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शदी के महानायक संविधान निर्माता भारतरत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर: एक महान नारीवादी व उनके सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक उत्थान के अग्रदूत और महानायक

डॉ. प्रमोद कुमार

शदी के महानायक संविधान निर्माता भारतरत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर भारतीय समाज के एक महान सुधारक, संविधान निर्माता और न्यायविद थे। उन्होंने न केवल दलितों और पिछड़ों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया, बल्कि महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक उत्थान के लिए भी अनेक प्रयास किए। वे महिलाओं को समान अधिकार देने के पक्षधर थे और उन्होंने भारतीय संविधान में महिलाओं की समानता और स्वतंत्रता को सुनिश्चित किया।डॉ. भीमराव अंबेडकर को सामाजिक न्याय और समता के सबसे बड़े प्रवर्तकों में से एक माना जाता है। वे केवल दलितों और वंचित वर्गों के ही नहीं, बल्कि महिलाओं के भी मसीहा थे। उनका महिलाओं के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

नारी सशक्तिकरण के प्रति डॉ. अंबेडकर का दृष्टिकोण
डॉ. अंबेडकर का मानना था कि किसी भी समाज की प्रगति का आकलन उस समाज में महिलाओं की स्थिति से किया जा सकता है। वे महिलाओं के अधिकारों के प्रति अत्यंत संवेदनशील थे और उन्होंने अपने समस्त जीवनकाल में नारी सशक्तिकरण के लिए कार्य किया। वे यह मानते थे कि जब तक महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक समाज में समता और न्याय स्थापित नहीं किया जा सकता।ब्रिटिश शासनकाल में भारतीय महिलाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। सामाजिक रूढ़ियों और परंपराओं के कारण उन्हें शिक्षा से वंचित रखा जाता था, बाल विवाह प्रचलित था, विधवाओं की दशा अत्यंत खराब थी, और दहेज प्रथा जैसी कुप्रथाएँ समाज में व्याप्त थीं।उनका महिलाओं के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान रहा है जिसे कुछ बिंदुओं में समझा जा सकता है:
1. हिंदू कोड बिल और महिलाओं के अधिकार
डॉ. अंबेडकर ने हिंदू कोड बिल तैयार किया, जो भारतीय महिलाओं को विरासत, विवाह, तलाक और संपत्ति में अधिकार दिलाने के लिए क्रांतिकारी कदम था। हालाँकि, तत्कालीन सरकार ने इसे पास नहीं किया, जिससे नाराज होकर उन्होंने कानून मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
2. समानता और शिक्षा पर जोर
उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं की प्रगति के बिना समाज की प्रगति असंभव है। उन्होंने लड़कियों की शिक्षा को अनिवार्य करने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की वकालत की।
3. विवाह और संपत्ति में समान अधिकार
बाबा साहेब ने महिलाओं को विवाह और तलाक में समान अधिकार देने की बात की। उनके प्रयासों से हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 अस्तित्व में आया, जिसने महिलाओं को विवाह में सुरक्षा प्रदान की।
4. रोज़गार और श्रम सुधार
उन्होंने महिलाओं के लिए मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1941 की वकालत की, जिससे महिलाओं को प्रसव के दौरान आर्थिक मदद और छुट्टी मिलने लगी।
5. धार्मिक ग्रंथों में महिलाओं की स्थिति पर सवाल
बाबा साहेब ने धार्मिक ग्रंथों में महिलाओं की दोयम दर्जे की स्थिति पर सवाल उठाए और कहा कि समाज में महिलाओं को पुरुषों के बराबर सम्मान और अवसर मिलना चाहिए।
6. संविधान में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा
भारतीय संविधान में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने कई प्रावधान रखे, जिससे महिलाओं को शिक्षा, नौकरी और राजनीतिक भागीदारी में समान अवसर मिले।
बाबा साहेब का योगदान न केवल कानूनी सुधारों तक सीमित था, बल्कि उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए सामाजिक चेतना भी जगाई। इसी कारण वे महिलाओं के मसीहा कहे जाते हैं।

डॉ. अंबेडकर ने महिलाओं की सामाजिक स्थिति को सुधारनेहेतु क्रांतिकारीकदम:
1. शिक्षा का अधिकार: उन्होंने महिलाओं को शिक्षा प्रदान करने की वकालत की। उनका मानना था कि शिक्षा ही वह साधन है जिससे महिलाएँ अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकती हैं और आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
2. विवाह और पारिवारिक अधिकार: उन्होंने महिलाओं को विवाह और तलाक में समान अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष किया।
3. सामाजिक कुरीतियों का विरोध: उन्होंने बाल विवाह, दहेज प्रथा और जातिगत भेदभाव जैसी कुरीतियों का खुलकर विरोध किया और इन्हें समाप्त करने के लिए कानून बनाने पर जोर दिया।

महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण
डॉ. अंबेडकर का मानना था कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनका आर्थिक रूप से सशक्त होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और उन्हें समान वेतन दिलाने के लिए अनेक प्रयास किए।उनके द्वारा किए गए आर्थिक सुधार:

1. समान वेतन का अधिकार:महिलाओं और पुरुषों को समान वेतन देने की वकालत की।
2. रोजगार के अवसर: उन्होंने महिलाओं को उद्योगों और सरकारी नौकरियों में समान अवसर दिलाने के लिए प्रयास किए।
3. संपत्ति का अधिकार: उन्होंने हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार दिलाने का प्रयास किया।

