देश दुनियांलेखसम्पादकीय

विकसित भारत@2047 का संकल्प

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का विचार व क्षेत्र व्यापक रहा है। राष्ट्रीय स्वाभिमान किसी देश को शक्तिशाली बनाने में सहायक होता है। तब उसके विचार पर दुनिया ध्यान देती है। भारत ने कभी अपने मत पर प्रचार तलवार के बल पर नहीं किया। देश में इसी विचार के जागरण की आवश्यकता है। स्वामी विवेकानन्द ने ऐसे ही राष्ट्रीय स्वाभिमान के जागरण का विचार दिया था। उन्होंने परतंत्र भारत को राष्ट्रीय गौरव का स्मरण दिलाया था। इसके माध्यम से उन्होंने न समर्थ भारत का स्वप्न देखा था। वह मानते थे कि विश्वगुरु होने की क्षमता केवल भारत के पास है। इस तथ्य का विस्मरण नहीं होना चाहिए। उन्होंने दुनिया को भारत की शाश्वत और मानवतावादी संस्कृति का ज्ञान दिया। विश्व ने विस्मय के साथ उनको सुना। उन्होंने पश्चिमी देशों को बता दिया कि भारत राजनीतिक रूप से परतंत्र हो सकता है, लेकिन विश्व गुरु को सांस्कृतिक रूप से कभी गुलाम नहीं बनाया जा सकता। स्वामी विवेकानन्द के प्रत्येक ध्येय वाक्य भारतीय संस्कृति उद्घोष करने वाले है। उनसे संबंधित समारोह उत्सव से विचारों की प्रेरणा मिलती है। उनका व्यक्तित्व व कृतित्व राष्ट्रवाद की प्रेरणा देता है। स्वामी विवेकानन्द का स्मरण वैचारिक ऊर्जा का संचार करता है,जिससे अज्ञानता का अंधकार दूर हो जाता है। विश्व और मानवता का कल्याण भारत की वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से ही हो सकता है। विवेकानंद जी सच्चे महापुरुष थे। उनका कोई आलोचक नहीं हुआ। उन्होंने भारतीय संस्कृति की ध्वज पताका विश्व में फहराई। भारत के बारे में कहा जाता है कि ये अनेकता में एकता का देश है, यहां अलग खानपान, पहनावा अलग है। राष्ट्रीय युवा महोत्सव जैसे आयोजनों से ये अनेकता एकता में बदल जाती है। योगी आदित्यनाथ ने उन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा के ध्वजवाहक,विश्व मंच पर सनातन संस्कृति को पुनर्स्थापित करने वाला राष्ट्रप्रेरक युवा संन्यासी बताया।स्वामी जी के विचारों ने यह सिद्ध किया कि हिंदू धर्म मानवता के समग्र उत्कर्ष एवं कल्याण का सर्वोच्च मार्गदर्शक है। राष्ट्रीय युवा दिवस’ पर उनके विचारों को जीवन में धारण कर राष्ट्र सेवा और समाज उत्थान का संकल्प लेना चाहिए।अपने पूर्वजों, सांस्कृतिक परम्पराओं पर गौरव की अनिभूति होनी चाहिए। भारत राष्ट्र बनने की प्रक्रिया कभी नहीं रहा। यह शाश्वत रचना है।इसका उल्लेख विश्व के सबसे प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद में भी है। इसमें कहा गया कि भारत हमारी माता है हम सब इसके पुत्र है। राष्ट्र की उन्नति प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। जो लोग भारत को नही जानते वो लोग भारत के बारे में गलत बात षड्यंत्र करके भारत को नक्सलवाद, उग्रवाद आतंकवाद में धकेलने का प्रयास करते है। विष्णु पुराण में कहा गया कि यह भूभाग देवताओं के द्वारा रची गयी है। स्वामी विवेकानन्द ने देश व दुनिया में लोगों को नई सोच और नई दिशा दी। उन्होंने देशवासियों में स्वाभिमान व राष्ट्रीय चेतना का संचार किया तथा भारतीय वेदांत दर्शन और अध्यात्म पर सारे विश्व के सामने अपने विचार रखे। वह ऐसे समाज की कल्पना करते थे, जिसमें धर्म या जाति के आधार पर कोई भेदभाव न हो। स्वामी विवेकानन्द ने शिकागो में आयोजित विश्व धर्म परिषद में जो व्याख्यान दिया उससे पूरे विश्व में भारत एवं भारतीयता की एक छवि बनी थी। धार्मिक एवं सांस्कृतिक राजदूत के रूप में जब उन्होंने शिकागो में अपनी बात रखी तो पूरा माहौल बदल गया। भाईयों बहनों के सम्बोधन से लेकर उन्होंने भारतीय संस्कृति की अवधारणा वसुधैव कुटुम्बकम की बात कहकर भारत को ऐसे देश में नई पहचान दिलाई, जहाँ भारतीय लोगों का सम्मान नहीं होता था। स्वामी विवेकानन्द ने भारतीय विचारों के अनुरूप विश्व को एक परिवार बताया। यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय संस्कृति में सभी धर्मों को समाहित करने की क्षमता है। संसद के द्वार पर लिखा यह श्लोक आज भी संसद में प्रवेश करने वालों को प्रेरणा देता है कि बिना भेदभाव के काम करें तथा पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखें।
स्वामी विवेकानन्द ने अल्प समय में पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई।। पश्चिमी सभ्यता के लोग भारतीय उदारता की कल्पना ही नहीं कर सकते थे। स्वामी विवेकानन्द ने ज्ञान और शब्दों के आधार पर सबका सम्मान प्राप्त किया। धार्मिक एवं सांस्कृतिक राजदूत के रूप में जब उन्होंने शिकागो में अपनी बात रखी तो पूरा माहौल बदल गया। स्पष्ट है कि स्वामी विवेकानन्द ने परतंत्र भारत को राष्ट्रीय गौरव का स्मरण दिलाया था। इसके माध्यम से उन्होंने न समर्थ भारत का स्वप्न देखा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद का यह दृढ़ विश्वास था कि युवा शक्ति ही राष्ट्र निर्माण की सबसे सशक्त आधारशिला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय युवा अपने जोश, ऊर्जा और जुनून के बल पर हर संकल्प को साकार करने की क्षमता रखते हैं।
आज का युवा आत्मविश्वास, नवाचार और परिश्रम के माध्यम से देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लक्ष्य पर एकाग्रता, संकल्प पर दृढ़ता और कर्म में निरंतरता ही स्वामी विवेकानंद का मुख्य संदेश है। यह युवाओं को सफलता की राह दिखाता है। स्वामी जी ने भारत की सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया। उनका दृढ़ विश्वास था कि युवा शक्ति और आध्यात्मिक चेतना के बल पर भारत विश्व गुरु बनेगा। युवाओं के कौशल से विकसित भारत@2047 का लक्ष्य पूरा होगा।युवाओं को एआई, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, ड्रोन जैसी तकनीकों से जुड़ना चाहिए। तकनीक और प्रगति के साथ नैतिकता, अनुशासन और सामाजिक संवेदनशीलता जरूरी है। स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को देश का शिल्पकार बताया है। युवा शक्ति मजबूत होगी तभी भारत विश्व गुरु बनेगा।

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