लेख

सोमनाथ का सनातन सौंदर्य

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

सनातन संस्कृति शाश्वत है। इसके अनुयायियों ने कभी अपना मत किसी अन्य पर थोपने का प्रयास नहीं किया। किसी अन्य के आस्था स्थलों पर प्रहार नहीं किया। लेकिन विदेशी आक्रांताओं ने सनातन आस्था के स्थलों पर अनेक बार प्रहार किए। वसुधैव कुटुंबकम् पर विश्वास रखने वाले सनातनी ऐसे विध्वंस की कल्पना नहीं कर सकते थे। इसलिए इसे हमलों का सामना करने की उनकी कोई तैयारी नहीं थी। विदेशी आक्रांतों ने सोचा होगा कि आस्था के स्थलों का विध्वंस करके वह सनातन संस्कृति को समाप्त कर देगे। लेकिन उनके मंसूबे पूरे नहीं हुए। विध्वंस पर गौरव के साथ पुनर्निर्माण हुआ। नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ की सरकार के प्रयासों से अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर का निर्माण हुआ। तत्कालीन उपप्रधानमंत्री बल्लभ भाई पटेल के प्रयासों से सोमनाथ मंदिर भव्य रूप में प्रतिष्ठित हुआ। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद भी इसके उद्घाटन समारोह में सहभागी हुए थे। यह मंदिर गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित है। भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में यह प्रथम है। समुद्र के तट पर स्थित है। इसलिए समुद्री लुटेरे यहां आसानी से पहुंचते रहे। उन्हें यहां संपदा मिलती थी। उन्होंने ऐसे संपदा और वैभव कहीं देखी नहीं थी। पौराणिक मान्यता के अनुसार चंद्रदेव सोम ने श्राप मुक्ति के लिए यहाँ तपस्या की थी। शिव जी ने प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया। इस कारण यह सोमनाथ धाम के रूप में प्रसिद्ध हुआ। महमूद गजनवी क्रूर लुटेरा था। 1026 ई.में उसने लुटेरों के अनेक समूह के साथ यहां आक्रमण किया। अपने को शासक कहने वाले खिलजी,तुगलक और औरंगजेब जैसे लोग भी यहां लुटेरे बन के आए थे। लेकिन प्रत्येक आक्रमण के बाद मंदिर का जीर्णोद्धार भी चलता रहा।1783 में अहिल्याबाई ने मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। मानव रूप में पृथ्वी पर आए प्रभु श्री कृष्ण ने यहीं से वैकुंठ प्रस्थान किया था।

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