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मातृभाषा के माध्यम से ही हम जीवन के मूल्यों से जुड़ सकते हैं- युवराज मलिक

अलवर के जिलाधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने कार्यशाला को अपनी मातृभाषा राजस्थानी में ही सभी को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि एनबीटी ने इस अनुवाद कार्यशाला के माध्यम से अलवर में राजस्थान के विभिन्न जिलों के प्रख्यात साहित्यकारों को एकत्रित करने का सराहनीय कार्य किया है.

अलवर: नेशनल बुक ट्रस्ट- एनबीटी (राष्ट्रीय पुस्तक न्यास) ने तीन दिन की अनुवाद कार्यशाला का आयोजन किया है. यह कार्यशाला राजस्थान के अलवर में आयोजित की गई है. ट्रांसलेशन वर्कशॉप में बच्चों को राजस्थानी भाषा के अनुवाद की तकनीकी और भाषाई ज्ञान दिया जा रहा है.

अनुवाद कार्यशाला का उद्घाटन राजस्थानी भाषा के प्रख्यात साहित्यकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ और अलवर के जिलाधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने किया. इस अवसर पर मधु आचार्य ने कहा कि अनुवाद कार्यशाला एक सराहनीय प्रयास है अन्य भारतीय भाषाओं के समृद्ध साहित्य को राजस्थानी भाषा में लाने का. उन्होंने कहा संवेदनाओं और भावों को पिरोने का कार्य भाषा, साहित्य और संस्कृति करती है.

अलवर के जिलाधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने कार्यशाला को अपनी मातृभाषा राजस्थानी में ही सभी को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि एनबीटी ने इस अनुवाद कार्यशाला के माध्यम से अलवर में राजस्थान के विभिन्न जिलों के प्रख्यात साहित्यकारों को एकत्रित करने का सराहनीय कार्य किया है.

उद्घाटन अवसर पर राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक ने कहा कि भाषा और संस्कृति एक सिक्के के दो पहलू हैं. मातृभाषा के माध्यम से ही हम जीवन के मूल्यों से जुड़ सकते हैं. उन्होंने कहा कि राजस्थान के विभिन्न जिलों में आगे भी इस तरह के साहित्यिक कार्यक्रमों एवं गतिविधियों का आयोजन न्यास द्वारा किया जाएगा.

कार्यक्रम में राजस्थानी भाषा के साहित्यकार डॉ. राजेंद्र सिंह बारहठ ने राजस्थानी भाषा की सुंदरता से परिचित करवाया. साहित्यकार डॉ. जीवन सिंह ने भी राजस्थानी भाषा एवं साहित्य पर अपने विचार साझा किए.

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