितने सूक्ष्म, मध्यम एवं लघु क्षेत्र के व्यापारी हैं जिनके वाद विवाद में लम्बित हैं, जोकि विवाद से विश्वास योजना का लाभ उठा पाएंगे।
सभी टीडीएस दर वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 25 प्रतिशत छूट बढ़ा दी, इस घोषणा से न तो सरकार को कोई घाटा और न ही आम करदाता को लाभ होना है!! क्योंकि टीडीएस में जमा नहीं होगा तो टैक्स में जमा होगा, यह है नहीं कि टैक्स रेट में छूट प्रदान की है।
परिभाषा बदलने से लाभ क्या ?
अब बात करें नयी परिभाषा की जिसके अन्तर्गत व्यापार सेक्टर को परिभाषित कर दिया गया –
सेवा क्षेत्र एवं अन्य व्यावसायिक क्षेत्र को डैडम् माना जाएगा
माइक्रो बिजनेस 1 करोड़ निवेश और 5 करोड़ तक का कारोबार होना
लघु व्यवसाय वर्ग को 10 करोड़ तक के निवेश में बदल दिया गया और 50 करोड़ का कारोबार
मीडियम बिजनेस सेगमेंट में 20 करोड़ का निवेश और 100 करोड़ का कारोबार शामिल किया गया
इन सभी डैडम् को सभी बैंक से 50 करोड़ तक का वित्त मिलेगा और गारंटी सरकार द्वारा वहन की जाएगी।
इसके लिए यह 3.0 लाख करोड़ आरक्षित कर दिये ।
छोटे उद्योगों को नयी परिभाषा
इस राहत पैकेज में की गई व्यवस्था को मजाक ही कहा जा सकता है कि छोटे उद्योगों को परिभाषित किया गया छोटा उद्योग, वह उद्योग जिसमें 10 करोड़ रुपये का निवेश होगा या 50 करोड़ का टर्नओवर।
भेजे गया सुझाव
संस्था ने मुख्य रुप से यह सुझाव दिया था कि कोरोना लाॅकडाउन के समय ऐसा समय है, जिसको ‘अवसर’ में बदला जा सकता है। सुझाव था कि जीएसटी एक्ट की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए जीएसटी मंे पंजीकृत व्यापारी, जिनका वार्षिक टर्नओवर 5 करोड़ रुपये से कम हैं, उनको बिना ब्याज का )ण उपलब्ध कराया जाए, और ऐसे )ण की गांरटी सरकार लें।
जीएसटी में रिटर्न दाखिल करने के लिए फैलाया गया भ्रम
वैसे तो सरकार द्वारा जी.एस.टी. के अन्तर्गत ‘एमएसएमई वर्ग’ के व्यापारियों को रिटर्न आदि में राहत प्रदान किया है, लेकिन वह भी भ्रम फैलाने वाली ही कही जा सकती है, क्योंकि अंतिम तिथि नहीं बढ़ायी गई बल्कि लेटफाइलिंग लगने वाले लेटफीस में भी शर्तो की बाध्यता रख दी गई, कोई राहत प्रदान नहीं की गई।
जी.एस.टी. के पंजीकृत व्यापारी के वार्षिक टर्नओवर को आधार मान देना चाहिए )णः भेजा था सुझाव
फिर भी हम आपके समक्ष सुझाव प्रस्तुत कर रहे हैं कि सरकार को जी.एस.टी. के पंजीकृत व्यापारी के वार्षिक टर्नओवर को आधार मानते हुए इस वर्ग के व्यापारी के लिए राहत पैकेज के रुप में आर्थिक सहयोग प्रदान करना चाहिए।
राहत पैकेज का आधार हेतु मैं सुझाव प्रस्तुत कर रहे हैं-
1.ऐसे जी.एस.टी. पंजीकृत व्यापारी, जो सेमी अथवा मिनी माइक्रो श्रेणी ;छोटे, जिसमें भी शामिल करें, के हों और जो जी.एस.टी. में उनका पिछले 3 वर्ष का ;वर्ष 2017-18, 2018-19 एवं 2019-20द्ध के टर्नओवर को आधार बनाते हुए अधिकतम 25 प्रतिशत तक का )ण पंजीकृत डीलर्स के जीकी सहमति मांगते हुए एसटी के अन्तर्गत अंकित बैंक खाते में जमा करवा दिया जाना चाहिए। क्योंकि बैंक खाता व अन्य सूचनाएं जी.एस.टी. के अन्तर्गत उपलब्ध है।
2.ऐसे जी.एस.टी. पंजीकृत व्यापारियों को सरकार को बिना ब्याज का )ण प्रदान किया जाए, जिसका त्म.चंलउमदज का समय 36-60 माह, उनकी सहमति पत्र भरवा लिया जाये।