महिलाओं का राजनैतिक सशक्तिकरण
डॉ. अंबेडकर ने महिलाओं को केवल सामाजिक और आर्थिक ही नहीं बल्कि राजनैतिक रूप से भी सशक्त बनाने का प्रयास किया। उनका मानना था कि जब तक महिलाएँ राजनीति में सक्रिय भागीदारी नहीं करेंगी, तब तक वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष नहीं कर पाएँगी।उनके द्वारा किए गए राजनैतिक सुधार:
1. वोट देने का अधिकार: उन्होंने महिलाओं को मतदान का अधिकार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2. राजनीतिक प्रतिनिधित्व: उन्होंने भारतीय संविधान में महिलाओं को समान राजनीतिक अधिकार देने के लिए विशेष प्रावधान किए।
3. संविधान में महिलाओं के अधिकार: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 39 में महिलाओं को समानता व सुरक्षा के अधिकार दिए गए हैंजिनका श्रेय डॉ. अंबेडकर को जाताहै।

हिंदू कोड बिल और महिलाओं के अधिकार
डॉ. अंबेडकर का हिंदू कोड बिल भारतीय महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था। इस विधेयक के माध्यम से उन्होंने महिलाओं को विवाह, तलाक, गोद लेने और संपत्ति में समान अधिकार दिलाने का प्रयास किया। हालाँकि, उस समय के रूढ़िवादी समाज ने इसका भारी विरोध किया, जिसके कारण यह बिल पारित नहीं हो सका और इसके कारण उन्होंने कानून मंत्री के पद से इस्तीफा भी दे दिया।

हिंदू कोड बिल की पृष्ठभूमि
ब्रिटिश काल और स्वतंत्रता से पहले तक, हिंदू समाज में महिलाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। महिलाओं को संपत्ति में अधिकार नहीं था, तलाक लेने का कोई प्रावधान नहीं था और विवाह के मामले में भी उन्हें स्वतंत्रता प्राप्त नहीं थी। डॉ. अंबेडकर ने महसूस किया कि जब तक महिलाओं को कानूनी रूप से अधिकार नहीं मिलेंगे, तब तक उनकी स्थिति में सुधार नहीं आ सकता।

हिंदू कोड बिल की प्रमुख विशेषताएँ:
1. समान विवाह अधिकार: इस बिल के तहत महिलाओं को विवाह में समान अधिकार दिए गए। पति-पत्नी के संबंधों में समानता स्थापित करने का प्रयास किया गया।
2. तलाक का अधिकार: इस विधेयक ने महिलाओं को तलाक का अधिकार प्रदान किया, जो उस समय क्रांतिकारी परिवर्तन था। पहले केवल पुरुषों को ही तलाक लेने का अधिकार प्राप्तथा।
3. गोद लेने का अधिकार: महिलाओं को भी गोद लेने का कानूनी अधिकार मिला, जिससे वे अपने परिवार और संपत्ति की उत्तराधिकारी चुन सकें।
4. संपत्ति में अधिकार: इस विधेयक के माध्यम से महिलाओं को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार प्रदान किए गए। इससे पहले, केवल पुरुषों को ही पारिवारिक संपत्ति का उत्तराधिकारी माना जाता था।
5. विधवाओं के पुनर्विवाह को मान्यता: यह विधेयक विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता प्रदान करता था, जिससे उन्हें समाज में पुनः सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिलता।

हिंदू कोड बिल का विरोध
1. रूढ़िवादी हिंदू समाज का विरोध: यह विधेयक समाज के रूढ़िवादी वर्ग को स्वीकार्य नहीं था क्योंकि यह महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार प्रदान करता था।
2. धार्मिक आधार पर असहमति: कुछ वर्गों ने इसे हिंदू धर्म में अनावश्यक हस्तक्षेप बताया और इसे धर्म विरोधी बताया।
3. राजनीतिक दबाव: तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू और उनकी सरकार इस विधेयक को पारित कराने में विफल रही, क्योंकि संसद में इसका भारी विरोध हुआ।

हिंदू कोड बिल का प्रभाव
1. महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा: यह विधेयक भारतीय महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा और समानता का महत्वपूर्ण साधन बना।
2. समानता की दिशा में कदम: इस विधेयक के पारित न होने के बावजूद, इससे भारतीय समाज में महिलाओं के अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ी।
3. संवैधानिक बदलाव: बाद में विभिन्न कानूनों के माध्यम से इस विधेयक के कई प्रावधानों को लागू किया गया।
4. सामाजिक सुधारों की नींव: इस विधेयक ने आगे चलकर महिलाओं से जुड़े अन्य कानूनों, जैसे कि 1955 का हिंदू विवाह अधिनियम, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956, और दहेज निषेध अधिनियम 1961 को प्रेरित किया।

डॉ. अंबेडकर का त्यागपत्र
जब यह स्पष्ट हो गया कि हिंदू कोड बिल पारित नहीं हो पाएगा, तो डॉ. अंबेडकर ने कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने त्यागपत्र में इस बात पर जोर दिया कि वे ऐसे मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं बन सकते जो महिलाओं को उनके अधिकार देने में असमर्थ हो। उनका यह कदम भारतीय राजनीति और समाज के लिए एक बड़ा संदेश था कि महिलाओं के अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक उत्थान के लिए अथक प्रयास किए। उन्होंने महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के लिए कई कानून बनाए और उनके लिए शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी के द्वार खोले। उनके विचार और प्रयास आज भी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनका जीवन और कार्य हमें यह सिखाता है कि जब तक समाज में समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व की स्थापना नहीं होगी, तब तक सच्चे लोकतंत्र की परिकल्पना अधूरी रहेगी।

डॉ प्रमोद कुमार
डिप्टी नोडल अधिकारी, MyGov
डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा

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