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वैज्ञानिकों की चार साल की मेहनत रंग लाई है, अब पूरी दुनिया ही नहीं चांद भारत की मुट्ठी में

दिनेश अगरिया 

दिनेश अगरिया की कलम से .....23 अगस्त 2023 का दिन इतिहास के पन्नो में भारत की अभूतपूर्व सफलता के नाम दर्ज हो गया। चांद की सतह पर भारतीय चंद्रयान-3 दक्षिणी ध्रुव पर जब सफलता पूर्वक उतरा तो समूचे विश्व में भारत के मजबूत नेतृत्व की प्रशंसा होने लगी साथ ही भारत के प्रत्येक नागरिक को अपने देश पर गर्व की अनुभूति हुई। समस्त देशवासियों ने इसरो के वैज्ञानिक समूह को अपने अपने तरीके से बधाईयां प्रेषित कीं । यह समस्त देशवासियों के लिए अपार प्रसन्नता का अवसर था। हमारे वैज्ञानिकों की यह सफलता विश्व में अद्वितीय है। भारत विश्व में चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अपने अंतरिक्ष यान की सफल लैंडिंग वाला प्रथम देश बन गया है । इस मिशन में लगे 16500 वैज्ञानिकों की चार साल की मेहनत रंग लाई है, अब पूरी दुनिया ही नहीं चांद भारत की मुट्ठी में है। भारतीय संस्था इसरो ने चांद के दक्षिण ध्रुव पर परचम लहरा दिया है जो विश्व के सभी देशों का स्वप्न है। अब बच्चे सिर्फ चंदा मामा नहीं बुलाएंगे बल्कि चांद की तरफ देख कर अपने भविष्य के सपने को पूरा करेंगे।करवा चौथ पर अब सुहागिनों को चांद नहीं बल्कि देश की बुलंदी भी दिखा करेगी। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि और कौशल का प्रमाण है। एक दशक पहले तक भारतीय नागरिक अपने देश की छवि से बहुत शर्मिंदा थे दूसरे देशों में  देशवासीयों को कोई महत्व नहीं था लेकिन आज पूरे विश्व मे केवल भारतीय नेतृत्व की चर्चाएं हो रहीं हैं। इसके पीछे के कारणों को समझें तो कई ऐसे पहलू नजर आ जाते हैं जो अभी तक भारत के नेतृत्व को कमजोर बनाते रहे। नरेंद्र मोदी माँ भारती से ऊपर किसी को नहीं मानते पूर्ण समर्पण से राष्ट्र सर्वोपरि के विचार के साथ बढ़ रहें है लाल बहादुर शास्त्री के कुछ माह और अटल जी के कुछ वर्षों के बाद भारत को लगातार एक दशक तक मजबूत नेतृत्व मिला है जो विश्व के सभी देशो को  माँ भारती के चरणों में नतमस्तक करा चुका है ईश्वर से प्रार्थना है कि अगले एक दशक तक इसी प्रकार देश को मोदी जी का नेतृत्व मिलता रहे।।।

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