3.गांरटी का प्रश्न है तो ऐसा )ण पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा क्योंकि ऐसे व्यापारी जी.एस.टी. के अन्तर्गत पंजीकृत हैं और जिनका आधार नंबर के साथ पैन नंबर व बैंक खाता संख्या जी.एस.टी. में उपलब्ध होते हुए पंजीकृत है।
4.ऐसे वर्ग को छूट दी जाए कि वह मासिक जी.एस.टी. रिटर्न एवं टैक्स के साथ )ण की किस्त का भी भुगतान करें, यह )ण आई.टी.सी. में समायोजित नहीं किये जाने की व्यवस्था की जाए।
5.यदि किसी व्यापारी की आई.टी.सी. लम्बित चल रहा तो उनसे )ण मासिक किस्त के रुप में समायोजित कर लिया जाए।
6.इस तथ्य को भी ध्यान रखना होगा कि जिस पंजीकृत डीलर्स के सिबिल किसी भी परिस्थिति में प्रभावित हो चुकी है, उनको भी न्यूनतम स्कोर स्थापित कर लाभ का पात्र बनाना चाहिए। इसके लिए एक सीमा बना दी जाए और सिबिल कम होने पर भी उसको पात्रता की श्रेणी में शामिल कर लिया जाना चाहिए।
7.इस प्रकार की व्यवस्था और राहत दिये जाने से छोटे व्यापारीवर्ग में सरकार के साथ कर प्रणाली के प्रति विश्वास जागेगा, क्योंकि –
अ-ऐसे व्यापारी सामने आंएगे जो कि अभी तक जी.एस.टी. की ज्ीतमेीवसक सपउपज 20/40 लाख मानकर स्वयं को जी.एस.टी. में पंजीयन लेने के छूट के अधिकारी मानते आ रहे हैं।
ब-ऐसे राहत सुविधा से छोटे व्यापारियों को जी.एस.टी. में पंजीयन कराने के लिए प्रोत्साहन भी मिलेगा।
स-अतः ऐसे व्यापारी भविष्य में स्वयं के भविष्य को सुरक्षित मानकर जी.एस.टी. में पंजीयन लेने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
द- ऐसे पात्र करदाता अपना लेन-देन बैंक के माध्यम से करेंगे तो डिजीटल इंडिया का प्रयास सफल होगा।
स्वीकार किये गये सुझाव
हमको प्रसन्नता है कि सरकार ने हमारे कुछ सुझावों को स्वीकार कर लिया, जैसे
गांरटी सरकार द्वारा ली जाएगी
पुर्न-भुगतान 12 माह बाद प्रारम्भ होगा
पैकेज से उत्पन्न हुए प्रश्न परन्तु सत्यता का अनुभव करवा रहे हैं!!
घोषित और परिभाषित सूक्ष्म, मध्यम एवं लघु क्षेत्र के व्यापारी ऐसे किसी भी वर्ग में शामिल नहीं हैं, जिनको गरीब की श्रेणी के समकक्ष कहा जाए या संगठित क्षेत्र या असंगठित क्षेत्र के मजदूर। इसलिए कोई भी सरकार इस वर्ग को किसी भी वर्ग में मानकर कैसी भी राहत, सहायता या कोई )ण देने में आगे नहीं आ रही। इस वर्ग के लिए सबसे बड़ी समस्या आ खड़ी हो गई कि वह लोकलाज देखें या फिर मजदूर वर्ग में स्वयं को समायोजित कर ले।
यदि यह सभी राहत हैं तो फिर छूट क्या कहलाती हैं?
सरकार का यह कैसा मजाक?
सरकार कहती है कि देश के छोटे व्यापारियों के साथ है,
सभी ईमानदारी से टैैक्स भरो,
छोटे व्यापारी, जिनके वार्षिक टर्नओवर 10 लाख से 1 करोड़ तक है उनको किस श्रेणी में परिभाषित करते हुए क्या राहत प्रदान की है??
अंत में एक प्रश्न करना चाहते हैं कि घोषित पैकेज में देश के टेªडर्स को क्या लाभ मिलेगा, जबकि यह अटल सत्य ही देश की अर्थव्यवस्था में देश के टेªडर्स की भागीदारी लगभग 50 प्रतिशत की रहती है, उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि निर्माताओं द्वारा निर्मित सामान को बिक्री करवाने का महत्वपूर्ण मार्ग देश के टेªडर्स ही हैं, उत्पादन कितना ही हो लेकिन जब तक सशक्त सप्लाई नहीं होगी तो मांग का अर्थ ही क्या है?
पराग सिंहल, महासचिव
एसोसिएशन आॅफ टैक्स पेयर्स एंड प्रोफेशनल्स

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