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2025 दे गया कुछ खट्टी-मीठी यादें – मौलिक रचना

नूतन गर्ग

2025 दे गया कुछ खट्टी-मीठी यादें
कुछ पाया कुछ खोया
कभी कोई मन को सुकून दे गया
तो कभी कोई मन को बेचैन कर गया
कभी सुबह तो कभी शाम
मन में विचरण करते अरमान
सही ग़लत में उलझकर अधूरे से दिखते सपने
पर जिंदगी इसी का तो नाम है
कभी रिश्तों में उलझना
कभी अपनों से उलझना
कभी खुद से ही उलझना
अच्छा लगता है जब कोई धीरे से आकर कहे
हम सब आपके साथ हैं आप हंसो
मन की उलझन झट से छू-मंतर हो जाना
सच खट्टी-मीठी यादें ही तो
स्वागत करती हैं आगे आने वाले समय को
2026 स्वागत है तुम्हारा
कभी न डराना न भागना
बस हमें समय पर चेताना जरूर
यही गुजारिश है आने वाले साल से हमारी
सभी के लिए नया साल एक न‌ई उम्मीद
एक न‌ई किरण के रूप में उभरे
यही कामना है नूतन की न‌ए साल से।

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