
अयोध्या में श्री रामजन्मभूमि पर दिव्य व भव्य मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ कारिडोर तथा मथुरा वृंदावन सहित प्रदेश भर के धार्मिक स्थलों का विकास, माफिया राज को मिट्टी में मिलाने, आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करने और रोजगार की दिशा में सफलतापूर्वक आगे बढ़ने के ठोस प्रमाणों के साथ भारतीय जनता पार्टी 2027 के चुनावों की ओर बढ़ रही है। पार्टी आगे बढ़ते हुए 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में अपनाई गई रणनीति को भी साथ रखकर महापुरुषों, स्मारकों व प्रतीकों का सम्मान बढ़ाने के साथ ही दलितों, पिछडों तथा अतिपिछड़ों के मध्य अपनी जमीन मजबूत बनाने में जुट गई है। प्रदेश में 22 प्रतिशत दलित वोट के लिए राजनैतिक घमासान मचा हुआ है। सपा, बसपा व कांग्रेस में भी निहित राजनैतिक स्वार्थ के कारण दलित प्रेम का भाव उमड़ पड़ा है।
भाजपा स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा करी है कि बाबासाहब की हर प्रतिमा पर सरकाऱ छतरी लगाएगी और वहां पर पार्को का सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। इसके साथ ही उन स्थानों पर बाउंड्री वाल का निर्माण भी कराया जाएगा। सरकार ने महापुरुषों, राष्ट्रीय स्तर के समाज सुधारकों और सांस्कृतिक विभूतियो की मूर्तियो की सुरक्षा और सुंदरीकरण के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए आंबेडकर मूर्ति विकास योजना शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसके अंतर्गत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 10 स्मारकों का विकास कराया जायेगा। इसके अंतर्गत डॉ. भीमराव आंबेडकर के साथ संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले, महर्षि वाल्मीकि समेत सामाजिक न्याय के अन्य महापुरुषों के मूर्ति स्थलो का सुंदरीकरण होगा।
यह भारतीय जनता पार्टी की एक अभिनव योजना है। कम से कम 300 ऐसे महापुरुष हैं जिन पर कोई न कोई योजना आने वाली है। जब से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डा. आंबेडकर की मूर्ति पर छत्र लगाने व चहारदीवारी तथा पार्कों के सौंदर्यीकरण की घोषणा की है तब से समाजवादी दल व अन्य दलित राजनीति करने वाले दलों के माथे पर बल आ गया है। प्रदेश के नए मेडिकल कालेजों व विश्वविद्यालयों के नामकरण भी महापुरुषों के नाम पर ही किये जा रहे हैं। अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि व संत रविदास के मंदिर भी बनाए गए हैं।
सभी जातिवादी व संविधान की किताब हाथ में लेकर घूमने वाले विरोधी दल यह बात भूल जाते है कि भाजपा सरकार बाबासाहेब डा भीमराव आंबेडकर के विचारों और विरासत को सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध रही है। आज लोग जिन डा. आंबेडकर जी के नाम पर मात्र राजनीति करते हैं उन्हें भारतरत्न देने का काम 1990 में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी सरकार ने ही किया था। 2014 में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व मे पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद बाबासाहेब के जीवन से जुड़े पांच स्थानों को विकसित किया गया जिसमें मध्य प्रदेश में उनके जन्मस्थान, शिक्षाभूमि लंदन, दीक्षाभूमि नागपुर और महापरिनिर्वाण (दिल्ली) तथा चैत्यभूमि मुंबई शामिल हैं । 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई ताकि उनके संवैधानिक योगदान को याद किया जा सके।
भाजपा सरकार ने ही 14 अप्रैल को राष्ट्रीय समरसता दिवस मनाने का निर्णय लिया और दिल्ली में डा. आंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र का उद्घाटन किया गया। भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने ही डा.आंबेडकर की विरासत को संजोकर उचित सम्मान दिया और अब उसी कार्य को और आगे बढ़ाने जा रही है।
यूपी में सपा और बसपा की सरकारों ने भी डॉ. आंबेडकर की विरासत को संरक्षित करने के लिए कोई कार्य नहीं किया बस जब चुनाव आता है तो इनको उनके कार्यों में से आरक्षण की ही याद आती है और उसी को आधार मानकर फर्जी अफवाहें उड़ाने लगते हैं कि भाजपा सरकार किसी न किसी बहाने आरक्षण को समाप्त कर देगी। विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं इसलिए ये दल एक बार फिर डा. आंबेडकर और आरक्षण को याद कर रहे हैं और 22 प्रतिशत वोटों के लिए जयंती मनाने निकल पड़े हैं जबकि सच्चाई क्या है, सब जानते हैं।



