लेखसम्पादकीय

विकसित उत्तर प्रदेश की नई पहचान बनेगा जेवर एयरपोर्ट

मृत्युंजय दीक्षित

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने जा रहे विधानसभा चुनावों से पूर्व विकास योजनाओं के लोकार्पण की लहर चल रही है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विगत 28 मार्च को जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को देश को समर्पित किया। यह एयरपोर्ट आधुनिकतम सुविधाओं का अद्भुत संगम होगा। प्रधानमंत्री ने इस एअरपोर्ट का लोकार्पण जनता द्वारा उनके मोबाइल की फ़्लैश लाइट ऑन करा कर करवाया गया। एअरपोर्ट से पहली उड़ान यूपी सरकार के विमान ने भरी जिसमें प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यात्री बने। इस एयरपोर्ट से चार सप्ताह बाद यात्रियों के लिए नियमित उड़ानें प्रारंभ हो जाएंगी। नोएडा में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की स्थापना का प्रस्ताव 2001 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री व वर्तमान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रखा था किंतु निहित राजनैतिक कारणों से यह अधर में लटका रहा। इस प्रकार इस परियोजना के प्रथम चरण के ही पूर्ण हेने में 25 वर्ष लग गए जिस कारण उत्तर प्रदेश के साथ साथ दिल्ली एनसीआर क्षेत्र का विकास भी अटका रहा।
जेवर एयरपोर्ट के लोकार्पण के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नोएडा एयरपोर्ट के साथ ही विकसित यूपी और विकसित भारत अभियान का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। यूपी अब देश के सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट वाले राज्यों में से एक हो गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि जेवर एयरपोर्ट के लोकार्पण के पूर्व ही केंद्र सरकार ने उड़ान 2.0 योजना को मंजूरी प्रदान की है जिसके अंतर्गत 100 नए एयरपोर्ट व 200 नये हैलीपैड बनेंगे जिसके लिए 29,000 करोड़ रुपए स्वीकृत किये गये हैं। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सपना है कि हवाई चप्पल वाले भी हवाई यात्रा का सुगम आनंद ले सकें और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उड़ान 1.0 योजना में 1.6 करोड़ लोगों ने हवाई यात्रा की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लिए सबका प्रयास जरूरी है इस परियोजना के लिए किसानों ने भी अपनी जमीन दी है।आधुनिक कनेक्टिविटी का जो विस्तार हो रहा है उसे पश्चिम यूपी में फूड प्रोसेसिंग को बल मिलेगा और यहां के कृषि उत्पाद दुनिया के बाजारों में और बेहतर तरीके से पहुँच सकेंगे।
जेवर एयरपोर्ट की अहम विशेषताएं – जेवर एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा तथा प्रथम चरण में ही यह 1.2 करोड़ यात्रियों को एक रन वे से सेवा प्रदान करने की क्षमता रखता है। यह देश का पहला ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट होगा जो सौर ऊर्जा का उपयोग करेगा और कार्बन उत्सर्जन को कम करेगा। इस एयरपोर्ट में आगामी चरणों में 5 रन वे का निर्माण होने के बाद यात्री क्षमता बढ़कर 22.5 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष हो जाएगी। यह एयरपोर्ट पूरी तरह से डिजी यात्रा ऐप के माध्यम से चलेगा।
एयरपोर्ट में आइएलएस कैट -3 सिस्टम है जिससे घने कोहरे में भी विमान आसानी से उतर सकेंगे। इस एयरपोर्ट में अत्याधिुनक तकनीक का उपयोग किया गया है जिसमें यात्रियों के लिए डिजीलाकर आधारित बायोमैट्रिक चेक इन फेस स्कैन से प्रवेश और एआई आधारित सुरक्षा होगी। यहां का रनवे 3900 मीटर लंबा रन वे होगा जो बड़े विमानों का संचालन कर सकेगा। यह यमुना एक्सप्रेस वे से सीधा जुड़ा है और इसे मेट्रो रेल और प्रस्तावित रैपिड रेल से जोड़ने की योजना है। यहाँ यात्रियों के लिए प्रवेश से लेकर बोर्डिंग गेट तक पहुंचने की प्रक्रिया बहुत तेज होगी जो लगभग 20 मिनट में पूरी हो सकती है। यहां पर 30 एकड़ में कार्गो टर्मिनल का भी निर्माण किया गया है जिस पर 800 करोड़ की लागत आई है तथा 48 चेक इन प्वाइंट बनाए गए हैं। यहां की मल्टीमाइल कार्गो सुविधा की क्षमता आरम्भ में 2.5लाख मीटिक टन माल की ढुलाई की है जिसे बढ़ाकर 18 लाख मीट्रिक टन किया जा सकता है। यहां पर 57 एकड़ में 700 करोड़ की लागत से वेयर हाउस एवं लॉजिस्टिक सुविधा विकसित की गई है। इस एयरपोर्ट के प्रथम चरण के निर्माण में 11200 करोड़ की लागत आई है।
इस एयरपोर्ट के निर्माण व संचालन के बाद दिल्ली- एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश (ग्वालियर – मुरैना), राजस्थान ( धौलपर -भरतपुर) के हिस्सों को मिलाकर करीब सात करोड़ आबादी को सीधा लाभ मिलने जा रहा है। इस एयरपोर्ट के कारण जेवर एयरोट्रोपोलिस सिटी के रूप में चमकेगा। गौतमबुद्ध नगर और आसापास के जिलों के बीच क्षेत्रीय जुड़ाव और विकास होगा। इनके उत्पाद और सेवाओ के समक्ष आने वाली चुनौतियां भी कम होंगी। यह एयरपोर्ट पूर्ण हो जाने के बाद शहर में तमाम होटल व कार्यालय, शापिंग मॉल, लॉजिस्टिक हब आदि का निर्माण भी तीव्र गति से होने जा रहा है। शहर भर में अगली पीढ़ी वाली सुविधाएं विकसित होंगी।
यह एयरपोर्ट केवल रनवे नहीं प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने का आधार बनेगा। यह एयरपोर्ट प्रदेश के उज्जवल भविष्य का आधार बनेगा क्योंकि यह उत्तर भारत के विदेश व्यापार व औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई तक पहुंचाते हुए व्यापाक रोजगार का भी सृजन करेगा। यह एयरपोर्ट पश्चिमी यूपी के किसानों, छोटे और लघु उद्योगों युवाओं के लिए भी नए अवसर लेकर आने वाला है।

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