
राहुल गांधी के तथाकथित एटम बम के फटने से सुतली बम जितना भी धमाका नहीं हुआ। पहले विभिन्न समाचार चैनलों एवं कल चुनाव आयोग द्वारा की गई प्रेस वार्ता में बिना नाम लिए राहुल गांधी के कर्नाटक की बंगलौर सेन्ट्रल लोकसभा सीट के महादेवपुरा विधान सभा में 1000250 फर्जी वोटरों के द्वारा वोट चोरी कर भाजपा को जिताने के आरोप की हवा निकाल दी। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण एवं निन्दनीय है कि नेता विपक्ष राहुल गांधी ने खुलकर एक पी पी टी के दौरान चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर भाजपा के साथ मिलकर वोट चोरी जैसा घृणित आरोप बिना किसी ठोस सबूत के लगाया गया। चुनाव आयोग ने कहा कि सभी आरोप निराधार हैं और यदि शपथ पत्र के साथ सात दिन के भीतर कागजात नहीं दिए जाते तो आरोप लगाने वालों के पास देश के मतदाताओं से माफी मांगने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। राहुल गांधी स्पष्ट कह चुके हैं कि वे सांसद हैं और वे कोई शपथपत्र नहीं देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके वचन ही शपथपत्र हैं और आंकड़े उनके नहीं चुनाव आयोग के हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने एक इसी से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए कहा कि उसने मतदाता सूची अवश्य दी है परन्तु उसका मनचाहा विश्लेषण जिन्होंने किया है, उन्हें अपने आरोंपों के साथ शपथपत्र देना ही होगा तभी उस पर कोई जाँच एवं कार्यवाही हो सकती है और ऐसा करना असम्बन्धित क्षेत्र के व्यक्ति द्वारा आरोप लगाने के लिए कानूनी बाध्यता है। चुनाव आयोग बिना लिखित एवं सत्यापित आरोपों के लाखों मतदाताओं को शंका के दायरे में लाकर उन्हें नोटिस जारी कर उनका अपमान नहीं कर सकता। चुनाव आयोग ने जोर देकर कहा कि वह सभी वैध मतदाताओं के साथ चट्टान की तरह खड़ा है और बिना पर्याप्त लिखित सबूत के किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटा सकता।
चुनाव आयोग की प्रेस वार्ता में मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह स्वीकार किया कि मतदाता सूची में गड़बड़ी हो सकती हैं जैसा बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के द्वारा सामने आया है परन्तु इस आधार पर किसी पर फर्जी वोट डालने या एक से अधिक जगह पर मतदान करने का आरोप लगाना उचित नहीं होगा जब तक इसके प्रमाण न हों। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की आवश्यकता ही इसलिए पड़ती है कि सामान्य पुनरीक्षण में रह जाने वाली विसंगतियों को दूर कर नई मतदाता सूची बनाई जा सके। ऐसे लाखों उदाहरण मिल जाएंगे कि मतदाता की लापरवाही तथा राजनैतिक दलों के बूथ लेवल एजेण्टों एवं बूथ लेवल अधिकारी की उदासीनता के चलते अनेक मृत लोगों या स्थायी तौर पर स्थानान्तरित लोगों के नाम मतदाता सूची से नहीं हटते या एक व्यक्ति के दो या अधिक मतदाता पहचान पत्र बन जाते हैं जिसका एकमात्र निदान विशेष गहन पुनरीक्षण ही है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह भी कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि कि ऐसे लोगों ने मतदान भी किया है क्योंकि हर पोलिंग बूथ पर स्थानीय लोग राजनैतिक दलों के एजेंट के तौर पर मौजूद रहते हैं जिन्हें अपने बूथ के सभी मतदाताओं की पूर्ण जानकारी होती है और उन्हें यह अधिकार होता है कि वे किसी भी संदेहास्पद मतदाता के मताधिकार को चुनौती दे सकें। मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह भी बताया कि सभी राजनैतिक दलों एवं प्रत्याशियों को अन्तिम मतदाता सूची उपलब्ध कराई जाती है और राजनैतिक दलों से निश्चित समय सीमा में आपत्तियां भी मांगी जाती हैं परन्तु तब कोई भी राजनीतिक दल इस बात को गम्भीरता से नहीं लेता। समय सीमा की समाप्ति और चुनाव नतीजों के आने के बाद मतदाता सूची पर सवाल उठाने का कोई औचित्य नहीं है और ना ही चुनाव आयोग ऐसी आपत्तियों का संज्ञान लेने के लिए कानूनन बाध्य है।
