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सरकार के पास कोरोना महामारी के लिए अतिरिक्त फंड की पूर्ति कैसे हो? प्रधानमंत्री को भेजा सुझाव

परम आदरणीय,
विश्व महामारी कोरोना के प्रभाव को देखते हुए आप द्वारा पूरे भारत को सुरक्षित करने के लिए आप द्वारा लिए गये ‘लाॅक डाउन’ के निर्णय का साथ आम जनता को विभिन्न राहत पैकेज और बाजार में आर्थिक पैकेज देकर राहत प्रदान करना, एक जागरुक सरकार और कुशल नेतृत्व का परिचय है। हम आपको बधाई देते हैं।
लाॅकउडान के प्रारम्भ में कुशल एवं अकुशल मजदूर, किसान और उज्जवला लाभार्थियों के लिए आपकी सरकार ने 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज देने के साथ बाजार में नगदी तरलता बनाये रखने और एमएसएमई उद्योगों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक का नाबार्ड, सिडबी और एनएसबी को 50 हजार करोड़ के साथ नगदी प्रवाह के लिए 1 लाख करोड़ और रेपो रेट में कमी करते हुए बहुत राहत प्रदान की। इसके साथ ही केन्द्र सरकार देश के मझोले व्यापारियांे के लिए प्रोत्साहन पैकेज पर विचार कर रही है। वास्तव मंे हम सरकार के प्रसायों की सराहना और प्रशंसा करते हैं, इस प्रकार के राहत पैकेज से आपने अपना ‘राजधर्म’ निभाया है।
विचारणीय बिन्दु यह भी है कि सरकार की लाॅकडाउन के दौरान और लाॅकडाउन के बाद भी आय का स्रोत भी राजस्व में कमी आएगी। इसका भी विस्तार से अध्ययन कर सकते हैं।
जीएसटी संग्रह बंदः
आमतौर पर सरकार को जी.एस.टी. से प्रति माह औसतन 1 लाख करोड़ का राजस्व संग्रह प्राप्त होता रहा है परन्तु लाॅकडाउन के कारण सरकार ने फरवरी, मार्च, अप्रैल के रिटर्न को अपलोड करने एवं टैक्स जमा करने को जून 2020 तक के लिए स्थगित कर दिया है, निःसंदेह जब रिटर्न दाखिल होंगे तभी टैक्स जमा हो पाएगा। फिलहाल सरकर को प्राप्त होने वाले राजस्व का स्रोत बंद हो गया है।
जबकि अप्रैल 2020 का पूरा माह लाॅकडाउन होने के कारण केवल आवश्यक वस्तुओं की बिक्री हो रही है, जिसके चलते निश्चित रुप से प्राप्त होने वाले राजस्व पर भारी प्रभाव रहेगा, अतः संग्रह बहुत कम होने की आशंका है।
ऐसे ही यदि मई माह में लाॅकडाउन नहीं खुल पाया तो यही स्थिति मई माह से प्राप्त होने वाले संग्रह की भी यही स्थिति रहेगी। इस प्रकार से मार्च, अपै्रल, मई का राजस्व जून तक प्राप्त होगा। जून माह में भी यह आशा नहीं की जा सकती कि बाजार में उठान सही तौर पर प्रारम्भ हो जाएगा जिसका राजस्व संग्रह जुलाई में प्राप्त होना है, अतः सरकार के सही तौर पर आशाप्रद रुप से राजस्व संग्रह का आवक अगस्त से प्रारम्भ होगा, इस प्रकार सरकार को मार्च से अगस्त 2020 तक प्रतीक्षा करनी होगी।
15 जून 2020 को आयकर की अग्रिम टैक्स की किस्त का संग्रह भी प्रभावित होगाः
चूंकि मई में भी लाॅडाउन अभी खुलने की संभावना नजर नहीं आ रही, और यदि खुल भी गया तो संभवतः उद्योगपति 15 जून तक जमा होने वाली आयकर की अग्रिम किस्त जमा कराने में असमर्थ ही रहेंगे। और उद्योगपतियों और सरकार को यह आंकलन नहीं हो पाएगा कि वित्तीय वर्ष 2020-2021 में देश के उद्योगों पर मंदी का कितना प्रभाव पड़ेगा, अभी निश्चित आंकलन नहीं हो पा रहा है। लेकिन इतना अवश्य है कि आयकर के अन्तर्गत प्राप्त होने वाला प्रथम तिमाही का एडवांस टैक्स अवश्य ही प्रभावित रहेगा। यह भी निश्चित है कि बाजार और निर्यात की स्थिति पहली और दूसरी तिमाही आयकर के एडवांस टैक्स को प्रभावित करेगी।
कर ;राजस्वद्ध विभागों में होने वाले सभी कर निर्धारण आदेश स्थगितः
चाहे कर विभाग केन्द्र का हो या राज्य का, सभी प्रकार के टैक्स जैसे वैट, आबकारी, सेन्ट्रल एक्साइज, केन्द्रीय उत्पाद, जी.एस.टी., आयकर आदि सभी कर निर्धारण जून के मध्य तक स्थगित कर दिये गये हैं जून के बाद निर्धारण होंगे तभी एक माह बाद राजस्व प्राप्त होगा। तत्पश्चात ही राजस्व प्राप्त होने की संभावना है। निश्चित है कि जुलाई मास से पूर्व राजस्व संग्रह प्रारम्भ नहीं हो पाएगा।
