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समरसता और जनकल्याण की नींव: शिक्षा, स्वास्थ्य व सुरक्षा के सरकारी संरक्षण से साकार होगा विकसित भारत लक्ष्य-2047″

डॉ प्रमोद कुमार

भारत, जिसे विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध सभ्यताओं में गिना जाता है, आज़ादी के अमृतकाल में एक नए संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2047, जब देश अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा, उस समय तक भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना हर भारतीय का स्वप्न है। यह सपना केवल आर्थिक विकास, उद्योगों की प्रगति या तकनीकी नवाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक अर्थ है—समाज में समरसता, जनकल्याण और प्रत्येक नागरिक के जीवन में गरिमा का अनुभव है। भारत, जो विश्व की सबसे प्राचीन और बहुरंगी सभ्यता का धनी देश है, आज़ादी के 100 वर्ष पूरे होने पर यानी वर्ष 2047 में एक विकसित राष्ट्र के रूप में खड़ा हो—यह हर भारतीय का सपना है। यह सपना केवल आर्थिक वृद्धि, आधुनिक तकनीक या अवसंरचना विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक समरसता, जनकल्याणकारी नीतियां और हर नागरिक के जीवन की गरिमा का संवर्धन शामिल है। किसी भी राष्ट्र की प्रगति का असली पैमाना वहां के नागरिकों को मिलने वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित जीवन वातावरण है।

भारत जैसे विविधताओं वाले देश में जहां जाति, वर्ग, धर्म, भाषा और क्षेत्रीय असमानताएं विद्यमान हैं, वहाँ सरकारी संरक्षण और नीतिगत संकल्प के बिना समरसता और जनकल्याण की दिशा में कोई ठोस कदम उठाना कठिन है। शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा—ये तीन स्तंभ न केवल नागरिकों की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, बल्कि विकसित भारत की मज़बूत इमारत की नींव भी रखते हैं। किसी भी राष्ट्र के वास्तविक विकास का आकलन उसके नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता से होता है। जब हर व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, वह आत्मनिर्भर और जागरूक बनेगा; जब उसे स्वास्थ्य सेवाओं की गारंटी होगी, तो वह स्वस्थ और उत्पादक जीवन जी सकेगा; और जब उसे सुरक्षित वातावरण मिलेगा, तो वह निर्भय होकर समाज और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देगा। यही तीन आधार स्तंभ—शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा—एक विकसित भारत की मजबूत नींव रखते हैं।

भारत जैसे विविधताओं वाले देश में जहां जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्रीय असमानताएं मौजूद हैं, वहां समरसता और जनकल्याण का मार्ग केवल सरकारी संरक्षण से ही संभव है। सरकार की नीतियाँ, योजनाएँ और उनका प्रभावी क्रियान्वयन यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि विकास का लाभ समान रूप से सभी तक पहुँचे और कोई भी वर्ग पीछे न छूटे। अतः विकसित भारत लक्ष्य-2047 का मार्ग शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के सरकारी संरक्षण से होकर ही गुजरता है। यही वह बुनियाद है, जिस पर एक समरस, समावेशी और जनकल्याणकारी राष्ट्र की इमारत खड़ी की जा सकती है। इस लेख में हम विस्तार से देखेंगे कि किस प्रकार शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा का सरकारी संरक्षण भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में सहायक हो सकता है और क्यों समरसता व जनकल्याण की बुनियाद इन्हीं पर टिकी है।

1. विकसित भारत लक्ष्य-2047: परिकल्पना और आवश्यकता

भारत ने 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त की और 75 वर्षों की यात्रा में कई क्षेत्रों में अद्भुत प्रगति की। विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, उद्योग और रक्षा में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल हुईं। परंतु अभी भी भारत कई चुनौतियों से जूझ रहा है—गरीबी, अशिक्षा, बेरोज़गारी, स्वास्थ्य असमानता, लैंगिक भेदभाव, सामाजिक असुरक्षा और सांप्रदायिक तनाव।

विकसित भारत 2047 की परिकल्पना केवल GDP वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका अर्थ है—

प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।
सभी को किफ़ायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों।
महिलाएं, बच्चे, बुज़ुर्ग और कमजोर वर्ग सुरक्षित महसूस करें।
समाज में जातिगत, धार्मिक और आर्थिक असमानताओं का अंत हो।
तकनीकी और आर्थिक विकास का लाभ सब तक समान रूप से पहुँचे।
यह तभी संभव है जब शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे मौलिक स्तंभों का सरकारी संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

