
प्राचीन काल में संपूर्ण कश्मीर सनातन चेतना का क्षेत्र था। ऋषि कश्यप ने इसकी स्थापना की थी। यह तप शिक्षा और ज्ञान का केंद्र था। इसीलिए यह शारदा पीठ के रूप में भी प्रतिष्ठित हुआ। बारहवीं शताब्दी में कल्हण ने संस्कृत में राजतरंगिणी की रचना की। कश्मीर के सनातन इतिहास का सबसे प्रामाणिक स्रोत है। इसमें महाभारत काल से लेकर उस समय तक के सौ से अधिक राजाओं का इतिहास, सांस्कृतिक उन्नति का विवरण है। विदेशी आक्रांताओं के समय यहां धर्मांतरण का दौर चला। कुछ दशक पहले आतंकी गतिविधियों के दुष्परिणाम हुए। जम्मू का रघुनाथ मंदिर भी उनके निशाने पर रहा। लेकिन यह आज भी सनातन गौरव के रूप में प्रतिष्ठित है। इसके विशाल परिसर में सात हिंदू हैं। सभी के अपने गर्भगृह और शिखर हैं। रघुनाथ मंदिर का निर्माण प्रथम डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह ने वर्ष 1835 में करवाया था। बाद में उनके पुत्र महाराजा रणबीर सिंह ने इसे पूर्ण कराया। मुख्य मंदिर में रघुनाथ जी माता सीता लक्ष्मण जी और हनुमान जी विराजमान है। अन्य मंदिरों में हनुमान जी,भगवान विष्णु, शिव जी, द्वारिकाधीश, शालिग्राम विराजमान हैं।



