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पंजाब में वाघा बॉर्डर पर 2,000 साल पुरानी बुद्ध की मूर्ति जब्त

मूर्ति पुरातनता एवं कला खजाना अधिनियम, 1972 के तहत पुरातनता की श्रेणी में आती है। सीमा शुल्क अधिनियम एवं कला खजाना अधिनियम, 1972 के तहत पत्थर की मूर्ति को जब्त कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।

दूसरी या तीसरी शताब्दी की बुद्ध की एक प्राचीन पत्थर की मूर्ति अमृतसर में कस्टम अधिकारियों द्वारा जब्त की गई है। ये मूर्ति एक विदेशी नागरिक से जब्त की गई है। पाकिस्तान के साथ लगते अटारी-वाघा बॉर्डर पर इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट के जरिए भारत पहुंचे विदेशी नागरिक को रोका गया और उसके सामान की जांच की गई। सीमा शुल्क आयुक्त (अमृतसर) ने कहा कि इसी दौरान जांच के बाद, अधिकारियों को बुद्ध की एक पत्थर की मूर्ति मिली। जिसके बाद मामला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) चंडीगढ़ सर्कल के कार्यालय को भेजा गया था।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा शुल्क आयुक्त (अमृतसर) राहुल नांगारे ने एक बयान में कहा, "एएसआई ने अब इस बात की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट दी है कि मूर्तिकला का टुकड़ा गांधार स्कूल ऑफ आर्ट (गांधार शैली) का बुद्ध प्रतीत होता है और कह सकते हैं कि यह दूसरी या तीसरी सदी की मूर्ति है।" उन्होंने कहा कि इस तरह की सदियों पुरानी मूर्ति पुरातनता एवं कला खजाना अधिनियम, 1972 के तहत पुरातनता की श्रेणी में आती है। सीमा शुल्क अधिनियम एवं कला खजाना अधिनियम, 1972 के तहत पत्थर की मूर्ति को जब्त कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।

बता दें कि यूनानी कला के प्रभाव से देश के पश्चिमोत्तर प्रदेशों में कला की जिस नवीन शैली का उदय हुआ उसे गांधार शैली कहा जाता है। यह विशुद्ध रूप से बौद्ध धर्म से संबंधित धार्मिक प्रस्तर मूर्तिकला शैली है। इसका उदय कनिष्क प्रथम के समय हुआ। तक्षशिला, कपिशा, पुष्कलावती, बामियान आदि इसके प्रमुख केंद्र रहे।

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