2. समरसता और जनकल्याण: विकास की असली बुनियाद

(क) समरसता का महत्व
समरसता का अर्थ है—समाज में समानता, भाईचारा और परस्पर सहयोग की भावना। भारत की विविधता उसकी शक्ति है, लेकिन यही विविधता कभी-कभी भेदभाव, जातिगत संघर्ष और धार्मिक कट्टरता का कारण भी बनती है।
यदि समाज विभाजित रहेगा, तो विकास का लाभ असमान रूप से बंटेगा।
सामाजिक तनाव और असुरक्षा निवेश, नवाचार और प्रगति को बाधित करेंगे।
समरसता से नागरिकों में एकता और राष्ट्रीय गौरव की भावना पैदा होती है, जो किसी भी विकसित राष्ट्र का मूल है।
(ख) जनकल्याण की भूमिका
जनकल्याणकारी राज्य का उद्देश्य है—जनता के जीवन स्तर को ऊँचा उठाना।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च किया गया प्रत्येक रुपया भविष्य में उत्पादक मानव संसाधन बनकर लौटता है।
सुरक्षा सुनिश्चित होने पर नागरिक निडर होकर नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक कार्यों में योगदान देते हैं।
जब आमजन का जीवन सुरक्षित और गरिमामय होता है, तभी राष्ट्र का विकास टिकाऊ और समावेशी बनता है।

3. शिक्षा: समरस समाज और विकसित भारत की पहली सीढ़ी

(क) शिक्षा का महत्व
शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज में समान अवसर, न्याय और समरसता स्थापित करने का माध्यम है।
अशिक्षा ही गरीबी, अंधविश्वास, लैंगिक भेदभाव और सामाजिक पिछड़ेपन की जड़ है।
शिक्षा से व्यक्ति में आत्मनिर्भरता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और लोकतांत्रिक मूल्यों का विकास होता है।

(ख) वर्तमान चुनौतियाँ
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता में भारी अंतर है।
डिजिटल शिक्षा का लाभ केवल संपन्न वर्ग तक सीमित है।
उच्च शिक्षा तक पहुँच आज भी सीमित वर्गों को ही उपलब्ध है।
शिक्षा प्रणाली में नौकरी-केंद्रित दृष्टिकोण हावी है, जबकि कौशल विकास और नवाचार की कमी है।

(ग) सरकारी संरक्षण की आवश्यकता
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 जैसे प्रयासों को सही अर्थों में लागू करना होगा।
सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों में बुनियादी ढांचा, शिक्षक प्रशिक्षण और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता बढ़ानी होगी।
वंचित वर्गों के लिए विशेष छात्रवृत्ति और निःशुल्क शिक्षा योजनाएँ।
शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि मानवता, समरसता और नैतिक मूल्यों का विकास होना चाहिए।
यदि भारत हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराए, तो 2047 तक एक साक्षर, कुशल और जिम्मेदार नागरिक समाज का निर्माण होगा, जो विकसित राष्ट्र की नींव बनेगा।

4. स्वास्थ्य: जनकल्याण का अनिवार्य आधार

(क) स्वास्थ्य का महत्व
“स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क और स्वस्थ समाज बसता है।”
स्वास्थ्य सेवाएं नागरिकों का बुनियादी अधिकार हैं।
बीमार और कुपोषित समाज कभी भी उत्पादक और रचनात्मक नहीं हो सकता।
महामारी और स्वास्थ्य संकट से अर्थव्यवस्था और सामाजिक समरसता दोनों प्रभावित होते हैं।

(ख) भारत की स्वास्थ्य चुनौतियाँ
अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहद सीमित हैं।
डॉक्टर-रोगी अनुपात वैश्विक मानकों से काफी पीछे है।
निजी अस्पतालों की ऊँची लागत गरीबों के लिए असहनीय है।
कुपोषण, मातृ-शिशु मृत्यु दर, मानसिक स्वास्थ्य जैसी समस्याएँ गंभीर हैं।

(ग) सरकारी संरक्षण की भूमिका
आयुष्मान भारत योजना जैसे कार्यक्रमों का और अधिक विस्तार।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों को आधुनिक तकनीक से लैस करना।
हर नागरिक के लिए निःशुल्क बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की गारंटी।
पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों (आयुर्वेद, योग, सिद्ध, यूनानी) और आधुनिक चिकित्सा का समन्वय।
स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता पर विशेष बल।
यदि हर नागरिक को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध होगी, तो समाज स्वस्थ, उत्पादक और सुखी बनेगा, जो 2047 के भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की राह प्रशस्त करेगा।

5. सुरक्षा: विकसित राष्ट्र का संरक्षक कवच

(क) सुरक्षा की व्यापक परिभाषा
सुरक्षा केवल बाहरी खतरों से रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शामिल है—
नागरिकों की आंतरिक सुरक्षा (अपराध-मुक्त समाज)।
महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा।
डिजिटल और साइबर सुरक्षा।
पर्यावरणीय और आर्थिक सुरक्षा।

(ख) भारत की सुरक्षा चुनौतियाँ
आतंकवाद और सीमाई तनाव।
साइबर अपराध और फेक न्यूज़।
सामाजिक असमानता से उत्पन्न तनाव और दंगे।
महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध।

