
भाजपा की रणनीति हमेशा सामाजिक समीकरणों को साधने की रही है। पार्टी जानती है कि पश्चिम यूपी में जाट वोट पूरी तरह उसके साथ बना रहे, इसके लिए जयंत चौधरी का साथ राजनीतिक रूप से फायदेमंद है। खासकर लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा यह जोखिम नहीं लेना चाहेगी कि जाट और किसान वोटों में किसी तरह की नाराजगी पैदा हो। लेकिन दूसरी तरफ भाजपा इतनी बड़ी पार्टी होने के कारण अपने मौजूदा विधायकों को भी नाराज नहीं कर सकती। यही राजनीतिक संतुलन 2027 की सबसे बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।