एक प्रश्न जो राहुल गांधी ने बड़े जोर शोर से उठाया था कि अनेकों मतदाताओं के पते गलत हैं या उनके पते की जगह जीरो लिखा है, उसे एक पत्रकार द्वारा पूछे जाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि भारत में लाखों लोग ऐसे है जिनके मकान का कोई नम्बर नगरपालिका या पंचायत के द्वारा नहीं दिया गया है परन्तु वे वैध मतदाता की शर्तें पूरी करते हैं तो चुनाव आयोग उन्हें एक नोशनल नम्बर देता है जिसे कम्प्यूटर जीरो दिखाता है। इससे उन मतदाताओं की वैधता पर कोई प्रश्न नहीं खड़ा होता।
राहुल गांधी और उनकी टीम ने कितना गहन एवं ईमानदार विश्लेषण किया है इसका भी अंदाजा इस बात से लगता है कि उनका पहला आरोप यही था कि बंगलौर सेन्ट्रल में सात विधान सभा सीटें हैं जिनमें कांग्रेस छः सीटों पर आगे रही और एक सीट पर एक लाख से अधिक फर्जी वोट बनाकर चुनाव आयोग ने भाजपा की जीत में मदद की एवं वोट चोरी की। सायं तक विभिन्न समाचार चैनलों ने पोल खोलते हुए बताया कि बंगलौर सेन्ट्रल में आठ विधान सभाएं आती हैं जिनमें भाजपा तीन पर आगे रही थी। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सभी चुनाव सर्वेक्षण हमें कर्नाटक में 16 सीटें दे रहे थे परन्तु हमें मात्र 9 सीटें मिली। वोट चोरी करके हमें हराया गया। हकीकत यह है कि बंगलौर सिटी की सीट 2009 में बनी और आज तक कांग्रेस कभी यह सीट नहीं जीती। इसी प्रकार महादेवपुरा विधान सभा सीट भी कभी कांग्रेस नहीं जीती। राहुल गांधी ने चुनाव सवेक्षण को ही हकीकत मानकर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर आरोप लगा दिए जो उनकी नासमझी या साजिश ही कही जा सकती है। उन्होंने जिन लोगों पर दोहरे मतदान का आरोप लगाया वे भी खुलकर मीडिया में सामने आए और इसका खंडन किया। एक महिला मतदाता जिसकी उम्र 35 वर्ष है नाम है मिंटा, उसकी उम्र मानवीय भूलवश जन्मदिन वर्ष 1990 की जगह 1900 पढ़े जाने के कारण 124 वर्ष अंकित हो गई। कांग्रेस सहित विपक्ष ने उस महिला की टी शर्ट पर फोटो छापकर 124 नाट आउट लिखकर संसद के सामने प्रदर्शन किया जिस पर उस महिला ने कड़ी आपत्ति जगाई। यह विपक्ष एवं राहुल गांधी की गंभीरता एवं मतदाता के प्रति सम्मान की मिसाल है। ऐसे अनर्गल आरोपों पर राहुल गांधी सहित विपक्ष चाहता है कि चुनाव आयोग जवाब दे। मेरा मानना है कि राहुल गांधी को ऐसे सतही आरोपों के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए और देश को अराजकता की ओर ले जाने से बचना चाहिए। वोट अधिकार यात्रा के स्थान पर विपक्ष को बिहार से शुरू किए गए मतदाता सूची के शुद्धिकरण हेतु विशेष गहन पुनरीक्षण के चुनाव आयोग के अभियान में सकारात्मक सहयोग देना चाहिए। राहुल गांधी यह भूल जाते हैं कि भारत में लोकतन्त्र की जड़े बहुत गहरी एवं मजबूत हैं और जनता बहुत समझदार है जिसका आभास देश की जनता उनकी दादी को भी करा चुकी है। भारत पाकिस्तान या बंगलादेश नहीं है जहाँ अराजकता एवं अविश्वास फैलाकर सत्ता पर काबिज हुआ जा सके।