(ग) सरकारी संरक्षण की आवश्यकता
पुलिस और न्याय व्यवस्था को पारदर्शी और तेज़तर्रार बनाना।
स्मार्ट तकनीक आधारित सुरक्षा तंत्र (CCTV, AI, साइबर मॉनिटरिंग)।
सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ—पेंशन, बीमा, बेरोज़गारी भत्ता।
सामुदायिक पुलिसिंग और जन-सहयोग से सुरक्षित वातावरण।
जब नागरिक सुरक्षित महसूस करेंगे, तभी वे शिक्षा और स्वास्थ्य का पूरा लाभ ले पाएंगे और राष्ट्र के विकास में सकारात्मक योगदान देंगे।

6. शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा का परस्पर संबंध
शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान और रोजगार देती है।
स्वास्थ्य उसे काम करने और योगदान देने की शक्ति देता है।
सुरक्षा उसे निडर होकर समाज और राष्ट्र के लिए कार्य करने का अवसर देती है।
इन तीनों के बिना कोई भी समाज न तो समरस हो सकता है और न ही विकसित।

7. विकसित भारत लक्ष्य-2047 हेतु सुझाव और कार्यनीति

1. समान शिक्षा व्यवस्था:
हर बच्चे के लिए निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा।
कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा पर बल।

2. स्वास्थ्य सेवाओं का सार्वभौमीकरण:
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मज़बूत करना।
डिजिटल स्वास्थ्य मिशन का विस्तार।

3. सुरक्षा का आधुनिकीकरण:
साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान।
न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ और सुलभ बनाना।

4. समरस समाज के लिए सामाजिक सुधार:
जातिगत भेदभाव, लैंगिक असमानता और सांप्रदायिक तनाव को समाप्त करना।
नागरिकों में संविधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता की भावना का प्रचार-प्रसार।

5. सरकारी संरक्षण और राजनीतिक इच्छाशक्ति:
नीतियों का केवल घोषणा नहीं, बल्कि प्रभावी क्रियान्वयन।
भ्रष्टाचार और कुप्रशासन पर कठोर अंकुश।

भारत वर्ष 2047 में विकसित राष्ट्र बनेगा या नहीं, यह केवल GDP की वृद्धि दर या वैश्विक रैंकिंग पर निर्भर नहीं करता। असली विकास तब होगा जब प्रत्येक नागरिक—चाहे वह अमीर हो या गरीब, ग्रामीण हो या शहरी, स्त्री हो या पुरुष—समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुलभ स्वास्थ्य और सुरक्षित जीवन प्राप्त करेगा। भारत के विकास की असली पहचान केवल उसकी आर्थिक समृद्धि या तकनीकी प्रगति से नहीं होगी, बल्कि उससे होगी कि यहाँ का प्रत्येक नागरिक कितना सुरक्षित, शिक्षित, स्वस्थ और समान अवसरों से संपन्न है।

विकसित भारत लक्ष्य-2047 की परिकल्पना तभी साकार हो सकती है जब शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के तीनों स्तंभ मजबूत आधार बनें और इनका संरक्षण सरकार की प्राथमिक नीतियों में सर्वोच्च स्थान पाए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से समाज में समान अवसर और समरसता स्थापित होगी, जिससे प्रत्येक वर्ग अपनी क्षमता के अनुरूप योगदान कर सकेगा। सुलभ और किफ़ायती स्वास्थ्य सेवाएं न केवल नागरिकों को स्वस्थ जीवन देंगी, बल्कि उत्पादक और सशक्त मानव संसाधन तैयार करेंगी। सुरक्षित वातावरण प्रत्येक नागरिक को भयमुक्त होकर नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक सहयोग में संलग्न होने का अवसर देगा। यही वह तिकड़ी है जो विकसित भारत की नींव को मजबूत करेगी। सरकार का उत्तरदायित्व केवल नीतियाँ बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता और समावेशी दृष्टिकोण अनिवार्य है। साथ ही, नागरिक समाज को भी अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन करना होगा, क्योंकि राष्ट्र का विकास केवल सरकार से नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से संभव है।

वर्ष 2047 का भारत तब ही वास्तविक रूप से विकसित कहलाएगा जब समरसता और जनकल्याण की भावना उसकी आत्मा में होगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा का सरकारी संरक्षण इस सपने को यथार्थ में बदलने का सबसे ठोस मार्ग है। यदि आज हम ठोस कदम उठाएँ, तो आने वाली पीढ़ियाँ एक ऐसे भारत की नागरिक होंगी जो न केवल आर्थिक रूप से सशक्त होगा, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत होकर विश्व के लिए आदर्श बनेगा। समरसता और जनकल्याण ही वह आधार है, जिस पर विकसित भारत की इमारत खड़ी होगी। और इस आधार को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा का सरकारी संरक्षण अनिवार्य है। यदि हम आने वाले 22 वर्षों में इन तीन क्षेत्रों में ठोस सुधार और निवेश करें, तो वर्ष 2047 का भारत निश्चित ही एक ऐसा विकसित राष्ट्र होगा, जो न केवल आर्थिक रूप से मज़बूत होगा, बल्कि सामाजिक रूप से समरस और मानवता व कल्याण की मूल भावना से परिपूर्ण होगा।

डॉ प्रमोद कुमार
डिप्टी नोडल अधिकारी, MyGov
डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा

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