आबकारी टैक्स बंदः
राज्य सरकारोें को प्राप्त होने राजस्व का प्रमुख स्रोत शराब की बिक्री है जो कि लाॅकडाउन के चलते बंद है अतः राज्य सरकारों की आबकारी से प्राप्त होने वाला राजस्व भी प्राप्त नहीं हो पा रहा है। जबकि आबकारी के ठेके उठाने की प्रक्रिया मार्च के अंत में होने वाली थी, वह भी प्रभावित हो चुकी है।
ऐसे ही मंडी शुल्क, गृह कर, भूमि कर, स्टाम्प, पंजीयन, सम्पत्ति के पंजीयन एवं आर.टी.ओ. व प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों से प्राप्त होने वाला राजस्व की भी वसूली निकट भविष्य में नहीं हो रही है अथवा नहीं हो पाएगी। अतः केन्द्र और राज्य सरकार के सामने प्रश्न है कि कहां से राजस्व जुटाये और खर्च कैसे करें। जबकि इस महामारी और प्राकृतिक आपदा से बचाव के लिए सरकार को भरपूर संसाधन जुटाने हैं और भी सम्बन्धित विभाग को आवश्यक बजट उपलब्ध कराना है।
राजस्व जुटाने का स्रोत
ऐसे कोरोना जैसी प्राकृतिक आपदा के लिए राजस्व और फंड जुटाने की समस्या को सुलझाने के लिए हमारा सुझाव है कि बैंकों में ऐसे बहुत से जमा फिक्स डिपोजिट, बचत खाते में जमा धन है, जिनका फिलहाल कोई दावेदार लम्बे समय से सामने नहीं आया है बल्कि लगभग 20 सालों से कोई लेन-देन न होने के कारण ऐसे खाते ‘नाॅन-आॅपरेटिव हो चुके हैं और बैंक के पास ‘उचन्ती खाते’ ;ैनेचमदेम द्ध में पड़े हैं, बहुत से ऐसे खाताधारक हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है और ऐसे खातों में जमा राशि बैंकों के लाभ खाते में ‘एसेटस्’ के रुप में जमा है।
यह कहा जा सकता है कि ऐसे खातों एवं फिक्स डिपोजिट में जमा राशि देश के विकास में काम नहीं आ पा रही है। लेकिन हमारा यह सुझाव नहीं है कि ऐसी धनराशि को सरकार जब्त कर ले बल्कि उस धनराशि को ऐसे प्राकृतिक आपदा के समय सरकार देश में आपदा प्रबन्धन में उपयोग करे।
ऐसी धनराशि को राष्ट्रीय आपदा निधि में ट्रांसफर करते हुए ऐसे खाताधारकों को ‘राष्ट्रीय आपदा निधि बांडस्’ के अन्तर्गत ‘20 वर्षीय बांड्स’ सृजित कर निश्चित लाभ के साथ आवंटित कर दें। लेकिन शर्त यह रख दी जाए कि उस निश्चित समयावधि के बाद भी कोई दावेदार सामने नहीं आता है उसको राष्ट्रीय आपदा निधि में स्थायी रुप से हस्तातंरित कर दे।
इसी प्रकार भारतीय जीवन बीमा निगम में ऐसी बहुत-सी पाॅलिसिज हैं, जिनके एक या दो बार अर्थात नियमित किस्तें जमा न होने के कारण निगम के ‘उचन्ती खाते’ ;ैनेचमदेम द्ध में पड़ा है, इसी क्रम में साथ सरकारी कर्मचारियों के भविष्य निधि, कर्मचारी भविष्य निधि, एनपीएस जैसी जमाओं में लम्बे समय से जिनके दावेदार नहीं है। उनका में जमा धनराशि का भी उपयोग राष्ट्रीय आपदा निधि बांडस् में कर लिया जाएगा।
बैंक, जीवन बीमा निगम, जैसी बहुत सी सरकारी कल्याणकारी एजेन्सिसयों में ऐसे से बहुत से न्दबसंपउमक निदके ‘उचन्ती खाते’ ;ैनेचमदेमद्ध में पड़े हंै, उन सभी धनराशि का उपयोग सरकार तुरंत प्रभाव से अपनी ‘राष्ट्रीय आपदा निधि बांडस्’ में ट्रांसफर कर फंड एकत्र करना चाहिए।
राष्ट्रीय आपदा निधि बांडस्’ में जमा धनराशि करमुक्त होनी चाहिएः
साथ ही सुझाव है कि प्रस्तावित निधि के जनता में बांडस् जारी कर धन एकत्र किया जाए, वह पूर्ण रुप से आयकर से करमुक्त होनी चाहिए। साथ ही महिलाओं के नाम से जमा धनराशियों का स्रोत भी व्यक्त करने से छूट मिलनी चाहिए।
हमारे इस सुझाव से जहां सरकार को समुचित धनराशि प्राप्त हो जाएगी और अनुपयोगी धनराशि देश हित में प्रयोग हो सकेगी।
विश्वास है आप हमारे प्रस्ताव पर अवश्य ही विचार करेंगे।
साभार !
पराग सिंहल
राष्ट्रीय महासचिव
एडवोकेट प्रमोद राजे
अध्यक्ष, उ0 प्र0 प्रांत

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