खेललेख

मैच पर मतभेद

राकेश कुमार मिश्र

आजकल अपने देश में पिछले कई दिनों से एशिया कप में भारत और पाकिस्तान के बीच 14 सितम्बर को प्रस्तावित मैच का मुद्दा काफी गरम है। विपक्षी नेताओं से लेकर सामान्य जनता का एक बड़ा वर्ग भारत पाकिस्तान के बीच इस मैच के न खेले जाने को लेकर सरकार द्वारा इस मैच में खिलाड़ियों के खेलने पर प्रतिबंध की मांग कर रहा है। असुद्दीन ओवेसी ने तो संसद में इस मैच पर सरकार द्वारा भारतीय खिलाड़ियों के खेलने पर रोक की मांग यह कहकर उठाई कि पहलगाम हमले के बाद हमारा जमीर आतंकवादी मुल्क पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेलने की इजाजत कैसे दे सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मैच खेलना पहलगाम हमले में मारे गए निर्दोष मासूम लोगों के परिजनों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ होगा। विपक्षी नेताओं ने एवं अन्य गैर राजनीतिक लोगों ने भी ऐसी ही बात कही और भाजपा के राष्ट्रभक्ति के ऊपर भी सवाल खड़े किए।
मुद्दे की गरमाहट एवं सामान्य जनता की भावनाओं से जुड़े प्रश्न के कारण खेल मंत्रालय ने दो दिन पहले ही स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा गया कि सरकार किसी भी बहुपक्षीय या आईसीसी द्वारा आयोजित टूर्नामेंट में खिलाड़ियों के पाकिस्तान के साथ खेलने पर कोई रोक नहीं लगाएगा। भारत सरकार अपने उस निर्णय पर आज भी दृढ़ता के साथ कायम है कि भारत पाकिस्तान के साथ कोई द्विपक्षीय सीरीज या मैच नहीं खेलेगा और न तो भारत की टीम पाकिस्तान जाएगी, न ही पाकिस्तान की टीम खेलने भारत आ सकेगी। अभी कुछ समय पहले ही भारत ने चैम्पियन ट्राफी में खेलने के लिए पाकिस्तान जाने से मना कर दिया था और आईसीसी को मजबूर होकर भारत के सभी मैच दुबई में कराने पड़े थे। ऐसा सख्त रुख भारत सरकार और बीसीसीआई का पाकिस्तान के विरुद्ध तब भी था जब पहलगाम जैसी नृशंस एवं अमानवीय घटना भी नहीं हुई थी। खेल मंत्रालय ने यह भी कहा कि हम आईसीसी के महत्वपूर्ण सदस्य हैं और उसके निर्णयों एवं नियमों से बंधे हैं। भारत पाकिस्तान की करतूतों एवं उसके भारत के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैये के कारण अपनी मनचाही नहीं कर सकते।
मेरा मानना है कि भारत सरकार का पाकिस्तान के साथ एशिया कप या किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट में खेलने पर भारतीय खिलाड़ियों पर रोक न लगाना एक सही कदम है। हम भी देश के लोगों की भावनाओं की कद्र करते हैं परन्तु हमें भावनाओं से ऊपर उठकर कुछ तथ्यों पर गौर करना होगा। भारतीय टीम एशिया कप जीतने की प्रबल दावेदार है और पाकिस्तान से मैच न खेलकर वह पाकिस्तान को बिना मैच जीते दो अंक देकर पाकिस्तान को मजबूत करने का ही काम करेगी। यदि किसी भी सूरत में भारत इन दो अंको के कारण पिछड़ जाता है और फाइनल तक नहीं पहुंचता तो इसका सीधा लाभ पाकिस्तान को ही होगा। क्रिकेट बहुत अनिश्चितताओं का खेल है और हम भावनाओं में बहकर अपने सबसे कट्टर प्रतिद्वंदी को ऐसा मौका नहीं दे सकते जो आगे हमारे लिए ही नुकसानदेह साबित हो। यही नहीं भारत के पाकिस्तान के साथ मैच न खेलने के निर्णय से टूर्नामेंट की लोकप्रियता तो कम होगी ही, पाकिस्तान को भारत के विरूद्ध दुष्प्रचार करने और भारत को खेल को भी शत्रुता के दायरे में लाने और खेलभावना के विपरीत जाने जैसे आरोपों से घेरने का प्रयास होगा।