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सुदर्शन सेतु से सुगम हुई बेट द्वारिका यात्रा

सनातन आस्था के स्थलों पर ऐतिहासिक शास्त्रीय और पुरातात्विक प्रमाण भी परिलक्षित होते है। वर्तमान में गुजरात के द्वारिका धाम और बेट द्वारिका में भी इस तथ्य का अनुभव होता है। मथुरा वृंदावन में राधे राधे तो गुजरात में जय श्री कृष्ण की गूंज सुनाई देती है। प्रभु श्री कृष्ण को द्वारकाधीश भी कहा जाता है। भारत में पिछले कुछ वर्ष आस्था के स्थलों का अभूतपूर्व विकास हुआ है। इस दृष्टि से यह स्वर्णिम काल है। बेट द्वारिका द्वीप पर स्थित है। यहां सड़क मार्ग से पहुंचने की कल्पना करना भी संभव नहीं था। नाव स्टीमर से यहां की यात्रा होती थी। लेकिन अब आस्था का यह स्थल सुदर्शन सेतु और सड़क से जुड़ गया है। संकल्प से यह असंभव कार्य सिद्ध हुआ। प्रभु श्री कृष्ण की द्वारका अरब सागर में विलीन हो गई थी। इसके भी प्रमाण उपलब्ध हैं। समुद्र की तलहटी में प्राचीन दीवारों और पत्थरों के रूप में इसके अवशेष मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसको देखा है। उन्होंने
राष्ट्रीय राजमार्ग इक्यावन पर बेट द्वारका और ओखा के बीच सुदर्शन सेतु का उद्घाटन किया था। यह भारत का सबसे लंबा केबल स्टेयड सेतु है। इसके माध्यम से कच्छ की खाड़ी में एक टापू बेट द्वारिका तक सड़क मार्ग से पहुंचना संभव हो गया है। यह
भगवान कृष्ण का निवास था। यहीं
सुदामा उनसे मिलने आए थे। यहां मंदिर की स्थापना रुक्मणी द्वारा की गई थी। यहां कृष्ण रुक्मणी की मूर्तियां हैं। बेट का अर्थ उपहार होता है।

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