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LU राजनीति शास्त्र विभाग की कार्यशाला, भारत के सांस्कृतिक इतिहास का अधिकांश हिस्सा कश्मीर का है-

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पद्मश्री पुरस्कार 2024 से सम्मानित, संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ के सेवानिवृत्त प्रो नवजीवन रस्तोगी ने अभिनव गुप्त के दर्शन को भारत का सबसे लोकतांत्रिक दर्शन बताया, जिसमें कोई भेदभाव की जगह नहीं है। प्रो रस्तोगी ने कहा कि भारत के सांस्कृतिक इतिहास का अधिकांश हिस्सा कश्मीर का है। कश्मीर भारत के विद्या का मुकुट मणि है। प्रो रस्तोगी ने लखनऊ विश्वविद्यालय एवं जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में  ’’जम्मू कश्मीर और लद्दाख की समझः रुझान और प्रवृत्तियाँ’’ विषय  कार्यशाला के प्रथम दिवस अपना संबोधन दिया. दो दिवसीय कार्यशाला का आज शुभारम्भ हुआ. इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शोध की दृष्टि से जम्मू कश्मीर और लद्दाख के विभिन्न विषयों को समझना और सम्बन्धित विषय पर शोध सम्बन्धी समझ विकसित करना है। कार्यशाला की संयोजक प्रो मनुका खन्ना, विभागाध्यक्ष, राजनीतिशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा मुख्य अतिथि प्रतिकुलपति प्रो अरविन्द अवस्थी का स्वागत किया गया। प्रो. अरविन्द अवस्थी द्वारा पद्मश्री प्रो नवजीवन रस्तोगी का स्वागत करते हुए अभिनव गुप्त के दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कश्मीर को धरती पर स्वर्ग बताया।  मुख्यवक्ता आशुतोष भटनागर ने सप्त सिन्धु क्षेत्र को बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र में भारत के जीवन-मूल्य गढ़े गये है। जम्मू कश्मीर का विषय भारत के इतिहास का विषय है। जो भारत को जोड़ने वाला विषय है। जम्मू-कश्मीर से हमारा सम्बन्ध सिर्फ भौगोलिक ही नहीं सांस्कृतिक और भावनात्मक है। 
    कार्यशाला के औपचारिक सत्रों के प्रथम सत्र में डा मंयक शेखर, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, संस्कृति मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि एवं इतिहास पर व्याख्यान दिया। द्वितीय सत्र में आशुतोष भटनागर ने जम्मू कश्मीर के राजनैतिक इतिहास पर अपने विचार प्रस्तुत किये। प्रथम दिवस के अन्तिम सत्र में  डी के0
 दुबे, अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय ने जम्मू कश्मीर के एकीकरण की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए भारतीय संविधान में अनुच्छेद 370 को लाने और उसके निराकरण की न्यायिक प्रक्रिया के तथ्यों पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में शोध छात्रों ने जम्मू कश्मीर से सम्बन्धित जिज्ञासाओं को वक्ताओं के साथ साक्षा करते हुए इस विषय पर शोध की समस्याओं व विकल्पों पर अपने विचार रखें। कार्यशाला की संयोजक प्रो मनुका खन्ना एवं संगठन सचिव प्रो राघवेन्द्र प्रताप सिंह व डा शिखा चैहान रहें। एवं डा शिखा चैहान द्वारा मंच का संचालन किया गया। 
    इस दौरान विभाग के समस्त शिक्षक प्रो कमल कुमार, प्रो संजय गुप्ता, प्रो0 कविराज, डा अमित कुशवाहा, डा राजीव सागर, डा माधुरी साहू, डा0 अनामिका, डा0 जितेन्द्र कुमार, डाॅ दिनेश कुमार, डा0 तुंगनाथ मुआर व अन्य छात्र-छात्राएं उपस्थित रहें।

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