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हर रक्षाबंधन में बहन की मार्मिक सिसकियां

रीना त्रिपाठी

26 सितंबर का वह काला दिन सिसकती हुई बहन युक्ता कभी भूल नहीं पाएगी। कल एक मरीज को देखने के सिलसिले में एरा हॉस्पिटल जाना हुआ बहुत सी यादें ताजा हो गई ।बात 2020की है निश्चित रूप से कोरोना महामारी से पूरा देश दहल रहा था पर इस समय समाचार पत्रों में एक खबर आई की इंट्रीगल अस्पताल और एरा अस्पताल में कोरोना मरीज के अंगों की तस्करी का मामला सामने आ रहा है क्योंकि उस समय कोरोना  में मृतक के शरीर को परिजनों को नहीं दिया जाता था  और यदि सुपुर्द भी किया जाए तो उसे एक विशेष प्रकार की किट में पैक करके सीधे अग्नि दाह यंत्र के सुपुर्द किया जाता था  किट में बंद होने के कारण लोग अपने परिजनों का चेहरा भी नहीं देख पाते थे।
       इस समय कोरोना से ग्रसित युवा आदर्श कमल पांडे पूरे होश हवास में इंटीग्रल अस्पताल में भर्ती हुए,एक दिन उन्होंने वीडियो के माध्यम से अपनी बहन को बताया कि मेरे बगल वाले व्यक्ति जो की पूरी तरह स्वस्थ थे और मुझसे कल बातें कर रहे थे रात में अचानक मौत हुई ऐसा लग रहा है कि लोग तकिए से सांस रोक देते हैं और सुबह वह मरा हुआ मिलता है बहन मुझे यहां से निकाल लो वरना कल मैं भी मरा हुआ मिलुगा इस अस्पताल में काफी चीज गड़बड़ है।
    पूरे होशो हवास में बिना किसी सांस की गतिरोध के बनाए गए यह वीडियो जब घर वालों को मिला तो उनके होश उड़ गए ।इंटीग्रल अस्पताल से अपील की गई की  हम मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाएंगे इंटीग्रल और एरा लगभग एक ही विधि से चलने वाले अस्पताल हैं या कहें चिकित्सा विश्वविद्यालय के रूप में विख्यात है। एरा में रिफर किया गया मरीज को बेड तो मिल गया पर आपसी साठगांठ होने के कारण इंटीग्रल के कथन अनुसार ही उसका इलाज हुआ। 
        आदर्श मैं फिर एक वीडियो अपनी बहन को भेजो जिसमें उसने कहा कि यहां पर अंगों की तस्करी चल रही है मुझे ऐसा लग रहा है आज रात मेरी बारी है,अस्पताल की पोल ना खोल दी जाए इसलिए मरीज का मोबाइल जप्त कर लिया गया। और 15 मिनट पहले अस्पताल में पूछे जाने पर स्टाफ ने सकुशलता की सूचना दी। वही 15 मिनट बाद ही अस्पताल के द्वारा फोन आता है कि उसकी मृत्यु हो गई ....निश्चित रूप से क्या कोई बहन इस अनहोनी को भूल पाएगी ।अनहोनी कहे या पुत्र का इस तरह षड्यंत्र पूर्ण जाना पिता को बर्दाश्त नहीं हुआ पुत्र के देहावसान के छः महीने बाद ही पिता की हृदय घात से मृत्यु हो गई।
    और इस पूरी लड़ाई में पिता शिव प्रकाश पांडे भाई  आदर्श कमल पांडे कर पल साथ निभाने वाली बहन युक्ति पांडे ने संघर्ष किया पूरी कोशिश की की सच्चाई सामने आ सके परंतु असहाय अबला का किसी ने साथ नहीं दिया।  इस चिकित्सी स्कैंडल  मामले की मुख्यमंत्री म. योगी आदित्यनाथजी के द्वारा आदेशित होने के बाद भी एस आइ टी जांच होकर रिपोर्ट नहीं आ पाई। अब इसे एरा और इंटीग्रल की राजनीतिक पकड़ कहें ,पैसे की ताकत कहें या भ्रष्टाचार की चरम सीमा कहें कि लोगों की लाश से भी खिलवाड़ करने वाले लोग आज शांति और सुकून से जी रहे हैं अपना बिजनेस इस धरने से चला रहे हैं। उधर वह बहन जो पूरी लड़ाई में अपने पिता के साथ दिन-रात एक कर रही थी सिर्फ सिसकियां भरकर अपने आंसू को पोछते हुए चुपचाप बैठ जाएं यह अपेक्षित जरूर है।  

          निश्चित रूप से न्याय की अपेक्षा तो नहीं की जा सकती और ना ही आज तक आदर्श कमल पांडे के मोबाइल वापस मिल सकते हैं । मानवता के स्तर पर टकटकी  लगाए दरवाजे पर देखती बूढ़ी मां और बेबस बहन का साथ देते हुए हम सबको ऐसे अस्पतालों का बहिष्कार और परित्याग जरूर होना चाहिए। जहां मानवअंगो की तस्करी और विशेष धर्म और जाति के नाम पर खिलवाड़ किया जाता है।  हमें इस राखी भी अपने भाई का इंतजार कर रही उस मासूम बहन का साथ देना चाहिए।
                      

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