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पर्यावरण के अनुकूल है मेहसाणा थोल वन्यजीव अभयारण्य, आनंदी बेन ने रोपित किया कदंब

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

गुजरात के मेहसाणा में स्थित थोल वन्यजीव अभ्यारण्य का पर्यावरण अनुकूलता और देशी विदेशी पक्षियों की भरमार के लिए प्रसिद्ध है। अभ्यारण्य का यह प्राकृतिक वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां सारस,राजहंस, पेलिकन,बत्तख और अन्य कई पक्षियों का बसेरा रहता है। यहां विशाल झील है। प्रवासी पक्षी नीयत समय पर लंबी उड़ान भर कर यहां पहुंचते है। इसका नाम पास में स्थित थोल गांव के नाम पर रखा गया है।
यहां के दुर्लभ प्रजातियों के पौधे और पेड़ भी प्रसिद्ध हैं। पर्यटकों की इनके प्रति भी जिज्ञासा रहती है। अभ्यारण्य सात वर्ग किलोमीटर के विशाल भू भाग में फैला हुआ है। यहां के जलाशय को सिंचाई के लिए जल संचयन हेतु बनाया गया था। बड़ौदा के शासक सयाजीराव गायकवाड़ ने इसका निर्माण कराया था। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गुजरात के अहमदाबाद में मेहसाणा स्थित थोल वन्यजीव अभयारण्य का भ्रमण किया। स्थानीय पक्षीविज्ञानी द्वारा प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों की प्रजातियों की जानकारी दी गई। साइबेरिया,रूस, मंगोलिया, कजाकिस्तान और चीन से आने वाले बार-हेडेड गीज, ग्रेलेग गीज, डालमेटियन पेलिकन,कॉमन क्रेन, ब्राह्मणी डक, रफ एंड रीव जैसे दुर्लभ प्रवासी पक्षियों को देखकर राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त की। इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत कदंब के पेड़ का वृक्षारोपण भी किया गया।

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