
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अगर कोई नेता अपने अगले कदम को लेकर सबसे ज्यादा रहस्य बनाए रखता है, तो वह हैं मायावती! कभी अचानक गठबंधन करके सबको चौंका देना, तो कभी आखिरी वक्त पर “एकला चलो रे” की रणनीति अपनाना, बहुजन समाज पार्टी की राजनीति हमेशा संकेतों और सस्पेंस से भरी रही है। लेकिन इस बार लखनऊ में हुई बसपा की हाई-प्रोफाइल बैठक ने राजनीतिक गलियारों में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मायावती 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अपनी पुरानी लाइन बदलने जा रही हैं?
दरअसल सबसे बड़ा संकेत मायावती की “खामोशी” से मिल रहा है। क्योंकि आमतौर पर बसपा की बैठकों में समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और कई बार भाजपा तक पर भी तीखे हमले देखने को मिलते हैं। खासकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के खिलाफ मायावती का रुख हमेशा आक्रामक रहा है। लेकिन इस बार उन्होंने किसी पर कोई सीधा हमला नहीं किया। राजनीति में कई बार शब्दों से ज्यादा “चुप्पी” बोलती है, और मायावती की यही चुप्पी अब बड़े संकेत के रूप में देखी जा रही है।


