
लखनऊ। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल अपना अध्ययन पूर्ण करने के बाद शिक्षिका बनी थी। उन्होंने अपने उस दायित्व का बड़ी कुशलता से निर्वाह किया था। वह बालिकाओं को विशेष रूप से पढ़ने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती थी। बच्चों के सर्वांगीण विकास और नैतिक शिक्षा पर भी उनका जोर रहता था। कुलाधिपति के रूप में उनके दीक्षांत संबोधन का भी शैक्षणिक महत्व होता है। एक बार फिर आनंदी बेन शिक्षिका के रूप में दिखाई दीं। वह जनभवन स्थित विद्यालय में पहुंची। वहां क्लास रूम में उन्होंने बच्चों के अलावा अभिभावकों से संवाद किया। बच्चों के सामने वह शिक्षिका की भांति दिखाई। अभिवावकों के साथ उनका संवाद टीचर गार्जियन मीटिंग जैसा रहा। राज्यपाल का यह संवाद मात्र उस विद्यालय तक ही सीमित नहीं कहा जा सकता। बल्कि प्रदेश के सभी विद्यालयों,
विद्यार्थियों और अभिभावकों को इससे सीख लेनी चाहिए। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से नियमित विद्यालय आने एवं कक्षाओं में उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु प्रेरित किया। अभिभावकों से कहा कि यदि बच्चा समय से घर नहीं पहुंचे तो उसकी जानकारी अवश्य प्राप्त करें। बच्चों के साथ नियमित संवाद करें।सभी कक्षाओं व विद्यालय स्थित आंगनवाड़ी का अवलोकन भी किया।



