लेख
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बुद्ध पूर्णिमा की वर्तमान प्रासंगिकता, बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष
भगवान गौतम बुद्ध इतिहास के अदभुत और अद्वितीय महापुरुष थे: बुद्ध के संदेश और शिक्षाओं को अमल में लाकर विश्व…
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बौद्ध धम्म: जातियां का विखंडन और विकसित व अखंड भारत के निर्माण का पथ
भारत एक प्राचीन सभ्यता है जिसकी विविधता उसकी सबसे बड़ी पहचान रही है। परंतु यही विविधता, जातीय भेदभाव और सामाजिक…
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जातिव्यवस्था (रहस्यमय सामाजिक संरचन): एक श्रम विभाजन सामाजिक व्यवस्था थी न कि श्रमको का विभाजन
भारत, विविधताओं का देश, जहां भाषाएं, संस्कृतियां, और परंपराएं एक साथ फलती-फूलती हैं। लेकिन इसी विविधता के बीच एक ऐसी…
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जो कहा वो किया – आपरेशन सिंदूर
अप्रैल 22, 2025 पहलगाम में 26-निहत्थे निर्दोष हिन्दुओं की धर्म पूछकर हत्या से पूरा देश आहत था। दुःख और क्रोध…
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‘अखंड और विकसित भारत’ का सपना साकार हेतु तथागत महात्म्य गौतम बुद्ध के पथ (धम्म) का अनुकरण और अनुसरण द्वारा ही संभव
भारतवर्ष प्राचीनतम समय में विश्वगुरू के रूप में सुप्रसिद्ध विश्वविख्यात राष्ट्र व देश रहा है। तत्कालीन समय में सम्पूर्ण भारत…
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स्वाभिमानी किसान को कर्ज नहीं, फ़सल के वाजिब दाम दो
देश का छोटा या बड़ा कैसा भी किसान हो वह परेशान इसलिए है क्योंकि उसको उनकी फसल का उचित दाम…
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बौद्ध धर्म: एक धम्म और लोक कल्याण शासन के रूप में मानव जीवन पद्धति
बुद्ध धम्म एक सार्वभौमिक, मानवीय और व्यावहारिक दर्शन है जो करुणा, अहिंसा, समानता और आत्मज्ञान पर आधारित है। यह केवल…
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गुलामगिरी: दलितों, पिछड़ों और महिलाओं की दुर्दशा का दस्तावेज और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महात्मा ज्योतिबा फुले के विचारों की प्रासंगिकता
भारत का सामाजिक ढांचा प्राचीन काल से ही गहरे जातिगत विभाजन और लैंगिक भेदभाव से ग्रसित रहा है। इस व्यवस्था…
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विकसित भारत: भारतीय ज्ञान परंपरा में संचार अध्ययन की पृष्ठ भूमि
भारतीय ज्ञान परंपराओं ने ऐतिहासिक और आधुनिक दोनों संदर्भों में संचार को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन…
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“यदि समाज में न्याय नहीं है, तो संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, वह व्यर्थ है” ‘सामाजिक न्याय’ पर आधारित, डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के कथन की वर्तमान में प्रासंगिकता
भारतीय समाज के इतिहास में डॉ. भीमराव आंबेडकर का स्थान अत्यंत गौरवपूर्ण है। वे केवल संविधान निर्माता नहीं थे, बल्कि…
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बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR): ज्ञान और विचार की कानूनी संरक्षण संस्था
21वीं सदी को ज्ञान और सूचना की सदी कहा जाता है। आज के वैश्विक युग में किसी भी राष्ट्र की…
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