हमें यह भी निर्णय करना होगा कि क्या हम भविष्य में टी20 विश्व कप, वन डे चैम्पियनशिप,और टेस्ट चैम्पियनशिप जैसे आईसीसी की अनेक प्रतियोगिताओं में भी पाकिस्तान के साथ न खेलकर अपनी टीम एवं खिलाड़ियों के ट्राफी जीतने के अरमानों को कुचलने के लिए तैयार हैं। मैं नहीं समझता कि इससे भारत की कोई प्रतिष्ठा बढ़ेगी और पाकिस्तान की करतूतों में कोई कमी आएगी। इसके विपरीत पाकिस्तान तो खुश ही होगा अब किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट में उसे भारत जैसे मजबूत प्रतिद्वंदी का सामना नहीं करना होगा। भारत एक सशक्त राष्ट्र है और पाकिस्तान को उसकी करतूतों का माकूल जवाब देने के लिए अनेकों कूटनीतिक एवं सामरिक रास्ते हैं। यह कहना गलत नहीं होगा की मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने समय समय पर पाकिस्तान की कायराना एवं अमानवीय हरकतों का सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर एयर स्ट्राइक और सिंधु जल समझौते के स्थगन से आपरेशन सिंदूर तक हमेशा करारा जवाब दिया है। यही नहीं मोदी जी ने कूटनीतिक तौर पर पाकिस्तान को विश्व में अलग थलग करने में काफी सीमा तक सफलता पाई है और विश्व के समक्ष पाकिस्तान को बेनकाब भी किया है और आगे भी करता रहेगा। भारत के सामने पाकिस्तान की औकात क्या है, यह विश्व ने हाल ही में आपरेशन सिंदूर के समय देखा है। ऐसे में यह बात समझ से परे है कि भारत किसी बहुपक्षीय या वैश्विक टूर्नामेंट में पाकिस्तान से नजर चुराए और उसका ही मार्ग प्रशस्त करे।
पहलगाम में हुई शर्मनाक एवं नृशंस घटना पहली घटना नहीं है। इसके पहले भी यूपीए के शासन काल में भी पाकिस्तान समर्थित अनेकों आतंकी घटनाएं हुई। 26/11 जैसी बड़ी आतंकी घटना मुम्बई में हुई। उस समय की सरकार ने तो क्रिकेट मैच पर पाबंदी तो दूर पाकिस्तान के विरुद्ध कोई सामरिक या कूटनीतिक कार्यवाही तक नहीं की।आखिर विपक्ष किस मुंह से पाकिस्तान के साथ भारत के मैच को रोकने की मांग कर रहा है और अपने दिनों को भूलकर वर्तमान सरकार पर झूठी देशभक्ति दिखाने का दुष्प्रचार कर रहा है।
हमें और विशेष रूप से विपक्ष को यह भी समझना होगा
कि लाख शत्रुतापूर्ण व्यवहार किए जाने के बाद भी पाकिस्तान और भारत में राजनयिक सम्बन्ध बरकरार हैं। भारत की तरह पाकिस्तान भी संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व स्वास्थ्य संगठन, आई एम एफ, विश्व बैंक जैसी सभी अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं का सदस्य है जहाँ समय आने पर भारत से उसका सामना होता है और भारत उसकी करतूतों पर उसे वहाँ करारा जवाब भी देता है। वह पाकिस्तान का एफ ए टी एफ, आई एम एफ जैसे मंचो पर विरोध भी करता है न कि इन मंचो का पाकिस्तान के कारण बहिष्कार। इसी तरह भारतीय क्रिकेट या अन्य खेल टीमों को भी पाकिस्तान का किसी भी अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में डटकर सामना करना चाहिए न कि पाकिस्तान का बहिष्कार कर उसे भारत पर बढ़त लेने का मौका देना चाहिए। अन्त में मैं यह भी कहना चाहूंगा कि भारत एवं पाकिस्तान के सम्बन्ध किसी से छिपे नहीं हैं। आईसीसी को भी अधिक कमाई एवं रोमांच बढ़ाने के लिए भारत और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में रखने के फैसले से भविष्य में बचना चाहिए तथा बीसीसीआई को इसके लिए दबाव बनाना चाहिए जिससे लीग मैचों में भारत और पाकिस्तान के मैच न हो और नाक आउट दौर में ही यह देश आमने सामने हों।

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